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Panchkula News: सहायता प्राप्त निजी कॉलेजों में 2800-3000 पद खाली, भर्ती रोकने को हाईकोर्ट में चुनौती
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चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी सहायता प्राप्त निजी कॉलेजों में हजारों पद खाली होने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा है। डॉ. जगवंत सिंह की जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सरकार से 10 सितंबर तक जवाब मांगा है।
याचिका में राज्य सरकार के 8 अगस्त 2022 के मेमो को चुनौती दी गई है। इस मेमो ने 10 अक्तूबर 2014 के हाईकोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया रोक दी थी। याचिकाकर्ता ने सभी स्वीकृत रिक्त पदों को भरने की मांग की है। उसने 95 फीसदी अनुदान सहायता जारी रखने और व्यापक भर्ती नीति बनाने का भी आग्रह किया है। वर्ष 2005 में नई भर्ती पर रोक के बाद 1,925 शिक्षण और 964 गैर-शिक्षण पद खाली हुए थे। वर्तमान में 3,566 स्वीकृत पदों में से करीब 2,800 से 3,000 पद खाली हैं। इससे शिक्षण व्यवस्था, शोध और कॉलेजों की मान्यता पर असर पड़ रहा है।
भर्ती प्रक्रिया में खामियां :
10 अक्तूबर 2014 को राज्य सरकार ने इन पदों को तीन वर्ष में चरणबद्ध तरीके से भरने का आश्वासन दिया था। हालांकि, 20 अक्तूबर 2014 को स्थायी नियुक्ति के बजाय तीन वर्ष की संविदा नियुक्ति और सरकारी मंजूरी की व्यवस्था लागू हुई। कई प्रशासनिक मंजूरियों के कारण भर्ती प्रक्रिया लंबी हो गई, जो 8 अगस्त 2022 के मेमो से बंद कर दी गई। याचिका में कहा गया है कि सरकारी आदेश वैधानिक कानूनों का उल्लंघन नहीं कर सकते। इसलिए भर्ती प्रक्रिया अधिनियम, 1974 के अनुरूप होनी चाहिए और राज्य सरकार को समयबद्ध नीति बनाने का निर्देश दिया जाए।
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याचिका में राज्य सरकार के 8 अगस्त 2022 के मेमो को चुनौती दी गई है। इस मेमो ने 10 अक्तूबर 2014 के हाईकोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया रोक दी थी। याचिकाकर्ता ने सभी स्वीकृत रिक्त पदों को भरने की मांग की है। उसने 95 फीसदी अनुदान सहायता जारी रखने और व्यापक भर्ती नीति बनाने का भी आग्रह किया है। वर्ष 2005 में नई भर्ती पर रोक के बाद 1,925 शिक्षण और 964 गैर-शिक्षण पद खाली हुए थे। वर्तमान में 3,566 स्वीकृत पदों में से करीब 2,800 से 3,000 पद खाली हैं। इससे शिक्षण व्यवस्था, शोध और कॉलेजों की मान्यता पर असर पड़ रहा है।
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भर्ती प्रक्रिया में खामियां :
10 अक्तूबर 2014 को राज्य सरकार ने इन पदों को तीन वर्ष में चरणबद्ध तरीके से भरने का आश्वासन दिया था। हालांकि, 20 अक्तूबर 2014 को स्थायी नियुक्ति के बजाय तीन वर्ष की संविदा नियुक्ति और सरकारी मंजूरी की व्यवस्था लागू हुई। कई प्रशासनिक मंजूरियों के कारण भर्ती प्रक्रिया लंबी हो गई, जो 8 अगस्त 2022 के मेमो से बंद कर दी गई। याचिका में कहा गया है कि सरकारी आदेश वैधानिक कानूनों का उल्लंघन नहीं कर सकते। इसलिए भर्ती प्रक्रिया अधिनियम, 1974 के अनुरूप होनी चाहिए और राज्य सरकार को समयबद्ध नीति बनाने का निर्देश दिया जाए।
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