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घोषणा को बीते तीन माह, एसडीएम और सीटीएम के को नहीं मिली रजिस्ट्री की पॉवर
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चंडीगढ़। हरियाणा में एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट को 3 माह बाद भी रजिस्ट्री की शक्तियां नहीं मिली है। अधिसूचना जारी नहीं होने से अब भी केवल तहसीलों में ही रजिस्ट्री की जा रही हैं। भीड़ अधिक होने के कारण तहसीलों में लोगों की लाइनें लग रही हैं और कई कई दिन के बाद रजिस्ट्री मिल रही हैं।
याद हो कि प्रदेश सरकार ने 1 नवंबर को हरियाणा दिवस पर घोषणा की थी कि अब तहसीलदार और नायब तहसीलदार की तरह एसडीएम और सीटीएम भी अपने कार्यालयों में संपत्तियों की रजिस्ट्री कर सकेंगे। उस समय दावा किया गया था कि सरकार हर जिले में संपत्ति इत्यादि के हस्तांतरण दस्तावेजों के पंजीकरण की शक्तियां इन्हें जल्द सौंप देगी। इसके तहत राज्य के सभी एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट को उप-पंजीयक और संयुक्त उप-पंजीयक के रूप में नामित किया जाना था, जबकि तहसीलदार और नायब-तहसीलदार संयुक्त उप-पंजीयक के रूप में पहले ही तरह कार्य करते रहेंगे।
तहसीलों में अब भी लग रही लाइनें
आम जनता, विशेषकर किसानों और ग्रामीणों को काफी सहूलियत देने के लिए यह सुविधा शुरू की जानी है। इस समय एक एक तहसीलदार पर दो-दो तहसीलों का कार्यभार है। ऐसे में लोगों को रजिस्ट्री के लिए तहसीलों में लोगों की लाइनें लग रही हैं और उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होने के कारण तहसीलों में तहसीलदार समय नहीं दे पाते हैं। सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम के पास पंजीकरण की शक्तियां होने के कारण जनता की असुविधा बढ़ रही है।
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कार्यालय और कर्मचारियों को प्रशिक्षण की तैयारी
दरअसल इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके अलावा, एसडीएम और सीटीएम के कार्यालयों में लगे कंप्यूटर में तहसीलों में जिस सॉफ्टवेयर से रजिस्ट्री की जाती है, वो भी होना अतिआवशयक है। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में मंथन चल रहा है।
एसडीएम और सीटीएम को रजिस्ट्री की शक्ति देने को लेकर कुछ तकनीकी चीजों पर काम चल रहा है। अधिसूचना जारी होने के बाद ऐसा संभव हो सकेगा। जहां तक तहसीलों की बात है तो सभी तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को तहसीलों में समय देने के लिए निर्देश दे रखे हैं। -पीके दास, एसीएस, राजस्व विभाग।
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याद हो कि प्रदेश सरकार ने 1 नवंबर को हरियाणा दिवस पर घोषणा की थी कि अब तहसीलदार और नायब तहसीलदार की तरह एसडीएम और सीटीएम भी अपने कार्यालयों में संपत्तियों की रजिस्ट्री कर सकेंगे। उस समय दावा किया गया था कि सरकार हर जिले में संपत्ति इत्यादि के हस्तांतरण दस्तावेजों के पंजीकरण की शक्तियां इन्हें जल्द सौंप देगी। इसके तहत राज्य के सभी एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट को उप-पंजीयक और संयुक्त उप-पंजीयक के रूप में नामित किया जाना था, जबकि तहसीलदार और नायब-तहसीलदार संयुक्त उप-पंजीयक के रूप में पहले ही तरह कार्य करते रहेंगे।
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तहसीलों में अब भी लग रही लाइनें
आम जनता, विशेषकर किसानों और ग्रामीणों को काफी सहूलियत देने के लिए यह सुविधा शुरू की जानी है। इस समय एक एक तहसीलदार पर दो-दो तहसीलों का कार्यभार है। ऐसे में लोगों को रजिस्ट्री के लिए तहसीलों में लोगों की लाइनें लग रही हैं और उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होने के कारण तहसीलों में तहसीलदार समय नहीं दे पाते हैं। सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम के पास पंजीकरण की शक्तियां होने के कारण जनता की असुविधा बढ़ रही है।
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कार्यालय और कर्मचारियों को प्रशिक्षण की तैयारी
दरअसल इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके अलावा, एसडीएम और सीटीएम के कार्यालयों में लगे कंप्यूटर में तहसीलों में जिस सॉफ्टवेयर से रजिस्ट्री की जाती है, वो भी होना अतिआवशयक है। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में मंथन चल रहा है।
एसडीएम और सीटीएम को रजिस्ट्री की शक्ति देने को लेकर कुछ तकनीकी चीजों पर काम चल रहा है। अधिसूचना जारी होने के बाद ऐसा संभव हो सकेगा। जहां तक तहसीलों की बात है तो सभी तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को तहसीलों में समय देने के लिए निर्देश दे रखे हैं। -पीके दास, एसीएस, राजस्व विभाग।