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मनीमाजरा की सालों पुरानी तारों की देख भाल करने वाले 10 कर्मचारी
Updated Tue, 17 Jul 2018 01:44 AM IST
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23 कर्मचारियों के सहारे सवा दो लाख लोग, रात को बिजली खराब होने पर सुबह ही लौटती है रोशनी
- मनीमाजरा में 30 हजार कनेक्शन और 102 बिजली के ट्रांसफार्मर का जिम्मा भी संभालते हैं
- 40 साल पहले डाली तारों का जाल, गलियों और दुकानों के बाहर संभलकर निकलते हैं लोग
गोविंद परवाना
मनीमाजरा। सवा दो लाख की आबादी में 30 हजार बिजली के कनेक्शन और बिजली सप्लाई करने वाले102 ट्रांसफार्मरों की देखरेख सिर्फ 30 कर्मचारियों-अधिकारियों के सहारे है। इनमें भी 7 अधिकारी (एक एसडीओ और 6 जेई) हैं। कुल मिलाकर रात-दिन में मनीमाजरा की बिजली व्यवस्था सिर्फ दो दर्जन कर्मचारियों पर निर्भर है। वह भी उन बिजली तारों पर जिनको डाले 40 साल हो चुके हैं और वे अपनी मियांद पूरी कर चकुे हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी बीच-बीच में कुछ नई तारों को छोटे-छोटे हिस्सों में डाल कर चला रहे है। मनीमाजरा में डाली पुरानी तारों के जाल इलाके की हर गली, बाजार और सड़कों पर देखने को मिल जाते हैं। इन तारों में होने वाली स्पार्किंग से गर्मी में हर रोज समस्या का सामना करना पड़ता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां के बिजली विभाग के साथ इंदिरा कॉलोनी, पिपली, माड़ीवाला टाउन, किशनगढ़ उसके अलावा बार दो-तीन किलोमीटर दूरी पर बसे मौलीजागरां, विकास नगर और मौली व रायपुरकलां गांव को भी जोड़ा गया है। इन इलाकों में बिजली व्यवस्था को मनीमाजरा ऑफिस में तैनात कर्मचारी ही ठीक करते हैं, जबकि इस पूरे एरिया में तीन वार्ड और तीन पुलिस स्टेशन आते हैं। हैरानी की बात है कि इतने बड़े इलाके में सिर्फ 23 बिजली कर्मचारी ही तैनात हैं। इन कर्मचारियों में भी 8 लाइनमैन है और 15 उनके असिस्टेंट एलएएम हैं।
रात में इन बिजली कर्मचारियों को बिजली व्यवस्था ठप हो जाने पर दूसरी जगह की खराब हुई तारों को ठीक करने में दो से तीन घंटे कम से कम लग जाते हैं क्योंकि रात को इस पूरे एरिया मेें तीन लोगों की टीम पूरे एरिया की व्यवस्था को देखकर ठीक करती है। ऐसे में एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने में भी उनको काफी समय लग जाता है, क्योंकि एरिया बहुत बड़ा है।
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क्या कहते हैं लोग
मनीमाजरा चंडीगढ़ का सबसे अहम हिस्सा है। कहने के लिए मनीमाजरा राजाओं-महाराजाओं का शहर है, लेकिन बिजली व्यवस्था के पूरी तरह चौपट है। विभाग को अब पुरानी गलियों-बाजारों में लटक रही तारों को ऊपर से हटाकर अंडर ग्राउंड डाल देना चाहिए। तब जाकर बिजली की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
-अवतार सिंह ढिल्लों, महासचिव जट सभा मनीमाजरा
सांसद किरण खेर ने चुनाव के दिनों में लोगों से बिजली की तारों को अंडर ग्राउंड डालने का आश्वासन दिया था, लेकिन अंडर ग्राउंड तो दूर, सांसद 30-40 साल पुरानी तारों को नया नहीं डलवा सकीं। घर-घर एसी होने से पुरानी तारों की पावर खत्म हो जाने से हल्की सी आंधी और बरसात में खराबी आ जाती है, जिनको ठीक करने में विभाग के कर्मचारी पूरी-पूरी रात और दिन लगा देते हैं।
-मनजीत सिंह बावा लंबरदार, महासचिव ब्लॉक कांग्रेसी कमेटी मनीमाजरा
सबसे ज्यादा मनीमाजरा के लोगों को रात को परेशानी झेलनी पड़ती है। जब बिजली की तार जल जाती है। उसकी जगह नई तार डालनी होती है। रात को वह ऑफिस में मिलती नहीं है। सुबह ऑफिस खुलने पर नई तार मिलने के बाद उसे डाल कर सप्लाई सुचारू की जाती है। लोगाें को सारी रात बिना बिजली के रहना पड़ता है। रात में बिजली ठीक करने वाले भी दो या तीन कर्मचारी ही होते हैं।
-श्याम सिंह, समाजसेवी
मनीमाजरा में अंग्रेजों के समय बनी मोरीगेट मार्केट के साथ अब बहुत बड़ा बाजार है। इन बाजारों में जब बिजली गुल होती है तो उनको ठीक करने में विभाग चार से 6 घंटे लगा देता है। क्योंकि मनीमाजरा बिजली विभाग के पास न तो पूरे कर्मचारी हैं और न ही बाजरों में गुच्छे बनकर लटक रही पुरानी तारों को बदलने के लिए नई तार है। ऐसे में बाजारों की बिजली गुल हो जाने के बाद व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। घंटों बिजली गुल रहने से दुकानदारी पूरी तरह ठप हो जाती है।
-प्रदीप बागरा, कपड़ा व्यापारी व संयुक्त व्यापार मंडल के वार्ड प्रधान
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मनीमाजरा की बिजली की तारों को अंडर ग्राउंड किया जाएगा। मैं बिजली वायर अंडर ग्राउंड करवाने के लिए सांसद किरण खेर से मिलूंगा। इस समय पूरे मनीमाजरा में पीने की पाइपलाइन डालने के लिए गलियों, सड़कों की खुदाई की गई है। इस समय बिजली की तारें अंडर ग्राउंड डाली जाएं तो एक बार में ही गलियों-सड़कों को पक्का करवाया जा सकता है।
-जगतार सिंह जग्गा, पार्षद मनीमाजरा वार्ड नंबर 25
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- मनीमाजरा में 30 हजार कनेक्शन और 102 बिजली के ट्रांसफार्मर का जिम्मा भी संभालते हैं
- 40 साल पहले डाली तारों का जाल, गलियों और दुकानों के बाहर संभलकर निकलते हैं लोग
गोविंद परवाना
मनीमाजरा। सवा दो लाख की आबादी में 30 हजार बिजली के कनेक्शन और बिजली सप्लाई करने वाले102 ट्रांसफार्मरों की देखरेख सिर्फ 30 कर्मचारियों-अधिकारियों के सहारे है। इनमें भी 7 अधिकारी (एक एसडीओ और 6 जेई) हैं। कुल मिलाकर रात-दिन में मनीमाजरा की बिजली व्यवस्था सिर्फ दो दर्जन कर्मचारियों पर निर्भर है। वह भी उन बिजली तारों पर जिनको डाले 40 साल हो चुके हैं और वे अपनी मियांद पूरी कर चकुे हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी बीच-बीच में कुछ नई तारों को छोटे-छोटे हिस्सों में डाल कर चला रहे है। मनीमाजरा में डाली पुरानी तारों के जाल इलाके की हर गली, बाजार और सड़कों पर देखने को मिल जाते हैं। इन तारों में होने वाली स्पार्किंग से गर्मी में हर रोज समस्या का सामना करना पड़ता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां के बिजली विभाग के साथ इंदिरा कॉलोनी, पिपली, माड़ीवाला टाउन, किशनगढ़ उसके अलावा बार दो-तीन किलोमीटर दूरी पर बसे मौलीजागरां, विकास नगर और मौली व रायपुरकलां गांव को भी जोड़ा गया है। इन इलाकों में बिजली व्यवस्था को मनीमाजरा ऑफिस में तैनात कर्मचारी ही ठीक करते हैं, जबकि इस पूरे एरिया में तीन वार्ड और तीन पुलिस स्टेशन आते हैं। हैरानी की बात है कि इतने बड़े इलाके में सिर्फ 23 बिजली कर्मचारी ही तैनात हैं। इन कर्मचारियों में भी 8 लाइनमैन है और 15 उनके असिस्टेंट एलएएम हैं।
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रात में इन बिजली कर्मचारियों को बिजली व्यवस्था ठप हो जाने पर दूसरी जगह की खराब हुई तारों को ठीक करने में दो से तीन घंटे कम से कम लग जाते हैं क्योंकि रात को इस पूरे एरिया मेें तीन लोगों की टीम पूरे एरिया की व्यवस्था को देखकर ठीक करती है। ऐसे में एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने में भी उनको काफी समय लग जाता है, क्योंकि एरिया बहुत बड़ा है।
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क्या कहते हैं लोग
मनीमाजरा चंडीगढ़ का सबसे अहम हिस्सा है। कहने के लिए मनीमाजरा राजाओं-महाराजाओं का शहर है, लेकिन बिजली व्यवस्था के पूरी तरह चौपट है। विभाग को अब पुरानी गलियों-बाजारों में लटक रही तारों को ऊपर से हटाकर अंडर ग्राउंड डाल देना चाहिए। तब जाकर बिजली की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
-अवतार सिंह ढिल्लों, महासचिव जट सभा मनीमाजरा
सांसद किरण खेर ने चुनाव के दिनों में लोगों से बिजली की तारों को अंडर ग्राउंड डालने का आश्वासन दिया था, लेकिन अंडर ग्राउंड तो दूर, सांसद 30-40 साल पुरानी तारों को नया नहीं डलवा सकीं। घर-घर एसी होने से पुरानी तारों की पावर खत्म हो जाने से हल्की सी आंधी और बरसात में खराबी आ जाती है, जिनको ठीक करने में विभाग के कर्मचारी पूरी-पूरी रात और दिन लगा देते हैं।
-मनजीत सिंह बावा लंबरदार, महासचिव ब्लॉक कांग्रेसी कमेटी मनीमाजरा
सबसे ज्यादा मनीमाजरा के लोगों को रात को परेशानी झेलनी पड़ती है। जब बिजली की तार जल जाती है। उसकी जगह नई तार डालनी होती है। रात को वह ऑफिस में मिलती नहीं है। सुबह ऑफिस खुलने पर नई तार मिलने के बाद उसे डाल कर सप्लाई सुचारू की जाती है। लोगाें को सारी रात बिना बिजली के रहना पड़ता है। रात में बिजली ठीक करने वाले भी दो या तीन कर्मचारी ही होते हैं।
-श्याम सिंह, समाजसेवी
मनीमाजरा में अंग्रेजों के समय बनी मोरीगेट मार्केट के साथ अब बहुत बड़ा बाजार है। इन बाजारों में जब बिजली गुल होती है तो उनको ठीक करने में विभाग चार से 6 घंटे लगा देता है। क्योंकि मनीमाजरा बिजली विभाग के पास न तो पूरे कर्मचारी हैं और न ही बाजरों में गुच्छे बनकर लटक रही पुरानी तारों को बदलने के लिए नई तार है। ऐसे में बाजारों की बिजली गुल हो जाने के बाद व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। घंटों बिजली गुल रहने से दुकानदारी पूरी तरह ठप हो जाती है।
-प्रदीप बागरा, कपड़ा व्यापारी व संयुक्त व्यापार मंडल के वार्ड प्रधान
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मनीमाजरा की बिजली की तारों को अंडर ग्राउंड किया जाएगा। मैं बिजली वायर अंडर ग्राउंड करवाने के लिए सांसद किरण खेर से मिलूंगा। इस समय पूरे मनीमाजरा में पीने की पाइपलाइन डालने के लिए गलियों, सड़कों की खुदाई की गई है। इस समय बिजली की तारें अंडर ग्राउंड डाली जाएं तो एक बार में ही गलियों-सड़कों को पक्का करवाया जा सकता है।
-जगतार सिंह जग्गा, पार्षद मनीमाजरा वार्ड नंबर 25