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यूटी शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी
Updated Thu, 05 Apr 2018 01:56 AM IST
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स्कूलों में न पर्याप्त शिक्षक और न ही स्मार्ट एजूकेशन
शहर के 60 से अधिक सरकारी स्कूलों में नहीं हैं हेड मास्टर और शिक्षक
प्रमोशन की वरिष्ठता सूची में शिक्षा विभाग ने बरती लापरवाही
11 अप्रैल से शुरू हो रहा है नया सत्र
रूबी सिंह
चंडीगढ़।
सरकारी स्कूलों में न पर्याप्त गुरु हैं और न स्मार्ट एजूकेशन। शिक्षा विभाग की लापरवाही की बात करें तो शिक्षकों के प्रमोशन की वरिष्ठता सूची में इतनी तकनीकी खामियां हैं कि वे अपने ऑब्जक्शन पत्र समय पर नहीं दे पा रहे। स्कूलों में 11 अप्रैल से 2018-19 का सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन स्मार्ट एजूकेशन सिस्टम राम भरोसे है।
115 सरकारी स्कूलों में से 60 के करीब प्रिंसिपल एवं हेड मास्टर्स के पद खाली हैं। यही वजह रही कि पिछले साल स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था अस्त-व्यस्त रही। शहर के सभी 115 सरकारी स्कूलों में पहली से नौवीं कक्षा का परिणाम 31 मार्च को जारी किया जा चुका है। इनमें नर्सरी स्कूल एक, प्राइमरी स्कूल 8, मिडल स्कूल 13, हाई स्कूल 53, सीनियर सेकेंडरी स्कूल 40 हैं। इसमें पहली से 9वीं कक्षा तक की खाली सीटों पर एडमिशन प्रक्रिया शुरू है।
शिक्षकों की कमी से शिक्षा बदहाल
सरकारी स्कूलों में वर्तमान समय में शिक्षकों के साथ-साथ हेड मास्टर्स की कमी है। इसे पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग के खिलाफ यूटी एजूकेशनल इंप्लाइज यूनियन विरोध करती रहती है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में करीब 20 पद प्रिंसिपल के खाली हैं, जबकि 40 हेड मास्टर व हेड मिस्ट्रेस के पद खाली हैं।
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नियमों की हो रही अनदेखी : कंबोज
यूटी कैडर एजूकेशनल इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंबोज ने कहा कि शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपल बनने के लिए लेक्चररों की वरिष्ठता सूची में नियमों की अनदेखी की गई है। 2006 से सूची में बदलाव किया जा रहा है। वर्तमान जारी 42 लेक्चररों की सूची में पहले चार लेक्चररों के इंटरव्यू के नंबर लिखे ही नहीं गए हैं या शिक्षा विभाग के पास उनके नंबर नहीं हैं। लेक्चरर भाग सिंह ने बताया कि यह सूची चार बार बदली गई, जिसमें सबसे पहले 2006, 2009, 2015-16 में बदली गई। इसमें कई सीनियर लेक्चररों का नाम आगे-पीछे कर दिए गए थे।
कोट
इस साल स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा। नए सत्र में शिक्षकों और हेड मास्टर्स के खाली पद नहीं रहेंगे।
-अनुजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा विभाग
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शहर के 60 से अधिक सरकारी स्कूलों में नहीं हैं हेड मास्टर और शिक्षक
प्रमोशन की वरिष्ठता सूची में शिक्षा विभाग ने बरती लापरवाही
11 अप्रैल से शुरू हो रहा है नया सत्र
रूबी सिंह
चंडीगढ़।
सरकारी स्कूलों में न पर्याप्त गुरु हैं और न स्मार्ट एजूकेशन। शिक्षा विभाग की लापरवाही की बात करें तो शिक्षकों के प्रमोशन की वरिष्ठता सूची में इतनी तकनीकी खामियां हैं कि वे अपने ऑब्जक्शन पत्र समय पर नहीं दे पा रहे। स्कूलों में 11 अप्रैल से 2018-19 का सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन स्मार्ट एजूकेशन सिस्टम राम भरोसे है।
115 सरकारी स्कूलों में से 60 के करीब प्रिंसिपल एवं हेड मास्टर्स के पद खाली हैं। यही वजह रही कि पिछले साल स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था अस्त-व्यस्त रही। शहर के सभी 115 सरकारी स्कूलों में पहली से नौवीं कक्षा का परिणाम 31 मार्च को जारी किया जा चुका है। इनमें नर्सरी स्कूल एक, प्राइमरी स्कूल 8, मिडल स्कूल 13, हाई स्कूल 53, सीनियर सेकेंडरी स्कूल 40 हैं। इसमें पहली से 9वीं कक्षा तक की खाली सीटों पर एडमिशन प्रक्रिया शुरू है।
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शिक्षकों की कमी से शिक्षा बदहाल
सरकारी स्कूलों में वर्तमान समय में शिक्षकों के साथ-साथ हेड मास्टर्स की कमी है। इसे पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग के खिलाफ यूटी एजूकेशनल इंप्लाइज यूनियन विरोध करती रहती है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में करीब 20 पद प्रिंसिपल के खाली हैं, जबकि 40 हेड मास्टर व हेड मिस्ट्रेस के पद खाली हैं।
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नियमों की हो रही अनदेखी : कंबोज
यूटी कैडर एजूकेशनल इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंबोज ने कहा कि शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपल बनने के लिए लेक्चररों की वरिष्ठता सूची में नियमों की अनदेखी की गई है। 2006 से सूची में बदलाव किया जा रहा है। वर्तमान जारी 42 लेक्चररों की सूची में पहले चार लेक्चररों के इंटरव्यू के नंबर लिखे ही नहीं गए हैं या शिक्षा विभाग के पास उनके नंबर नहीं हैं। लेक्चरर भाग सिंह ने बताया कि यह सूची चार बार बदली गई, जिसमें सबसे पहले 2006, 2009, 2015-16 में बदली गई। इसमें कई सीनियर लेक्चररों का नाम आगे-पीछे कर दिए गए थे।
कोट
इस साल स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा। नए सत्र में शिक्षकों और हेड मास्टर्स के खाली पद नहीं रहेंगे।
-अनुजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा विभाग