{"_id":"5b3a8c444f1c1b175c8b465b","slug":"201530563652-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमानत मिली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमानत मिली
Updated Tue, 03 Jul 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
60 दिनों में नहीं कराए एक भी गवाह के बयान, आरोपी पूर्व बैंक मैनेजर को मिली जमानत
- आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व मैनेजर की ओर से 13 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला
- सीआरपीसी की धारा 437 (6) के तहत अदालत ने मंजूर की जमानत याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अभियोजन पक्ष की ओर से धोखाधड़ी के मामले में 60 दिनों में मुख्य गवाह समेत एक भी सरकारी गवाह के बयान दर्ज न कराने के आधार पर एडीजे एके मेहता ने आरोपी आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व वेल्थ मैनेजर अरुण सलूजा की जमानत याचिका मंजूर कर दी। अदालत ने उसे 30 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत के आदेश दिए हैं। सलूजा के खिलाफ मनीमाजरा थाने में पिछले साल धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत संबंधित केस दर्ज किया गया था।
इससे पहले बचाव पक्ष की ओर से जमानत याचिका के लिए दलील दी गई थी कि पुलिस ने अरुण सलूजा को 12 दिसंबर 2017 को गिरफ्तार किया था। 20 जनवरी को पुलिस ने मामले में चालान भी दायर कर दिया था। 22 मार्च को अदालत में उसके खिलाफ आरोप तय कर 5 अप्रैल से ट्रायल शुरू करने के आदेश दिए थे। लेकिन, पांच अप्रैल से लेकर अब तक 60 दिन के अंदर अभियोजन पक्ष ने एक भी गवाह के बयान दर्ज नहीं करवाए। इस आधार पर अरुण सलूजा सीआरपीसी की धारा 437 (6) के तहत जमानत का हकदार है।
याचिका पर अभियोजन पक्ष के जवाब और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद एडीजे कोर्ट ने आरोपी को सीआरपीसी की धारा 437 (6) के तहत जमानत का लाभ देते हुए उसकी याचिका मंजूर कर दी। बता दें कि इससे पहले आरोपी की दो बार जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
विज्ञापन
बाक्स
यह है मामला
कृष्णा लता शर्मा की शिकायत पर दर्ज मामले के अनुसार उन्होंने अरुण के जरिए बैंक में 19 मई 2017 को 13 लाख रुपये जमा करवाए थे। इसके बाद अरुण ने उनके पैसे इनवेस्ट करने की बात कहते हुए उनसे दो चेक मांगे थे। आरोप के अनुसार अरुण ने पहले पत्नी के नाम पर उनके खाते से 6.50 लाख रुपये निकलवाए। इसके बाद उसने 22 मई को पत्नी के बिजनेस एसोसिएट के नाम पर उनके खाते से फिर 6.50 लाख रुपये निकलवाए। उसने यह पैसे बिना कृष्णा को जानकारी दिए बिना उनके खाते से निकलवा लिए। 15 दिनों बाद जब कृष्णा ने पासबुक में एंट्री करवाई तो पता चला कि उनके खाते से 13 लाख रुपये निकाले गए हैं। जब उन्होंने पैसाें को लेकर अरुण से संपर्क किया तो उसने बताया कि उसने ही उनके पैसे एक बेहतरीन फंड में इनवेस्ट किए हैं। कुछ समय बाद अरुण ने उनके खाते में 55 हजार रुपये जमा करवाए और उन्हें बताया कि उनके द्वारा इनवेस्ट किए गए रुपयों का ब्याज है। कृष्णा ने अरुण से कहा कि उसके पति दिल के मरीज हैं और उन्हें पैसों की जरूरत रहती है। उन्हें ब्याज नहीं बल्कि अपने 13 लाख रुपये चाहिए। इसके बाद जब उन्हाेंने पैसों के बारे में मनीमाजरा स्थित निजी बैंक की शाखा से जानकरी मांगी तो उन्हें पता चला कि बैंक ने अरुण के खिलाफ शिकायत दी है और वह इस तरह से ही कई लोगों से पैसों की धोखाधड़ी कर फरार हो चुका है। उसके घर, पत्नी के बिजनेस सभी जगह ताले लगे हैं। इसके बाद उन्हें उनके साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला और उन्होंने पुलिस को इसकी शिकायत दी।
विज्ञापन
- आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व मैनेजर की ओर से 13 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला
- सीआरपीसी की धारा 437 (6) के तहत अदालत ने मंजूर की जमानत याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अभियोजन पक्ष की ओर से धोखाधड़ी के मामले में 60 दिनों में मुख्य गवाह समेत एक भी सरकारी गवाह के बयान दर्ज न कराने के आधार पर एडीजे एके मेहता ने आरोपी आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व वेल्थ मैनेजर अरुण सलूजा की जमानत याचिका मंजूर कर दी। अदालत ने उसे 30 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत के आदेश दिए हैं। सलूजा के खिलाफ मनीमाजरा थाने में पिछले साल धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत संबंधित केस दर्ज किया गया था।
इससे पहले बचाव पक्ष की ओर से जमानत याचिका के लिए दलील दी गई थी कि पुलिस ने अरुण सलूजा को 12 दिसंबर 2017 को गिरफ्तार किया था। 20 जनवरी को पुलिस ने मामले में चालान भी दायर कर दिया था। 22 मार्च को अदालत में उसके खिलाफ आरोप तय कर 5 अप्रैल से ट्रायल शुरू करने के आदेश दिए थे। लेकिन, पांच अप्रैल से लेकर अब तक 60 दिन के अंदर अभियोजन पक्ष ने एक भी गवाह के बयान दर्ज नहीं करवाए। इस आधार पर अरुण सलूजा सीआरपीसी की धारा 437 (6) के तहत जमानत का हकदार है।
विज्ञापन
याचिका पर अभियोजन पक्ष के जवाब और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद एडीजे कोर्ट ने आरोपी को सीआरपीसी की धारा 437 (6) के तहत जमानत का लाभ देते हुए उसकी याचिका मंजूर कर दी। बता दें कि इससे पहले आरोपी की दो बार जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
विज्ञापन
बाक्स
यह है मामला
कृष्णा लता शर्मा की शिकायत पर दर्ज मामले के अनुसार उन्होंने अरुण के जरिए बैंक में 19 मई 2017 को 13 लाख रुपये जमा करवाए थे। इसके बाद अरुण ने उनके पैसे इनवेस्ट करने की बात कहते हुए उनसे दो चेक मांगे थे। आरोप के अनुसार अरुण ने पहले पत्नी के नाम पर उनके खाते से 6.50 लाख रुपये निकलवाए। इसके बाद उसने 22 मई को पत्नी के बिजनेस एसोसिएट के नाम पर उनके खाते से फिर 6.50 लाख रुपये निकलवाए। उसने यह पैसे बिना कृष्णा को जानकारी दिए बिना उनके खाते से निकलवा लिए। 15 दिनों बाद जब कृष्णा ने पासबुक में एंट्री करवाई तो पता चला कि उनके खाते से 13 लाख रुपये निकाले गए हैं। जब उन्होंने पैसाें को लेकर अरुण से संपर्क किया तो उसने बताया कि उसने ही उनके पैसे एक बेहतरीन फंड में इनवेस्ट किए हैं। कुछ समय बाद अरुण ने उनके खाते में 55 हजार रुपये जमा करवाए और उन्हें बताया कि उनके द्वारा इनवेस्ट किए गए रुपयों का ब्याज है। कृष्णा ने अरुण से कहा कि उसके पति दिल के मरीज हैं और उन्हें पैसों की जरूरत रहती है। उन्हें ब्याज नहीं बल्कि अपने 13 लाख रुपये चाहिए। इसके बाद जब उन्हाेंने पैसों के बारे में मनीमाजरा स्थित निजी बैंक की शाखा से जानकरी मांगी तो उन्हें पता चला कि बैंक ने अरुण के खिलाफ शिकायत दी है और वह इस तरह से ही कई लोगों से पैसों की धोखाधड़ी कर फरार हो चुका है। उसके घर, पत्नी के बिजनेस सभी जगह ताले लगे हैं। इसके बाद उन्हें उनके साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला और उन्होंने पुलिस को इसकी शिकायत दी।