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रमजान का तीसरा जुम्मा, बड़ी संख्या में लोगों ने पढ़ी नमाज
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:32 PM IST
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रमजान की हर घड़ी पवित्र: मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी
रमजान का तीसरा जुमा, मसजिदों नमाजियों की भीड़
-सेक्टर-20, 26, 29, मनीमाजरा सहित अन्य भागों में मसजिदों में नमाज अदा की गई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
रमजान के तीसरे जुमा पर मसजिदों में नमाजियों की भीड़ रही। बड़ी संख्या में लोग दोपहर की नमाज में मसजिद में पहुंचे। नमाज के बाद लोगों ने खरीदारी भी की। सेक्टर-20 स्थित जामा मसजिद के बाहर ग्राउंड में बड़ी संख्या में दुकानें सजाई गई। हर प्रकार के घरेलू सामान खाने पीने से लेकर कपड़े व अन्य सामानों की लोगों ने खरीदारी की। सेक्टर-29, 26, 29, मनीमाजरा, रामदरबार सहित सभी मसजिदों में नमाज पढ़ी गई।
रमजान की हर घड़ी पवित्र...
सेक्टर-26 के नुरानी मसजिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी का कहना है कि रमजान की हर घड़ी पवित्र और नेकियों से भरी हुई है। लेकिन जब रमजान में जब जुमा का दिन आता है तो पवित्रता और बढ़ जाती है। ऐसा लगता है जैसे नूर और रहमत का संगम हो गया हो।
मोहम्मद अनस कासमी कहते हैं कि रमजान और जुमे की इसी महत्ता की वजह से सुबह सवेरे से ही छोटे और बड़े सब लोग जुमा की नमाज की तैयारियों में लग जाते हैं। देर तक नमाज ए जुमा पढ़ते हैं। देश में शांति, इनसानियत की भलाई और भाईचारे के लिए दुआएं की जाती है।
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खुशी पवित्रता और रूहानियत की वजह से पूरा समां ईद जैसा हो जाता है। क्योंकि जुमा का दिन भी हफ्तेवारी ईद का दिन है। जिसमें अल्लाह तआला खुश होकर बंदों को उनकेनेक अमल का सत्तर गुणा बदला देते हैं।
रमजान का पहला अशरा(पहला 10 दिन) रहमत कहलाता है। दसरा अशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी के दिन हैं।
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रमजान का तीसरा जुमा, मसजिदों नमाजियों की भीड़
-सेक्टर-20, 26, 29, मनीमाजरा सहित अन्य भागों में मसजिदों में नमाज अदा की गई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
रमजान के तीसरे जुमा पर मसजिदों में नमाजियों की भीड़ रही। बड़ी संख्या में लोग दोपहर की नमाज में मसजिद में पहुंचे। नमाज के बाद लोगों ने खरीदारी भी की। सेक्टर-20 स्थित जामा मसजिद के बाहर ग्राउंड में बड़ी संख्या में दुकानें सजाई गई। हर प्रकार के घरेलू सामान खाने पीने से लेकर कपड़े व अन्य सामानों की लोगों ने खरीदारी की। सेक्टर-29, 26, 29, मनीमाजरा, रामदरबार सहित सभी मसजिदों में नमाज पढ़ी गई।
रमजान की हर घड़ी पवित्र...
सेक्टर-26 के नुरानी मसजिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी का कहना है कि रमजान की हर घड़ी पवित्र और नेकियों से भरी हुई है। लेकिन जब रमजान में जब जुमा का दिन आता है तो पवित्रता और बढ़ जाती है। ऐसा लगता है जैसे नूर और रहमत का संगम हो गया हो।
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मोहम्मद अनस कासमी कहते हैं कि रमजान और जुमे की इसी महत्ता की वजह से सुबह सवेरे से ही छोटे और बड़े सब लोग जुमा की नमाज की तैयारियों में लग जाते हैं। देर तक नमाज ए जुमा पढ़ते हैं। देश में शांति, इनसानियत की भलाई और भाईचारे के लिए दुआएं की जाती है।
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खुशी पवित्रता और रूहानियत की वजह से पूरा समां ईद जैसा हो जाता है। क्योंकि जुमा का दिन भी हफ्तेवारी ईद का दिन है। जिसमें अल्लाह तआला खुश होकर बंदों को उनकेनेक अमल का सत्तर गुणा बदला देते हैं।
रमजान का पहला अशरा(पहला 10 दिन) रहमत कहलाता है। दसरा अशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी के दिन हैं।