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Panchkula News: 2000 पेड़ काटे, एनजीटी ने मांगा जवाब
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पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट 1900 की धारा 4 के तहत संरक्षित वन क्षेत्र घोषित, नहीं काट सकते पेड़
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। जिले के मोरनी ब्लॉक की बालौटी पंचायत के भोज मटोर के अंतर्गत आने वाले मुआस गांव में सफेदे के पेड़ों की कटाई का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंच गया है। ट्रिब्यूनल प्रधान पीठ में सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिका में आरोप लगाया गया कि जिले के गांव मुआस में 10 मार्च 2025 से 21 मार्च 2025 के बीच 2000 पेड़ अवैध रूप से काटे गए थे। जबकि यह क्षेत्र पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट 1900 की धारा 4 के तहत संरक्षित वन क्षेत्र घोषित है। यहां पेड़ काटना सुप्रीम कोर्ट के 21 जुलाई 2022 के आदेश के अनुसार पूरी तरह प्रतिबंधित है। याचिकाकर्ता शीशपाल की ओर से अधिवक्ता हर्ष पंवार ने ट्रिब्यूनल को बताया कि इस अवैध कटाई की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी। एक रिपोर्ट के अनुसार मामले में डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। आरोप था कि इन्होंने बिना अनुमति पेड़ काटने की एनओसी जारी की थी। याचिका में बताया गया कि इस अवैध कटाई की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई थी लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण और वन नियमों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला माना है।
20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
ट्रिब्यूनल ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। जवाब शपथपत्र के रूप में अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले ई-फाइलिंग के जरिये दाखिल करना होगा। यदि कोई प्रतिवादी सीधे जवाब दाखिल करता है तो उसे वर्चुअली उपस्थित रहकर ट्रिब्यूनल का सहयोग करना होगा। याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह सभी प्रतिवादियों को नोटिस की प्रति भेजे और सेवा का शपथपत्र भी दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2025 को होगी। इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
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सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के मांग
शिकायत की एक प्रति मुख्यमंत्री, हरियाणा सरकार के वन मंत्री, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ), एंटी करप्शन ब्यूरो के एडीजी और अन्य अधिकारियों को भेजी है। शिकायतकर्ता ने उच्च स्तरीय जांच करने और सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। जिले के मोरनी ब्लॉक की बालौटी पंचायत के भोज मटोर के अंतर्गत आने वाले मुआस गांव में सफेदे के पेड़ों की कटाई का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंच गया है। ट्रिब्यूनल प्रधान पीठ में सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिका में आरोप लगाया गया कि जिले के गांव मुआस में 10 मार्च 2025 से 21 मार्च 2025 के बीच 2000 पेड़ अवैध रूप से काटे गए थे। जबकि यह क्षेत्र पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट 1900 की धारा 4 के तहत संरक्षित वन क्षेत्र घोषित है। यहां पेड़ काटना सुप्रीम कोर्ट के 21 जुलाई 2022 के आदेश के अनुसार पूरी तरह प्रतिबंधित है। याचिकाकर्ता शीशपाल की ओर से अधिवक्ता हर्ष पंवार ने ट्रिब्यूनल को बताया कि इस अवैध कटाई की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी। एक रिपोर्ट के अनुसार मामले में डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। आरोप था कि इन्होंने बिना अनुमति पेड़ काटने की एनओसी जारी की थी। याचिका में बताया गया कि इस अवैध कटाई की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई थी लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण और वन नियमों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला माना है।
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20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
ट्रिब्यूनल ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। जवाब शपथपत्र के रूप में अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले ई-फाइलिंग के जरिये दाखिल करना होगा। यदि कोई प्रतिवादी सीधे जवाब दाखिल करता है तो उसे वर्चुअली उपस्थित रहकर ट्रिब्यूनल का सहयोग करना होगा। याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह सभी प्रतिवादियों को नोटिस की प्रति भेजे और सेवा का शपथपत्र भी दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2025 को होगी। इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
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सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के मांग
शिकायत की एक प्रति मुख्यमंत्री, हरियाणा सरकार के वन मंत्री, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ), एंटी करप्शन ब्यूरो के एडीजी और अन्य अधिकारियों को भेजी है। शिकायतकर्ता ने उच्च स्तरीय जांच करने और सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।