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आर्य टोल इंफ्रा हैबचुअल ओफेंडर, नहीं दे सकते कोई राहत
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‘आर्य इंफ्रा को उल्लंघन की पड़ गई है आदत, नहीं मिल सकती राहत’
सबहेड
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर कंपनी को दिया झटका, कोर्ट ने दी मध्यस्थता की छूट
-निगम ने 18 फरवरी को निर्धारित राशि जमा न करवाने पर रद्द कर दिया था ठेका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शहर की 25 पार्किंगों और एक मल्टीलेवल पार्किंग का ठेका रद्द करने के खिलाफ आर्य टोल इंफ्रा लिमिटेड की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका खारिज करते हुए कहा कि कंपनी को ठेके के नियमों के उल्लंघन की आदत पड़ चुकी है, ऐसे में उन्हें किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि एक बार पहले भी पैसे देने में देरी के कारण ठेका रद्द हुआ था तब हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत दी थी। अब ऐसा प्रतीत होता है कि पैसा देने में देरी करना कंपनी की आदत में शुमार है। हाईकोर्ट ने मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) की छूट देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
याची ने एडवोकेट एसएस सालार के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उसे जून 2017 में शहर की 25 पेड पार्किंग व 1 मल्टी लेवल पार्किंग चलाने का ठेका दिया गया था। ठेका देते हुए शर्त थी कि वेंडरों को पहले हटाया जाएगा और बिजली का कनेक्शन दिया जाएगा। यह दोनों काम नहीं किए गए, जिसके चलते कंपनी को शुरू से ही नुकसान होता रहा। इस बीच कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ गई और इसके चलते पार्किंग की राशि में बढ़ोतरी की गई। हालांकि इसके बावजूद अवैध पार्किंग के कारण कंपनी को नुकसान होता रहा। बार-बार शिकायतों के बावजूद भी अवैध पार्किंग पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। इससे पहले जुलाई 2018 मे भी कंपनी का ठेका निगम ने रद्द कर दिया था। उस दौरान कंपनी ने भुगतान किया था, जिसके चलते ठेका दोबारा याची कंपनी को मिल गया। अब जब 19 दिसंबर 2018 से 18 मार्च 2019 तक के लिए 3.76 करोड़ की डिमांड की गई तो याची ने इसके लिए समय मांगा। बार-बार समय मांगने के बावजूद अंतिम मौका 14 फरवरी तक का दिया गया। कंपनी ने 50-50 लाख के दो चेक निगम को दिए। इनको 18 फरवरी के बाद लगाने को कहा गया लेकिन यह 15 को ही लगा दिए गए। ऐसे में फंड की कमी के कारण कैश नहीं हो पाए। निगम ने इस पर 18 फरवरी को ठेका रद्द करने का आदेश जारी कर दिया और 19 फरवरी को पार्किंग का कब्जा ले लिया। याची ने पार्किंग का कब्जा वापस दिलाने ओर ठेका वापस कंपनी को सौंपने के लिए निर्देश दिए जाने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने अपील को अब सिरे से खारिज करते हुए मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) के पास जाने की छूट दे दी।
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हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर कंपनी को दिया झटका, कोर्ट ने दी मध्यस्थता की छूट
-निगम ने 18 फरवरी को निर्धारित राशि जमा न करवाने पर रद्द कर दिया था ठेका
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चंडीगढ़। शहर की 25 पार्किंगों और एक मल्टीलेवल पार्किंग का ठेका रद्द करने के खिलाफ आर्य टोल इंफ्रा लिमिटेड की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका खारिज करते हुए कहा कि कंपनी को ठेके के नियमों के उल्लंघन की आदत पड़ चुकी है, ऐसे में उन्हें किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि एक बार पहले भी पैसे देने में देरी के कारण ठेका रद्द हुआ था तब हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत दी थी। अब ऐसा प्रतीत होता है कि पैसा देने में देरी करना कंपनी की आदत में शुमार है। हाईकोर्ट ने मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) की छूट देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
याची ने एडवोकेट एसएस सालार के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उसे जून 2017 में शहर की 25 पेड पार्किंग व 1 मल्टी लेवल पार्किंग चलाने का ठेका दिया गया था। ठेका देते हुए शर्त थी कि वेंडरों को पहले हटाया जाएगा और बिजली का कनेक्शन दिया जाएगा। यह दोनों काम नहीं किए गए, जिसके चलते कंपनी को शुरू से ही नुकसान होता रहा। इस बीच कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ गई और इसके चलते पार्किंग की राशि में बढ़ोतरी की गई। हालांकि इसके बावजूद अवैध पार्किंग के कारण कंपनी को नुकसान होता रहा। बार-बार शिकायतों के बावजूद भी अवैध पार्किंग पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। इससे पहले जुलाई 2018 मे भी कंपनी का ठेका निगम ने रद्द कर दिया था। उस दौरान कंपनी ने भुगतान किया था, जिसके चलते ठेका दोबारा याची कंपनी को मिल गया। अब जब 19 दिसंबर 2018 से 18 मार्च 2019 तक के लिए 3.76 करोड़ की डिमांड की गई तो याची ने इसके लिए समय मांगा। बार-बार समय मांगने के बावजूद अंतिम मौका 14 फरवरी तक का दिया गया। कंपनी ने 50-50 लाख के दो चेक निगम को दिए। इनको 18 फरवरी के बाद लगाने को कहा गया लेकिन यह 15 को ही लगा दिए गए। ऐसे में फंड की कमी के कारण कैश नहीं हो पाए। निगम ने इस पर 18 फरवरी को ठेका रद्द करने का आदेश जारी कर दिया और 19 फरवरी को पार्किंग का कब्जा ले लिया। याची ने पार्किंग का कब्जा वापस दिलाने ओर ठेका वापस कंपनी को सौंपने के लिए निर्देश दिए जाने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने अपील को अब सिरे से खारिज करते हुए मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) के पास जाने की छूट दे दी।
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