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विकास बराला की जमानत याचिका खारिज
Updated Tue, 12 Sep 2017 08:15 PM IST
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विकास बराला की जमानत याचिका फिर खारिज
- अदालत ने कहा, गंभीर प्रवृति का अपराध, ऐसे अपराधियों को नहीं दी जा सकती जमानत
- इससे पहले निचली अदालत भी खारिज कर चुकी है याचिका
- याचिका पर सुबह एक घंटा चली दोनों पक्षों की बहस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
‘स्कूली छात्राएं, युवतियां, महिलाएं आदि रोजाना स्कूल, कॉलेज, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट या ऑफिस जाती हैं। एक सभ्य और सुसंस्कृत समाज के लिए उनकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। भीड़ से भरी बसों, ट्रेन आदि में महिलाओं और लड़कियों के अनुभव बहुत भयावह और दर्दनाक होते हैं।’ इस मामले में भी पीड़िता के साथ भी कुछ ऐसा ही भयावह अनुभव हुआ है। महिलाओं की सुरक्षा को संरक्षित किया जाना चाहिए। इस केस में आरोपी ने रोड साइड रोमियो की तरह हरकतें की हैं। उसने दूसरे आरोपी के साथ मिलकर शराब के नशे में जघन्य अपराध किया है। इस आधार पर आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
यह फैसला जिला अदालत के एडीजे रजनीश कुमार शर्मा ने वर्णिंका कुंडू छेड़छाड़ प्रकरण के आरोपी विकास बराला की जमानत याचिका पर सुनाया। एडीजे कोर्ट ने विकास बराला को जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के आरोप गंभीर हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि उसे पुलिस ने गलत फंसाया है, लेकिन पीड़िता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में साफ है कि उसे गलत नहीं फंसाया गया है। वहीं रिकार्ड में भी ऐसा कुछ सामने नहीं आया है कि दोनों पक्षों में कोई पारिवारिक विवाद हो। इस आधार पर ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिस पर आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाए। इसलिए आरोपी की जमानत याचिका खारिज की जाती है।
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एक घंटा चली दोनों पक्षों में बहस
सुबह 10 बजे अदालत में याचिका पर बहस शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से बहस कर रहे डिस्ट्रिक्ट अटार्नी ने अदालत के समक्ष एफआईआर में दर्ज शिकायत और उस रात हुई पूरी घटना के बारे में बताया। वहीं वर्णिका कुंडू की ओर से पेश हुए एडवोकेट पंकज ने कहा कि बचाव पक्ष का कहना है कि केस दो एडवोकेट के बयान के आधार पर बनाया गया, जबकि साफ है कि पुलिस ने पहले जमानती धाराओं में केस दर्ज किया था। पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के बयान के बाद अदालत ने गैर जमानती धाराएं जोड़ी थी। पुलिस पर किसी का कोई असर या दबाव नहीं था। अगर इस केस में पीड़िता के आईएएस पिता थाने में मौजूद थे तो इसमें क्या गलत था। किसी की भी बेटी के साथ ऐसा होगा तो वह थाने जाएगी ही। बल्कि इस केस में तो वह एक मिसाल है जिन्होंने बेटी के इस निर्णय में उनके साथ खुद खड़े हुए और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। ये उस रात केवल 30 मिनट की बात नहीं है, यहां हर रोज कोई न कोई शैतान ऐसा सड़कों पर कर रहे हैं। इनके जैसे लोगों के कारण ही आज लड़कियां सेफ नहीं हैं। सड़कों में भय का माहौल बना हुआ है।
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