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कागज की बर्बादी रोकने जा रहा पीयू, जुर्माना भी देना होगा

Fri, 11 Jan 2019 02:06 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Fri, 11 Jan 2019 02:06 AM IST
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कागज की बर्बादी रोकने जा रहा पीयू, जुर्माना भी देना होगा
कागज की बर्बादी की तो लगेगा जुर्माना
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- पीयू बनाने जा रहा नए नियम, लिखना होगा कागज के दोनों ओर
- एक करोड़ से अधिक रुपये कागज पर ही हो रहे हैं खर्च
- कार्यालय व विभागों से निकल रहे कागजों पर एक साइड में ही लिखा जा रहा
- कागज के पीछे नहीं लिखने पर पीयू करेगा कार्रवाई

फोटो-- पीयू भवन :::
सुशील कुमार
चंडीगढ़। कई शिक्षण संस्थानों में पेपर लैस व्यवस्था लागू हो गई है। पीयू ने भी इस तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। इस पर तेजी से काम चल रहा है। लेकिन इससे पहले पंजाब यूनिवर्सिटी कागज की बर्बादी रोकने जा रहा है। अब कागज के दोनों ओर लिखा जाना अनिवार्य होगा। यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया तो जुर्माना भी देना होगा। अगले माह तक यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसका खाका लगभग तैयार हो गया है।
पीयू में 78 विभाग हैं। इसके अलावा 15 अन्य छोटे-बड़े कार्यालय हैं। पीयू से हर दिन लगभग 800 से 900 पेज के पत्र निकलते हैं। इसमें अधिकांश कागजों के पीछे का हिस्सा प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इससे कागज की बर्बादी हो रही है। कई बार अधिकारियों ने कर्मचारियों व विभाग के अन्य लोगों को सलाह भी दी है, लेकिन उस पर पूरा काम नहीं हो पाया। अब इस दिशा में काम किया जा रहा है। ब्लैंक पेपर के दोनों ओर लिखा जाना अनिवार्य किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है इस व्यवस्था की मॉनीटरिंग भी होगी। यदि कागज की बर्बादी आदेश के बाद भी की गई तो कार्रवाई निश्चित है। जुर्माना दस रुपये से लेकर 100 रुपये तक संबंधित व्यक्ति पर पड़ेगा।
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सीनेट एजेंडे पर खर्च होते हैं 50 लाख
आंकड़ों को देखें तो पीयू में कागजों पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च आता है। इसमें 60 लाख रुपये तो सिंडिकेट व सीनेट पर ही खर्च हो जाते हैं। सदस्यों को एजेंडा दिया जाता है। एक एजेंडे में 500 पेज तक पहुंच जाते हैं। बैठक से पूर्व सदस्य इंडेक्स देखकर ही अपनी कार्रवाई आगे की शुरू कर देते हैं। मूल किताब की जरूरत ही नहीं पड़ती। कुछ सदस्य जरूरत सीनेट की बैठक में मामला उठाते समय उनको देख लेते हैं, लेकिन अधिकांश के पास बुक ऐसे ही रखी रह जाती है। जानकारों का कहना है कि यह कागजों की बर्बादी है। लाखों रुपये को बचाया जा सकता है। बची रकम अन्य कार्यों पर खर्च होगी तो और बेहतर कार्य होगा। कुछ सीनेट सदस्यों ने खुद ही कहा है कि इस एजेंडे की हार्ड कॉपी की जगह यदि मेल पर सूचना दे दी जाए तो पैसे की बचत हो सकती है। हालांकि पीयू के अधिकारी अब इस दिशा में भी काम कर रहे हैं।
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इनसेट---
पीएचडी की थिसिस के लिए जारी हुए नियम
पीएचडी की थिसिस के लिए पहले दस सेट जमा होते थे, लेकिन अब चार ही कर दिए गए हैं ताकि कागज अधिक बर्बाद न हो। इसके अलावा थिसिस शिक्षक तभी स्वीकार करेंगे जब कागज के आगे व पीछे लिखा होगा। यह भी अनिवार्य कर दिया गया है।


वर्जन---
फोटो---
कागज की बर्बादी न हो, इसके लिए नई योजना बनाई जा रही है। नियमों का यदि उल्लंघन किया गया तो कार्रवाई या जुर्माने का भी प्रावधान होगा। इसके अलावा पेपर लैस व्यवस्था की ओर भी हम आगे बढ़ रहे हैं।
- करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू
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