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केबल डालने के लिए निकाले जाएंगे टेंडर
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चंडीगढ़। शहरवासियों को बिजली कटौती से राहत देने के लिए यूटी प्रशासन का इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट तारों को अंडर ग्राउंड करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने जा रहा है। सूत्रों की मानें तो मानसून के बाद इसके लिए टेंडर निकाले जाएंगे। हालांकि इससे पहले भी टेंडर निकाले जा चुके हैं लेकिन बिड नहीं खुलने की वजह से योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। सिटी में 2.17 लाख बिजली के उपभोक्ता हैं।
दरअसल, शहर भर में बिजली के जर्जर तार मुसीबत का सबब बने हुए हैं। हल्की आंधी में यह तार टूट जा रहे हैं। कहीं-कहीं तारों का जाल भी लटक रहा है। इन तारों से बड़े हादसों का खतरा है। जर्जर तार टूटने से अक्सर बिजली गुल हो जाती है। यही वजह है कि दिन भर लोगों को बिजली ट्रिपिंग की समस्या से जूझना पड़ता है। इस समस्या से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए एक बार फिर विभाग तारों को अंडर ग्राउंड करने की प्रक्रिया शुरू करने की कवायद में है। जेईआरसी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 17.89 करोड़ रुपये अप्रूव किए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत सेक्टर 8 से इसकी शुरुआत होनी है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अभी तक केबल को अंडर ग्राउंड करने की शुरुआत नहीं हो पाई है। बताया जाता है कि पूरे प्रोजेक्ट में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रशासन की होगी, जबकि 30 प्रतिशत स्मार्ट पॉवर ग्रिड की हिस्सेदारी बताई जा रही है। इस संदर्भ में यूटी इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर राजेंद्र सिंह का कहना है कि तेज हवाएं चलने से तार ज्यादा टूट रहे हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए तारों को अंडर ग्राउंड कराने की लिए टेंडर निकाले जाएंगे।
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दरअसल, शहर भर में बिजली के जर्जर तार मुसीबत का सबब बने हुए हैं। हल्की आंधी में यह तार टूट जा रहे हैं। कहीं-कहीं तारों का जाल भी लटक रहा है। इन तारों से बड़े हादसों का खतरा है। जर्जर तार टूटने से अक्सर बिजली गुल हो जाती है। यही वजह है कि दिन भर लोगों को बिजली ट्रिपिंग की समस्या से जूझना पड़ता है। इस समस्या से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए एक बार फिर विभाग तारों को अंडर ग्राउंड करने की प्रक्रिया शुरू करने की कवायद में है। जेईआरसी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 17.89 करोड़ रुपये अप्रूव किए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत सेक्टर 8 से इसकी शुरुआत होनी है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अभी तक केबल को अंडर ग्राउंड करने की शुरुआत नहीं हो पाई है। बताया जाता है कि पूरे प्रोजेक्ट में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रशासन की होगी, जबकि 30 प्रतिशत स्मार्ट पॉवर ग्रिड की हिस्सेदारी बताई जा रही है। इस संदर्भ में यूटी इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर राजेंद्र सिंह का कहना है कि तेज हवाएं चलने से तार ज्यादा टूट रहे हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए तारों को अंडर ग्राउंड कराने की लिए टेंडर निकाले जाएंगे।
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