{"_id":"5d152b338ebc3e3cda1f1982","slug":"1561668384196-panchkula-news128","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारगिल की विजय गाथा सुनाने बाइक पर निकले 6 जवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कारगिल की विजय गाथा सुनाने बाइक पर निकले 6 जवान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस साल ऑपरेशन विजय को भारतीय सेना काफी जोरशोर से मना रही है। कारगिल युद्ध की विजय गाथा को प्रत्येक देशवासी तक पहुंचाने और एनसीसी कैडेट्स को प्रेरित करने के मकसद से भारतीय सेना के 6 जवान 30 दिन की मोटरसाइकल यात्रा पर निकले हैं। 21 जून को लेह से शुरू हुई यह यात्रा 19 जुलाई को अहमदाबाद में पहुंचकर संपन्न होगी। इस यात्रा के दौरान बुधवार को सेना के यह जवान सेक्टर-11 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज पहुंचे। पूरी यात्रा के दौरान ये जवान 7 राज्यों के 16 शहरों से होते हुए 30 हजार किलोमीटर का सफर पूरा करेंगे।
बुधवार को इन जवानों ने पीजीजीसी-11 में एनसीसी कैडेट्स के साथ बातचीत की और भारतीय सेना के पराक्रम के बारे में बताया। एनसीसी कैडेट्स को भारतीय सेना के ऊपर फिल्माई गई एक वीडियो भी दिखाई गई, जिसने सभी कैडेट्स में जोश से भर दिया। पीजीजीसी-11 का ऑडिटोरियम ‘हाउज द जोश-हाई सर’ के नारों से गूंज उठा। जवानों की टीम ने एनसीसी कैडेट्स को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। साथ ही यह भी बताया कि 12वीं या ग्रेजुएशन करने के बाद वह कैसे सेना में शामिल हो सकते हैं। कैप्टन शौनक भाटे ने सियाचिन ग्लेशियर में अपनी सर्विस के अनुभव के बारे में भी बताया। कार्यक्रम के आखिर में एक सवाल-जवाब सेशन भी रखा गया, जिसमें एनसीसी कैडेट्स ने करियर, सेना में उनके अनुभव के बारे में सवाल पूछे।
ये है यात्रा का रूट
कैप्टन शौनक भाटे की अगुवाई में कैप्टन विष्णु, नायब सूबेदार अशोक थापा, सैपर्स अलीउद्दीन, सैपर्स अमनदीप सिंह और सैपर्स अमनदीप सिंह अपनी-अपनी बाइक पर 21 जून को लेह से रवाना हुए थे। इस टीम को जीओसी फायर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने हरी झंडी दिखाई थी। जवानों की यह यात्रा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान से होते हुए गुजरात के अहमदाबाद में पहुंचकर संपन्न होगी। इस दौरान जवान इन राज्यों के एनसीसी यूनिट्स में जाकर एनसीसी कैटेड्स से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही वह कैसे सेना में शामिल हो सकते हैं, यह भी बता रहे हैं।
विज्ञापन
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चचेरे भाई हैं कैप्टन विष्णु
टीम में शामिल कैप्टन विष्णु मुंबई हमले में शहीद हुए परणोपरांत अशोक चक्र विजेता मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चचेरे भाई हैं। कैप्टन विष्णु ने बताया कि 12वीं कक्षा के बाद एनडीए करके वह सेना में शामिल हुए। परिवार का एक जवान बेटा पहले ही शहीद हो चुका था, बावजूद इसके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया और सेना ज्वाइन करने दिया। वहीं कैप्टन शौनक ने बताया कि उनके पिता समेत परिवार के कई लोग सेना में हैं। इसलिए उन्होंने बचपन से भी फौज में भर्ती होने के बारे में सोचा था। सैपर्स अलीउद्दीन ने बताया कि कॉलेज में एनसीसी की वजह से वह भारतीय सेना में शामिल हुए। सैपर्स अमनदीप सिंह ने बताया कि उन्हें एडवेंचर पसंद था, इसलिए वह भारतीय सेना में आए।
यात्रा पर निकले जवान, देश के चारों कोने से
30 दिन की यात्रा पर निकले ये सभी छह जवान देश के चारों कोने से संबंध रखते हैं। कैप्टन शौनक भाटे पुणे (महाराष्ट्र) से हैं जबकि कैप्टन विष्णु केरल से, नायब सूबेदार अशोक थापा उत्तराखंड से हैं और को सेना ज्वाइन किए 26 साल हो गए हैं वह संबंध रखते हैं। सैपर्स अलीउद्दीन असम तो सैपर्स अमनदीप सिंह और सैपर्स अमनदीप सिंह दोनों पंजाब से संबंध रखते हैं। सभी जवान देेश के चारों कोनों से निकले हैं और इनके फोकस में युवा हैं, जो करगिल युद्ध के दौरान या तो पैदा ही हुए थे या बहुत छोटे थे, जिन्हें युद्ध के बारे में और हमारे जांबाजों के बारे में खास जानकारी नहीं है। विजय दिवस 26 जुलाई को है, जिस दिन ऑपरेशन विजय खत्म हुआ था।
यह है कारगिल युद्ध का इतिहास
20 साल पहले यानी 1999 में 26 जुलाई के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में विजय हासिल कर ली थी। हर साल 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। युद्ध की शुुरुआत पाकिस्तान ने की थी। 3 मई 1999 को युद्ध शुरू हुआ था और भारत ने युद्ध का अंत 26 जुलाई 1999 को करीब 3 महीने बाद किया। इस युद्ध में भारतीय सेना के कुल 527 सैनिक शहीद हुए थे। वहीं, 1363 लोग घायल हुए थे। इस युद्ध को हर भारतवासी गर्व के साथ हर साल याद करता है। आगामी 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस मनाएगा।
विज्ञापन
बुधवार को इन जवानों ने पीजीजीसी-11 में एनसीसी कैडेट्स के साथ बातचीत की और भारतीय सेना के पराक्रम के बारे में बताया। एनसीसी कैडेट्स को भारतीय सेना के ऊपर फिल्माई गई एक वीडियो भी दिखाई गई, जिसने सभी कैडेट्स में जोश से भर दिया। पीजीजीसी-11 का ऑडिटोरियम ‘हाउज द जोश-हाई सर’ के नारों से गूंज उठा। जवानों की टीम ने एनसीसी कैडेट्स को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। साथ ही यह भी बताया कि 12वीं या ग्रेजुएशन करने के बाद वह कैसे सेना में शामिल हो सकते हैं। कैप्टन शौनक भाटे ने सियाचिन ग्लेशियर में अपनी सर्विस के अनुभव के बारे में भी बताया। कार्यक्रम के आखिर में एक सवाल-जवाब सेशन भी रखा गया, जिसमें एनसीसी कैडेट्स ने करियर, सेना में उनके अनुभव के बारे में सवाल पूछे।
विज्ञापन
ये है यात्रा का रूट
कैप्टन शौनक भाटे की अगुवाई में कैप्टन विष्णु, नायब सूबेदार अशोक थापा, सैपर्स अलीउद्दीन, सैपर्स अमनदीप सिंह और सैपर्स अमनदीप सिंह अपनी-अपनी बाइक पर 21 जून को लेह से रवाना हुए थे। इस टीम को जीओसी फायर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने हरी झंडी दिखाई थी। जवानों की यह यात्रा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान से होते हुए गुजरात के अहमदाबाद में पहुंचकर संपन्न होगी। इस दौरान जवान इन राज्यों के एनसीसी यूनिट्स में जाकर एनसीसी कैटेड्स से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही वह कैसे सेना में शामिल हो सकते हैं, यह भी बता रहे हैं।
विज्ञापन
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चचेरे भाई हैं कैप्टन विष्णु
टीम में शामिल कैप्टन विष्णु मुंबई हमले में शहीद हुए परणोपरांत अशोक चक्र विजेता मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चचेरे भाई हैं। कैप्टन विष्णु ने बताया कि 12वीं कक्षा के बाद एनडीए करके वह सेना में शामिल हुए। परिवार का एक जवान बेटा पहले ही शहीद हो चुका था, बावजूद इसके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया और सेना ज्वाइन करने दिया। वहीं कैप्टन शौनक ने बताया कि उनके पिता समेत परिवार के कई लोग सेना में हैं। इसलिए उन्होंने बचपन से भी फौज में भर्ती होने के बारे में सोचा था। सैपर्स अलीउद्दीन ने बताया कि कॉलेज में एनसीसी की वजह से वह भारतीय सेना में शामिल हुए। सैपर्स अमनदीप सिंह ने बताया कि उन्हें एडवेंचर पसंद था, इसलिए वह भारतीय सेना में आए।
यात्रा पर निकले जवान, देश के चारों कोने से
30 दिन की यात्रा पर निकले ये सभी छह जवान देश के चारों कोने से संबंध रखते हैं। कैप्टन शौनक भाटे पुणे (महाराष्ट्र) से हैं जबकि कैप्टन विष्णु केरल से, नायब सूबेदार अशोक थापा उत्तराखंड से हैं और को सेना ज्वाइन किए 26 साल हो गए हैं वह संबंध रखते हैं। सैपर्स अलीउद्दीन असम तो सैपर्स अमनदीप सिंह और सैपर्स अमनदीप सिंह दोनों पंजाब से संबंध रखते हैं। सभी जवान देेश के चारों कोनों से निकले हैं और इनके फोकस में युवा हैं, जो करगिल युद्ध के दौरान या तो पैदा ही हुए थे या बहुत छोटे थे, जिन्हें युद्ध के बारे में और हमारे जांबाजों के बारे में खास जानकारी नहीं है। विजय दिवस 26 जुलाई को है, जिस दिन ऑपरेशन विजय खत्म हुआ था।
यह है कारगिल युद्ध का इतिहास
20 साल पहले यानी 1999 में 26 जुलाई के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में विजय हासिल कर ली थी। हर साल 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। युद्ध की शुुरुआत पाकिस्तान ने की थी। 3 मई 1999 को युद्ध शुरू हुआ था और भारत ने युद्ध का अंत 26 जुलाई 1999 को करीब 3 महीने बाद किया। इस युद्ध में भारतीय सेना के कुल 527 सैनिक शहीद हुए थे। वहीं, 1363 लोग घायल हुए थे। इस युद्ध को हर भारतवासी गर्व के साथ हर साल याद करता है। आगामी 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस मनाएगा।