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ज्ञान ही आपका चरित्र है: कृपा सागर
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ज्ञान ही आपका चरित्र है: कृपा सागर
खामोश रहकर रोशन मीनार बनें
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। जिस प्रकार मील का पत्थर खामोश रहकर सबका मार्ग दर्शन करता है। इसी प्रकार हमें खामोश रहकर अपने कर्मों में ज्ञान को अपनाकर रोशन मीनार बनना है। सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज भी चाहती हैं कि हमारा ज्ञान हमारे कर्म में झलके। क्योंकि कर्म की आवाज शब्दों से अधिक तेजी से परिवर्तन करती है। यह उद्गार निरंकारी मिशन के रोशन मीनार कृपा सागर ने सेक्टर-9 स्थित स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित सत्संग के दौरान व्यक्त किए ।
उन्होंने बताया कि सच्चे सद्गुरु के तीन गुण होते हैं। पहला कि सद्गुरु रास्ते नहीं मंजिल देते हैं। भाव सद्गुरु कभी अपने भक्तों को कर्मकांडों से नहीं जोड़ते। दूसरा सच्चा सद्गुरु अपने शिष्यों को अपने जैसा बनाते हैं। तीसरा सच्चा सद्गुरु अपने ज्ञान का पहरा देते हैं भाव जिस प्रकार कोई भी माता-पिता निक्कमे बच्चे के माता-पिता नहीं बनना चाहते। इसी प्रकार सद्गुरु भी चाहते हैं कि हम सब अपने किरदार को ऐसा बनाएं कि देखने वाला कहे कि ये निरंकारी है। उसका किरदार रोशन मीनार जैसा मार्गदर्शक भी हो और चेतना करने वाला भी हो।
इस अवसर पर पंचकूला ब्रांच के संयोजक भाई कुलदीप सिंह व संचालक करनैल सिंह ने रोशन मीनार कृपा सागर का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि सेवा भाव से होती है। हम हर एक के भाव को समझ पाएं। उसकी भावनाओं की कद्र कर पाएं। जिससे कि हमारा जीवन तो बेहतर बनें, साथ ही साथ देश व समाज को सुंदर बनाने में योगदान दे पाएं। इस अवसर पर निर्माण ने कहा कि गुरमत के सिद्धांत को अमल में लाने का युग है।
खामोश रहकर रोशन मीनार बनें
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। जिस प्रकार मील का पत्थर खामोश रहकर सबका मार्ग दर्शन करता है। इसी प्रकार हमें खामोश रहकर अपने कर्मों में ज्ञान को अपनाकर रोशन मीनार बनना है। सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज भी चाहती हैं कि हमारा ज्ञान हमारे कर्म में झलके। क्योंकि कर्म की आवाज शब्दों से अधिक तेजी से परिवर्तन करती है। यह उद्गार निरंकारी मिशन के रोशन मीनार कृपा सागर ने सेक्टर-9 स्थित स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित सत्संग के दौरान व्यक्त किए ।
उन्होंने बताया कि सच्चे सद्गुरु के तीन गुण होते हैं। पहला कि सद्गुरु रास्ते नहीं मंजिल देते हैं। भाव सद्गुरु कभी अपने भक्तों को कर्मकांडों से नहीं जोड़ते। दूसरा सच्चा सद्गुरु अपने शिष्यों को अपने जैसा बनाते हैं। तीसरा सच्चा सद्गुरु अपने ज्ञान का पहरा देते हैं भाव जिस प्रकार कोई भी माता-पिता निक्कमे बच्चे के माता-पिता नहीं बनना चाहते। इसी प्रकार सद्गुरु भी चाहते हैं कि हम सब अपने किरदार को ऐसा बनाएं कि देखने वाला कहे कि ये निरंकारी है। उसका किरदार रोशन मीनार जैसा मार्गदर्शक भी हो और चेतना करने वाला भी हो।
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इस अवसर पर पंचकूला ब्रांच के संयोजक भाई कुलदीप सिंह व संचालक करनैल सिंह ने रोशन मीनार कृपा सागर का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि सेवा भाव से होती है। हम हर एक के भाव को समझ पाएं। उसकी भावनाओं की कद्र कर पाएं। जिससे कि हमारा जीवन तो बेहतर बनें, साथ ही साथ देश व समाज को सुंदर बनाने में योगदान दे पाएं। इस अवसर पर निर्माण ने कहा कि गुरमत के सिद्धांत को अमल में लाने का युग है।
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