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स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरवासियों ने निभाई अहम भागेदारी: सिहाग
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स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरवासियों ने निभाई अहम भागेदारी: सिहाग
बोले, सफाई सैनिक ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में पंचकूला का पहले 100 शहरों में स्थान पाना कुछ सुखद है तथा रैंकिंग में लगातार सुधार हो रहा है। यह इस बात का सबूत है कि शहर के लोगों ने सर्वेक्षण में अपनी भागीदारी बढ़ाई है। नगर निगम के सफाई सैनिकों व दूसरे स्टाफ द्वारा भी मेहनत की गई है। यह कहना है जननायक जनता पार्टी पंचकूला (शहरी) के जिला प्रधान ओपी सिहाग का। वह वीरवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पंचकूला हरियाणा का व्यवस्थित शहर है उसका पूरा विकास बेमानी है, जब तक पंचकूला में रहने वाली लगभग 42000 स्लम आबादी जो कि इंदिरा, राजीव, खड़क मंगोली व शहर के दूसरे हिस्से में रहती है की झोपड़ी में भी सारी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जातीं। पंचकूला शहर को विकसित करने में इन कालोनियों में रहने वालों का महत्वपूर्ण योगदान है। इन कालोनियों में पीने के लिए स्वच्छ जल, स्ट्रीट लाइट, साफ स्वच्छ टायलेट, पक्की गलियां नालियां न होने से शहर की लगभग 22 प्रतिशत आबादी को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है।
सिहाग ने कहा कि सारे शहर को स्वचछ रखने वाले सफाई सैनिका का परिवार भी इन्हीं कालोनियों में रहता है। आज इन कालोनियों में चिकित्सा, शिक्षा नाम की कोई चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि 2003-04 में नगर परिषद पंचकूला में बतौर कार्यकारी अधिकारी रहते हुए तत्कालीन सरकार से स्पेशल मंजूरी लेकर इन कालोनियों की गलियों को पक्का करवाया था। लेकिन पिछले कई सालों में आई सरकारों ने इन कालोनियों में रहने वालों की सुविधा के तरफ ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं वोट देने के बाद मौजूदा सरकार भी इन्हें भूल गई।
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बोले, सफाई सैनिक ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में पंचकूला का पहले 100 शहरों में स्थान पाना कुछ सुखद है तथा रैंकिंग में लगातार सुधार हो रहा है। यह इस बात का सबूत है कि शहर के लोगों ने सर्वेक्षण में अपनी भागीदारी बढ़ाई है। नगर निगम के सफाई सैनिकों व दूसरे स्टाफ द्वारा भी मेहनत की गई है। यह कहना है जननायक जनता पार्टी पंचकूला (शहरी) के जिला प्रधान ओपी सिहाग का। वह वीरवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पंचकूला हरियाणा का व्यवस्थित शहर है उसका पूरा विकास बेमानी है, जब तक पंचकूला में रहने वाली लगभग 42000 स्लम आबादी जो कि इंदिरा, राजीव, खड़क मंगोली व शहर के दूसरे हिस्से में रहती है की झोपड़ी में भी सारी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जातीं। पंचकूला शहर को विकसित करने में इन कालोनियों में रहने वालों का महत्वपूर्ण योगदान है। इन कालोनियों में पीने के लिए स्वच्छ जल, स्ट्रीट लाइट, साफ स्वच्छ टायलेट, पक्की गलियां नालियां न होने से शहर की लगभग 22 प्रतिशत आबादी को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है।
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सिहाग ने कहा कि सारे शहर को स्वचछ रखने वाले सफाई सैनिका का परिवार भी इन्हीं कालोनियों में रहता है। आज इन कालोनियों में चिकित्सा, शिक्षा नाम की कोई चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि 2003-04 में नगर परिषद पंचकूला में बतौर कार्यकारी अधिकारी रहते हुए तत्कालीन सरकार से स्पेशल मंजूरी लेकर इन कालोनियों की गलियों को पक्का करवाया था। लेकिन पिछले कई सालों में आई सरकारों ने इन कालोनियों में रहने वालों की सुविधा के तरफ ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं वोट देने के बाद मौजूदा सरकार भी इन्हें भूल गई।
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