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हेडिंग: आरटीआई में जवाब देकर खुद ही भूल गए डीईओ
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बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी संचालन का मामला
आरटीआई में जवाब देकर खुद ही भूल गए डीईओ
- उपायुक्त के पूछने पर बोले, मेरे संज्ञान में ऐसा कुछ नहीं है
- कुर्सी बचाने को लंबी पहुंच वालों से पंगा नहीं लेना चाहते
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। बच्चों की जिंदगी से ज्यादा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अपनी कुर्सी प्यारी है। यही कारण है कि वह सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। इतना ही नहीं जब उपायुक्त मुकुल कुमार ने बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी संचालन के मामले को लेकर डिस्ट्रिक्ट एजूकेशन ऑफिसर (डीईओ) एचएस सैनी से बात की तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि इस तरह की किसी भी स्कूल में गतिविधि नहीं चल रहा है और न ही उनके संज्ञान में है। लेकिन, डीईओ शायद यह भूल गए कि उन्होंने खुद ही आरटीआई के जवाब में जानकारी दी है कि शहर के कई निजी स्कूलों के बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी का संचालन हो रहा है। इसके बाद ही यह मामला मीडिया में सुर्खियां बना है। इतना ही नहीं जब निजी स्कूल संचालकों द्वारा बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उनसे बात की गई तो उन्होंने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
उपायुक्त के पूछने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
शिक्षा विभाग के अधिकारी उपायुक्त मुकुल कुमार के आदेश को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं इसकी भी सच्चाई इस मामले से सामने आ गई है। पहले तो सब कुछ जानने के बाद भी अपने स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की और जब उपायुक्त ने इस मामले को लेकर डीईओ एचएस सैनी से पूछा तब भी संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। जबकि डीईओ को ऐसे स्कूलों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के आदेश जारी देना चाहिए था। बेसमेंट में क्लास या फिर अन्य एक्टिविटी का संचालन करने वाले निजी स्कूल संचालकों के पास टीम भेजकर उन्हें अल्टीमेट देना चाहिए था। लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी करना मुनासिब नहीं समझा।
किसी से पंगा नहीं लेना चाहते अधिकारी
बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी के संचालन का मामला सामने आने के बाद भी डीईओ की ओर से कोई कार्रवाई न करना कई सवाल खड़े कर रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि वे अपनी कुर्सी को किसी तरह के विवाद में डालना नहीं चाहते हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि शहर में कई ऐसे निजी स्कूल संचालक हैं जो नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी का संचालन कर रहे हैं और जिनकी पहुंच बहुत ऊपर तक है। वह जैसे ही किसी स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे तो उनकी कुर्सी पर खतरा मंडराने लगेगा।
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उपायुक्त ने लिया संज्ञान, कार्रवाई के दिए आदेश
शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भले ही स्टूडेंट्स की जिंदगी से प्यार न हो, लेकिन उपायुक्त मुकुल कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया। जैसे ही मामला उनके संज्ञान में आया उन्होंने तत्काल हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के ईओ आशुतोष राजन को फोन कर सख्त कार्रवाई के लिए आदेश दिए। इसके बाद उन्होंने डीईओ से भी फोन पर इस मुद्दे पर बात की, इस दौरान डीईओ ने यह कहकर इतिश्री कर ली कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
आरटीआई में फिर पूछा, क्या की कार्रवाई
जीरकपुर निवासी मनीष कुमार ने एक बार फिर आरटीआई लगाकर डीईओ से पूछा है कि अभी तक उन्होंने बेसमेंट में क्लास लगाने वाले निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि यह मामला बच्चों की जिंदगी से जुड़ा होने के कारण बहुत गंभीर है। जानकारी होने के बाद भी विभागीय अधिकारी क्यों कार्रवाई नहीं कर रहे हैं यह समझ से परे है।
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आरटीआई में जवाब देकर खुद ही भूल गए डीईओ
- उपायुक्त के पूछने पर बोले, मेरे संज्ञान में ऐसा कुछ नहीं है
- कुर्सी बचाने को लंबी पहुंच वालों से पंगा नहीं लेना चाहते
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। बच्चों की जिंदगी से ज्यादा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अपनी कुर्सी प्यारी है। यही कारण है कि वह सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। इतना ही नहीं जब उपायुक्त मुकुल कुमार ने बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी संचालन के मामले को लेकर डिस्ट्रिक्ट एजूकेशन ऑफिसर (डीईओ) एचएस सैनी से बात की तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि इस तरह की किसी भी स्कूल में गतिविधि नहीं चल रहा है और न ही उनके संज्ञान में है। लेकिन, डीईओ शायद यह भूल गए कि उन्होंने खुद ही आरटीआई के जवाब में जानकारी दी है कि शहर के कई निजी स्कूलों के बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी का संचालन हो रहा है। इसके बाद ही यह मामला मीडिया में सुर्खियां बना है। इतना ही नहीं जब निजी स्कूल संचालकों द्वारा बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उनसे बात की गई तो उन्होंने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
उपायुक्त के पूछने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
शिक्षा विभाग के अधिकारी उपायुक्त मुकुल कुमार के आदेश को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं इसकी भी सच्चाई इस मामले से सामने आ गई है। पहले तो सब कुछ जानने के बाद भी अपने स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की और जब उपायुक्त ने इस मामले को लेकर डीईओ एचएस सैनी से पूछा तब भी संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। जबकि डीईओ को ऐसे स्कूलों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के आदेश जारी देना चाहिए था। बेसमेंट में क्लास या फिर अन्य एक्टिविटी का संचालन करने वाले निजी स्कूल संचालकों के पास टीम भेजकर उन्हें अल्टीमेट देना चाहिए था। लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी करना मुनासिब नहीं समझा।
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किसी से पंगा नहीं लेना चाहते अधिकारी
बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी के संचालन का मामला सामने आने के बाद भी डीईओ की ओर से कोई कार्रवाई न करना कई सवाल खड़े कर रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि वे अपनी कुर्सी को किसी तरह के विवाद में डालना नहीं चाहते हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि शहर में कई ऐसे निजी स्कूल संचालक हैं जो नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी का संचालन कर रहे हैं और जिनकी पहुंच बहुत ऊपर तक है। वह जैसे ही किसी स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे तो उनकी कुर्सी पर खतरा मंडराने लगेगा।
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उपायुक्त ने लिया संज्ञान, कार्रवाई के दिए आदेश
शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भले ही स्टूडेंट्स की जिंदगी से प्यार न हो, लेकिन उपायुक्त मुकुल कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया। जैसे ही मामला उनके संज्ञान में आया उन्होंने तत्काल हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के ईओ आशुतोष राजन को फोन कर सख्त कार्रवाई के लिए आदेश दिए। इसके बाद उन्होंने डीईओ से भी फोन पर इस मुद्दे पर बात की, इस दौरान डीईओ ने यह कहकर इतिश्री कर ली कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
आरटीआई में फिर पूछा, क्या की कार्रवाई
जीरकपुर निवासी मनीष कुमार ने एक बार फिर आरटीआई लगाकर डीईओ से पूछा है कि अभी तक उन्होंने बेसमेंट में क्लास लगाने वाले निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि यह मामला बच्चों की जिंदगी से जुड़ा होने के कारण बहुत गंभीर है। जानकारी होने के बाद भी विभागीय अधिकारी क्यों कार्रवाई नहीं कर रहे हैं यह समझ से परे है।