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मानेसर भूमि घोटाला में बिल्डर अतुल बंसल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, कोर्ट में पेश हुए हुड्डा
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा सहित एमएल तायल, छतर सिंह, एसएस ढिल्लो अन्य आरोपी मानेसर भूमि घोटाला मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत में प्रत्यक्ष रूप से पेश हुए। वहीं मामले में आरोपी रहे बिल्डर अतुल बंसल के पेेश नहीं होने पर सीबीआई की अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई छह फरवरी को होगी। भूमि घोटाले में प्रदेश के पूर्व सीएम हुड्डा समेत एमएल तायल, छतर सिंह, एसएस ढिल्लो सहित 34 आरोपी हैं। इसमें अतुल बंसल के अलावा सभी आरोपी पेश हुए थे।
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पंचकूला की अदालत में मंगलवार सुबह मानेसर भूमि घोटाले में सुनवाई थी। इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित अन्य आरोपी कोर्ट पहुंचे। लेकिन बिल्डर अतुल बंसल नहीं आए। जिस पर अदालत ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए उनके गिरफ्तारी के वारंट इश्यू कर दिए। अदालत पहुंचने पर हुड्डा के साथ उनके वकील और कई कांग्रेस नेता भी यहां आए थे।
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बता दें कि मानेसर भूमि घोटाले की सुनवाई पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में हो रही है। इस संबंध में सीबीआई ने हरियाणा सीएम सहित 34 लोगों पर केस दर्ज किया था। मानेसर भूमि घोटाले में यह बात सामने आई थी कि 27 अगस्त 2004 से 27 अगस्त 2007 के बीच निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात जनसेवकों के साथ मिलीभगत कर गुड़गांव जिले में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों के किसानों और भूस्वामियों को सरकार की ओर से अधिग्रहण का भय दिखाकर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली थी। 17 सितंबर 2015 को भाजपा सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इस मामले में ईडी ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग का भी केस दर्ज किया था। ईडी ने हुड्डा और अन्य 34 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था।
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आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम तत्कालीन कांग्रेस सरकार के संरक्षण में चल रहा था। निजी बिल्डरों ने तत्कालीन सरकार तथा संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 400 एकड़ जमीन को खरीदा था। अधिसूचना रद्द करने से नाखुश किसान सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। जिसके बाद मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।