{"_id":"5c40e1b9bdec22736e4eb680","slug":"154775608416-pkl-office-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंशुल ने दोषियों के लिए मांगी थी फांसी की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंशुल ने दोषियों के लिए मांगी थी फांसी की सजा
विज्ञापन
अंशुल ने दोषियों के लिए मांगी थी फांसी की सजा
पंचकूला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने सीबीआई कोर्ट में वीरवार को फैसले पर बहस के दौरान केस को रेयर ऑफ रेयरिस्ट बताते हुए दोषियों को फांसी की सजा सुनाने की मांग की थी। लेकिन मामले में सभी पक्षों को सुनने और सामने आए तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने इस हत्याकांड को रेयर ऑफ रेयरिस्ट मानने से इंकार करते हुए इसे षड्यंत्र के तहत मामला माना है। जिसके चलते कोर्ट ने फांसी की सजा के बजाय दोषियों को ताउम्र कैद की सजा सुनाई है।
बचाव पक्ष ने दिया परिवार और सामाजिक कार्यों का हवाला
सीबीआई कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए जाने के बाद बचाव पक्ष ने डेरामुखी गुरमीत राम रहीम की बीमारी उसके परिवार और सामाजिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए सजा कम सुनाने की अपील की थी। बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि 51 वर्षीय राम रहीम की एक बुजुर्ग मां, पत्नी और एक बेटा व दो बेटी हैं। जिनके पालन पोषण और देखभाल करने के लिए राम रहीम के अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं है। राम रहीम लंबे समय से ब्लड डोनेशन, देश के अलग-अलग शहरों में साफ-सफाई कराने से लेकर अन्य सामाजिक कार्य करवाते रहे हैं। वहीं, उनकी उम्र और बीमारी के चलते कोर्ट उस पर रहम करे और कम से कम सजा सुनाए।
विज्ञापन
पंचकूला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने सीबीआई कोर्ट में वीरवार को फैसले पर बहस के दौरान केस को रेयर ऑफ रेयरिस्ट बताते हुए दोषियों को फांसी की सजा सुनाने की मांग की थी। लेकिन मामले में सभी पक्षों को सुनने और सामने आए तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने इस हत्याकांड को रेयर ऑफ रेयरिस्ट मानने से इंकार करते हुए इसे षड्यंत्र के तहत मामला माना है। जिसके चलते कोर्ट ने फांसी की सजा के बजाय दोषियों को ताउम्र कैद की सजा सुनाई है।
बचाव पक्ष ने दिया परिवार और सामाजिक कार्यों का हवाला
सीबीआई कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए जाने के बाद बचाव पक्ष ने डेरामुखी गुरमीत राम रहीम की बीमारी उसके परिवार और सामाजिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए सजा कम सुनाने की अपील की थी। बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि 51 वर्षीय राम रहीम की एक बुजुर्ग मां, पत्नी और एक बेटा व दो बेटी हैं। जिनके पालन पोषण और देखभाल करने के लिए राम रहीम के अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं है। राम रहीम लंबे समय से ब्लड डोनेशन, देश के अलग-अलग शहरों में साफ-सफाई कराने से लेकर अन्य सामाजिक कार्य करवाते रहे हैं। वहीं, उनकी उम्र और बीमारी के चलते कोर्ट उस पर रहम करे और कम से कम सजा सुनाए।
विज्ञापन