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जे पहला दस देदें कि बच्चा मर गया है तां पैसे किवें मिलदे

Mon, 17 Dec 2018 10:40 PM IST
Updated Mon, 17 Dec 2018 10:40 PM IST
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जे पहला दस देदें कि बच्चा मर गया है तां पैसे किवें मिलदे
उपचार के दौरान ढाई माह के बच्चे की मौत, परिवार का हंगामा
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परिजनों का आरोप, पैसों की खातिर बच्चे की मौत की सूचना देरी से दी गई
आईएमए आरोपी डाक्टर के समर्थन में उतरी, बताया बेकसूर
अमर उजाला ब्यूरो
मोगा। गंभीर बीमारी से पीड़ित ढाई माह के शिशु की उपचार के दौरान मौत हो गई तो परिवार ने अस्पताल के बाहर रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया। बच्चे का उपचार करने वाले डॉक्टर पर परिवार का आरोप था कि पैसों की खातिर उन्हें बच्चे की मौत की खबर लगभग पांच घंटे के बाद दी गई। हालांकि देर शाम दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
संदीप कुमार वासी मट्टा वाला वेहड़ा ने बताया कि रविवार को उसके ढाई माह के बेटे कार्तिक की तबीयत अचानक खराब हो गई। परिवार ने कार्तिक को आरा रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया। वहां से बच्चे को फरीदकोट रेफर कर दिया गया, लेकिन परिजन उसे अकालसर रोड पर स्थित बच्चों के निजी अस्पताल में ले गए। संदीप के अनुसार बच्चे को दाखिल करते समय अस्पताल स्टाफ ने उनसे पांच हजार रुपये जमा करवाए। इसके बाद सोमवार सुबह उन्हें और पांच हजार रुपये जमा करवाने को कह दिया गया। जब परिवार ने बच्चे की हालत के बारे में पूछा तो बच्चे का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कहा कि बच्चा बिल्कुल ठीक है, आप जल्दी पांच हजार रुपये और जमा करवाओ। पैसे जमा करवाने के कुछ ही समय के बाद डाक्टर ने कहा कि बच्चे की मौत हो गई है। परिवार के अनुसार उनके बच्चे की मौत सोमवार सुबह ही हो गई थी, लेकिन डाक्टर ने पैसों की खातिर जानबूझकर उनके बच्चे को अस्पताल में दाखिल ही रखा।
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...आईएएम प्रधान की जुबान फिसली
परिवार जब अस्पताल के बाहर रोष व्यक्त कर रहा था तो डॉक्टर के समर्थन में आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के प्रधान डॉ. संजीव मित्तल मौके पर पहुंचे। इस दौरान वे बोल पड़े कि अगर पहले बता देते कि बच्चा मर गया है तो डॉक्टर को पैसे कौन देता। इस पर उनके साथियों ने धीमी आवाज में एतराज जताते हुए बात को पलट दिया और समझौते की बात करने लगे।
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बच्चे के चाचा संजीव कुमार का कहना था कि रविवार की रात करीब 10 बजे वह कार्तिक को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। यहां आकर उनसे एक खाली पेपर पर साइन करवा लिए गए। बच्चे की हालत को देखते हुए उन्होंने यह नहीं पूछा कि खाली पेपर पर साइन क्यों करवाए जा रहे हैं। बच्चे की मौत हो जाने के बाद सुबह परिवार को पता चला कि उस साइन किए पेपर पर डाक्टर ने पंजाबी में लिखा कि बच्चे की हालत काफी गंभीर है, परिवार चाहता है कि लुधियाना या फरीदकोट के बजाय बच्चे का उपचार मोगा में ही उस अस्पताल में हो। उपचार के दौरान अगर बच्चे को कुछ हो जाता है तो परिवार को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। संजीव कुमार समेत उसके पारिवारिक सदस्यों का आरोप था कि डॉक्टर द्वारा खाली पेपर पर साइन करवाकर उसे कंसेट का रूप दिया गया है।
...सिर्फ उपचार का ही खर्च लिया
वहीं आरोपी डॉक्टर ने कहा कि बच्चे की हालत काफी गंभीर थी। इंजेक्शन व दवा खिलाने के बावजूद बच्चे को बार बार दौरे पड़ रहे थे। उसे कुछ समय के लिए वेंटीलेटर पर भी रखा गया। बच्चे की मौत की सूचना परिवार को देरी से देने के आरोप झूठे हैं और परिवार से उपचार पर आया अस्पताल का महज खर्च ही लिया जा रहा है।

...पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर होगी कार्रवाई
थाना सिटी साउथ के सहायक थानेदार जगतार सिंह का कहना है कि उक्त मामला उनके ध्यान में है। बच्चे के शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद परिजनों के बयान पर कानूनी कार्रवाई कर दी जाएगी।


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