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patiala
Updated Thu, 11 Oct 2018 10:08 PM IST
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मरणव्रत पर बैठी महिला अध्यापक की हालत बिगड़ी
सांझा अध्यापक मोर्चा का मरणव्रत पांचवें दिन भी जारी रहा
पूर्व मंत्री लाल सिंह के घर की तरफ अध्यापकों ने निकाला मशाल मार्च
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। एसएसए/रमसा, माडल और आदर्श स्कूलों के अध्यापकों की तनख्वाहों में कटौती करके रेगुलर करने के पंजाब सरकार के फैसले के खिलाफ अध्यापकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। पटियाला में सांझा अध्यापक मोर्चा के बैनर तले अध्यापकों की ओर से शुरू किया गया आंदोलन और मरणव्रत वीरवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। वीरवार को अध्यापकों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं मौजूदा मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह की कोठी की तरफ मशाल मार्च निकाला। धरने में बरनाला, जालंधर, पटियाला और अन्य जिलों से बड़ी गिनती में महिला अध्यापक अपने बच्चों समेत भाग लेने पहुंचीं। इस मौके पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। इस दौरान मरणव्रत पर बैठी एक महिला अध्यापिका की हालत बिगड़ गई।
इस मौके पर प्रदेश कनवीनर सुखविंदर चाहल, प्रदेश को कनवीनर हरदीप सिंह टोडरपुर, दीदार सिंह मुदकी और गगन राणू ने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से एसएसए/रमसा अध्यापकों को पूरे ग्रेड में पक्का करने के बजाय उनकी तनख्वाह में 65 से 75 प्रतिशत तक कटौती कर दी गई है।
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सांझा अध्यापक मोर्चा का मरणव्रत पांचवें दिन भी जारी रहा
पूर्व मंत्री लाल सिंह के घर की तरफ अध्यापकों ने निकाला मशाल मार्च
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। एसएसए/रमसा, माडल और आदर्श स्कूलों के अध्यापकों की तनख्वाहों में कटौती करके रेगुलर करने के पंजाब सरकार के फैसले के खिलाफ अध्यापकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। पटियाला में सांझा अध्यापक मोर्चा के बैनर तले अध्यापकों की ओर से शुरू किया गया आंदोलन और मरणव्रत वीरवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। वीरवार को अध्यापकों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं मौजूदा मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह की कोठी की तरफ मशाल मार्च निकाला। धरने में बरनाला, जालंधर, पटियाला और अन्य जिलों से बड़ी गिनती में महिला अध्यापक अपने बच्चों समेत भाग लेने पहुंचीं। इस मौके पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। इस दौरान मरणव्रत पर बैठी एक महिला अध्यापिका की हालत बिगड़ गई।
इस मौके पर प्रदेश कनवीनर सुखविंदर चाहल, प्रदेश को कनवीनर हरदीप सिंह टोडरपुर, दीदार सिंह मुदकी और गगन राणू ने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से एसएसए/रमसा अध्यापकों को पूरे ग्रेड में पक्का करने के बजाय उनकी तनख्वाह में 65 से 75 प्रतिशत तक कटौती कर दी गई है।
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