फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   प्री-प्राईमरी कक्षाओं में घटने लगी नौनिहालों की संख्या

प्री-प्राईमरी कक्षाओं में घटने लगी नौनिहालों की संख्या

Tue, 21 Nov 2017 10:39 PM IST
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:39 PM IST
विज्ञापन
प्री-प्राईमरी कक्षाओं में घटने लगी नौनिहालों की संख्या
प्री-प्राइमरी कक्षाओं में घटने लगी नौनिहालों की संख्या
विज्ञापन

घरों से दूर स्थित स्कूलों में नहीं पहुंच रहे बच्चे
दलिया और पंजीरी न मिलना भी एक कारण
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से बाल दिवस से प्राइमरी स्कूलों में शुरू की गई प्री-प्राइमरी कक्षाओं से नौनिहालों और उनके अभिभावकों का मोह भंग होने लगा है। परिणामस्वरूप एक सप्ताह बाद ही इन कक्षाओं में बच्चों की संख्या घटने लगी है। इससे सरकार का यह अभियान समय से पहले ही दम तोड़ता नजर आ रहा है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि अगर तीन माह तक इन कक्षाओं में बच्चों की संख्या पूरी नहीं हुई तो वह विभाग को रिपोर्ट करेंगे।
14 नवंबर को सभी प्राइमरी स्कूलों में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिले शुरू हुए थे। पहले दिन अध्यापकों के निजी प्रयासों से अभिभावक अपने छोटे बच्चों को लेकर स्कूल में पहुंचे लेकिन उसके बाद उन्हें कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं में जाने वालों में अधिकतर मजदूर वर्ग के बच्चे शामिल हैं। वह अपने बच्चों को आंगनबाड़ी सेंटरों में भेजकर दिन भर के लिए काम पर चले जाते हैं। इतना ही नहीं आंगनबाड़ी हेल्पर सुबह उसके बच्चों को घर से लेने और छुट्टी के बाद घर तक छोड़ने आती हैं जबकि स्कूलों में इन बच्चों को कोई लाने ले जाने वाला नहीं है। बच्चों को दलिया और पंजीरी भी नहीं मिल रही। स्कूलों के अध्यापक भले ही इन बच्चों को मिड डे मील का भोजन दे रहे हैं लेकिन न तो शिक्षा विभाग इन बच्चों के लिए मिड डे मील का राशन भेज रहा और न ही छोटे बच्चे इसे खाना पसंद कर रहे हैं।
विज्ञापन

गवर्नमेंट टीचर यूनियन के प्रधान भगवंत भठेजा का कहना है कि कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने से इंकार कर रहे हैं। प्राइमरी स्कूलों में पहले ही बच्चों के बैठने के लिए व्यवस्था नहीं है लेकिन अब इन छोटे बच्चों को भी बड़ों के साथ बैठाना पड़ता है। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। भठेजा ने बताया कि अब तक पूरे जिले के 8 ब्लॉकों में 6000 बच्चों के दाखिले हुए हैं लेकिन इन छोटे बच्चों की देखभाल में बड़े बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका परीक्षा परिणाम पर विपरीत असर पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ओपी जैन का कहना है कि सर्दी व धुंध के कारण छोटे बच्चों की संख्या कम हुई थी। इसे पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा वह शीघ्र ही ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा अधिकारियों से इसकी जांच करवाएंगे। तीन माह तक बच्चों की संख्या पूरी नहीं हुई तो सरकार को लिखित रूप से रिपोर्ट दी जाएगी।

आंगनबाड़ी सेंटरों में ही मिल सकता बच्चों को प्यार: छपड़ीवाल
ऑल इंडिया आंगनबाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन पंजाब एटक की प्रांतीय अध्यक्षा सरोज छपड़ीवाला का कहना है तीन वर्ष के बच्चे को उसकी मां से अलग करके आंगनवाड़ी सेंटरों तक लाना और वहां तीन घंटे तक उसकी देखभाल करने में बच्चे को मां जैसे प्यार की जरूरत होती है। आंगनबाड़ी हेल्पर सुबह बच्चों को घर से लाती और दोपहर को छुट्टी के बाद उन्हें घरों तक छोड़ने जाती थीं। इतना ही नहीं बच्चों को खाने-पीने और खिलौने देने का भी पूरा ध्यान रखा जाता। शिक्षा विभाग की ओर से जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले का दुष्परिणाम प्राइमरी बच्चों के परीक्षा परिणाम पर देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के वादे अनुसार अगर 28 नवंबर तक शिक्षा विभाग ने उन्हें न्याय नहीं दिया तो वह आरपार के संघर्ष की रूपरेखा तैयार करेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed