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बारदाना कॉलोनी के लोगों ने ठाना पानी नहीं तो वोट नहीं
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चंडीगढ़। पीने के पानी की समस्या से परेशान सेक्टर 26 स्थित बारदाना कॉलोनी के लोगों ने शनिवार को हंगामा किया। लोगों का कहना है पीने का पानी भी पास के शौचालय से लेकर आना पड़ता है। स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ में ऐसी अव्यवस्थाएं शहर के विकास की गंभीरता को दर्शाती हैं। लोगों ने ‘नेताजी शर्म करो’ के बैनर के साथ ही खाली बर्तन लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि कई बार नगर निगम केअधिकारियों से कहा गया कि पीने के पानी की समस्या है, लेकिन न जनप्रतिनिधि सुनते हैं और न अधिकारी। हम भी इसी क्षेत्र के निवासी हैं और हर बार वोट भी देते हैं, लेकिन इस बार जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार कर रहे हैं। क्योंकि जो सांसद हमारी बात न सुने और समस्याओं का निराकरण न कर सके, उसे वोट देने का क्या फायदा। इस बार केवल नोटा ही दबाएंगे। शुद्ध पानी देने का दावा करने वाले एक बार यहां आकर देखें क्या हाल है। शौचालय में सुबह और शाम केवल पीने के पानी के लिए लाइन लगती है। कहने को तो स्मार्ट सिटी में रहते हैं, लेकिन यहां के हालात काफी खराब हैं। बड़ी बात यह है कि जब अपनी समस्याओं पर आवाज उठाओ तो अधिकारी कॉलोनी को अवैध बताने लगते हैं।
कनेक्शन न लेने का बहाना बनाने वाले लगाएं जुर्माना
लोगों का कहना है कि जब कोई पीने के पानी की समस्या के बारे में पूछता है तो नगर निगम केअधिकारी कहते हैं कि वहां कोई कनेक्शन नहीं लेता। लोगों को पानी का कनेक्शन देने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि लोग कनेक्शन नहीं लेते हैं तो उन पर जुर्माना लगाएं, लेकिन बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेना कहां तक ठीक है।
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किसी ने समस्या बताई ही नहीं
क्षेत्रीय पार्षद दिलीप शर्मा का कहना है कि बारदाना कॉलोनी के लोग कभी समस्या बताने आए ही नहीं। जब कोई समस्या बताने नहीं आएगा तो हम कैसे उनकी समस्याएं सुनेंगे। रही बात कनेक्शन की तो लोग बिल भरने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में नगर निगम भी कैसे कनेक्शन दे सकती है।
लोगों से बातचीत
...................
बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शौचालय से लाया पानी पी रहे हैं। आखिर हमारे वोट का क्या महत्व है। ऐसा जीवन जीने के लिए यदि जनप्रतिनिधि चुनते हैं तो नहीं चाहिए ऐसे नेता।
-रामा देवी
सांसद हो, मेयर या फिर पार्षद सभी को हमारे वोट की जरूरत पड़ती है तो यहां चक्कर लगाते हैं, लेकिन काम निकलने के बाद कोई यहां देखने तक नहीं आता कि हम लोग किस हाल में हैं।
-सोमवती देवी
सुबह और शाम बच्चों को लेकर लाइन लगानी पड़ती है। दिनभर के लिए पानी इकट्ठा करना जैसे हमारी दिनचर्या हो गई है। आखिर जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं यह दिखता।
-विमला देवी
नेताओं और अधिकारियों की आपसी खींचतान में लगभग 15 साल पहले यहां से पाइप लाइन निकाल दी गई। अब दोनों हमें दोषी ठहराते हैं। आखिर हमारा क्या कसूर है।
अनवारा
इस बार बस तय कर लिया है कि नोटा ही दबाऊंगा। चुनाव के समय हमारे सामने खड़े रहने वाले नेता कभी मुश्किल घड़ी में यहां देखने तक नहीं आए। अब हम भी वैसा ही करेंगे।
-जबार सिंह
आज का प्रदर्शन केवल चेतावनी है। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अब पानी के लिए लाइन लगाना भी शामिल हो गया है, लेकिन अब नेताओं को वोट बिल्कुल नहीं। नोटा ही दबाएंगे।
-निजामुद्दीन
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प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि कई बार नगर निगम केअधिकारियों से कहा गया कि पीने के पानी की समस्या है, लेकिन न जनप्रतिनिधि सुनते हैं और न अधिकारी। हम भी इसी क्षेत्र के निवासी हैं और हर बार वोट भी देते हैं, लेकिन इस बार जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार कर रहे हैं। क्योंकि जो सांसद हमारी बात न सुने और समस्याओं का निराकरण न कर सके, उसे वोट देने का क्या फायदा। इस बार केवल नोटा ही दबाएंगे। शुद्ध पानी देने का दावा करने वाले एक बार यहां आकर देखें क्या हाल है। शौचालय में सुबह और शाम केवल पीने के पानी के लिए लाइन लगती है। कहने को तो स्मार्ट सिटी में रहते हैं, लेकिन यहां के हालात काफी खराब हैं। बड़ी बात यह है कि जब अपनी समस्याओं पर आवाज उठाओ तो अधिकारी कॉलोनी को अवैध बताने लगते हैं।
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कनेक्शन न लेने का बहाना बनाने वाले लगाएं जुर्माना
लोगों का कहना है कि जब कोई पीने के पानी की समस्या के बारे में पूछता है तो नगर निगम केअधिकारी कहते हैं कि वहां कोई कनेक्शन नहीं लेता। लोगों को पानी का कनेक्शन देने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि लोग कनेक्शन नहीं लेते हैं तो उन पर जुर्माना लगाएं, लेकिन बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेना कहां तक ठीक है।
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किसी ने समस्या बताई ही नहीं
क्षेत्रीय पार्षद दिलीप शर्मा का कहना है कि बारदाना कॉलोनी के लोग कभी समस्या बताने आए ही नहीं। जब कोई समस्या बताने नहीं आएगा तो हम कैसे उनकी समस्याएं सुनेंगे। रही बात कनेक्शन की तो लोग बिल भरने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में नगर निगम भी कैसे कनेक्शन दे सकती है।
लोगों से बातचीत
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बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शौचालय से लाया पानी पी रहे हैं। आखिर हमारे वोट का क्या महत्व है। ऐसा जीवन जीने के लिए यदि जनप्रतिनिधि चुनते हैं तो नहीं चाहिए ऐसे नेता।
-रामा देवी
सांसद हो, मेयर या फिर पार्षद सभी को हमारे वोट की जरूरत पड़ती है तो यहां चक्कर लगाते हैं, लेकिन काम निकलने के बाद कोई यहां देखने तक नहीं आता कि हम लोग किस हाल में हैं।
-सोमवती देवी
सुबह और शाम बच्चों को लेकर लाइन लगानी पड़ती है। दिनभर के लिए पानी इकट्ठा करना जैसे हमारी दिनचर्या हो गई है। आखिर जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं यह दिखता।
-विमला देवी
नेताओं और अधिकारियों की आपसी खींचतान में लगभग 15 साल पहले यहां से पाइप लाइन निकाल दी गई। अब दोनों हमें दोषी ठहराते हैं। आखिर हमारा क्या कसूर है।
अनवारा
इस बार बस तय कर लिया है कि नोटा ही दबाऊंगा। चुनाव के समय हमारे सामने खड़े रहने वाले नेता कभी मुश्किल घड़ी में यहां देखने तक नहीं आए। अब हम भी वैसा ही करेंगे।
-जबार सिंह
आज का प्रदर्शन केवल चेतावनी है। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अब पानी के लिए लाइन लगाना भी शामिल हो गया है, लेकिन अब नेताओं को वोट बिल्कुल नहीं। नोटा ही दबाएंगे।
-निजामुद्दीन