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अमृतसर2
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चीफ खालसा दिवान में 15 साल के बाद आणखी गुप का कब्जा
प्रधान सहित पांच पदों पर उम्मीदवार जीते
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। 15 साल के संघर्ष के बाद भाग सिंह आणखी ग्रुप ने चीफ खालसा दिवान पर दोबारा कब्जा कर लिया। रविवार को हुए चुनाव में आणखी ग्रुप ने 6 में से पांच पदों पर चरणजीत सिंह चड्ढा ग्रुप को करारी हार दी। आणखी ग्रुप के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार ठेकेदार निर्मल सिंह ने चड्ढा ग्रुप के सरबजीत सिंह को 33 मतों से पराजित कर दिया। आणखी ग्रुप के रेजिडेंट प्रेजिडेंट पद के उमीदवार सुखदेव सिंह मत्तेवाल विजेता घोषित किए गए। उपाध्यक्ष पद के लिए आणखी ग्रुप के अमरजीत सिंह विक्रांत और डॉ. इंदरजीत सिंह निज्जर भी चुनाव जीत गए। मानक सचिव पद के लिए आणखी ग्रुप के पूर्व विधायक सविंदर सिंह कथुंगल और सुरिंदर सिंह रूमालेवाले को भी जीत मिली।
रविवार सुबह 10 बजे वोटिंग शुरू हुई। 400 सदस्यों ने वोट डाला। इनमें से चार वोट रद्द हो गए। चुनाव अधिकारी प्रो. बलजिंदर सिंह ने मत डालने के एक घंटे बाद चुनाव का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिवान के संविधान के अनुसार कोई भी पतित महिला वोट नहीं डाल सकती। इसके बावजूद जब उन्होंने पतित महिलाओं को वोट डालने के लिए रोका तो वहां मौजूद उम्मीदवारों ने उन्हें यह कह मतदान करने की आज्ञा देने का दबाव डाला कि इनको मतदान का अधिकार देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दिवान के संविधान के विरुद्ध है। जब उनसे यह पूछा गया कि कई पतित पुरुषों ने भी मतदान किया है, तो उन्होंने कहा कि इन पतित मतदाताओं से छह महीने के भीतर अमृत छकने का एफिडेविट लिया जाना था।
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प्रधान सहित पांच पदों पर उम्मीदवार जीते
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। 15 साल के संघर्ष के बाद भाग सिंह आणखी ग्रुप ने चीफ खालसा दिवान पर दोबारा कब्जा कर लिया। रविवार को हुए चुनाव में आणखी ग्रुप ने 6 में से पांच पदों पर चरणजीत सिंह चड्ढा ग्रुप को करारी हार दी। आणखी ग्रुप के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार ठेकेदार निर्मल सिंह ने चड्ढा ग्रुप के सरबजीत सिंह को 33 मतों से पराजित कर दिया। आणखी ग्रुप के रेजिडेंट प्रेजिडेंट पद के उमीदवार सुखदेव सिंह मत्तेवाल विजेता घोषित किए गए। उपाध्यक्ष पद के लिए आणखी ग्रुप के अमरजीत सिंह विक्रांत और डॉ. इंदरजीत सिंह निज्जर भी चुनाव जीत गए। मानक सचिव पद के लिए आणखी ग्रुप के पूर्व विधायक सविंदर सिंह कथुंगल और सुरिंदर सिंह रूमालेवाले को भी जीत मिली।
रविवार सुबह 10 बजे वोटिंग शुरू हुई। 400 सदस्यों ने वोट डाला। इनमें से चार वोट रद्द हो गए। चुनाव अधिकारी प्रो. बलजिंदर सिंह ने मत डालने के एक घंटे बाद चुनाव का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिवान के संविधान के अनुसार कोई भी पतित महिला वोट नहीं डाल सकती। इसके बावजूद जब उन्होंने पतित महिलाओं को वोट डालने के लिए रोका तो वहां मौजूद उम्मीदवारों ने उन्हें यह कह मतदान करने की आज्ञा देने का दबाव डाला कि इनको मतदान का अधिकार देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दिवान के संविधान के विरुद्ध है। जब उनसे यह पूछा गया कि कई पतित पुरुषों ने भी मतदान किया है, तो उन्होंने कहा कि इन पतित मतदाताओं से छह महीने के भीतर अमृत छकने का एफिडेविट लिया जाना था।
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