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एयरपोर्ट की खास खबर
Updated Thu, 13 Dec 2018 02:00 AM IST
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एयरपोर्ट पर 20 से पहले 1200 मीटर की विजिबिलिटी
कैट-1 आईएलएस का फ्लाइट चार्ट दिल्ली भेजा
चार्ट तैयार होते ही एयरफोर्स करेगी फाइनल कैलिब्रेशन
दीपक शाही
जीरकपुर। 20 दिसंबर से पहले चंडीगढ़ के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कैट-1 से 1200 मीटर की विजिबिलिटी मिलेगी। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) को प्रॉसेस में लाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। फ्लाइट किस रास्ते से आकर आईएलएस करेगा, इसका चार्ट दिल्ली की एक कंपनी को भेजा गया है। एयरफोर्स के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस सप्ताह तक फ्लाइट का चार्ट तैयार हो जाएगा। उसके बाद फाइनल कैलिब्रेशन की प्रक्रिया शुरू होगी। बता दें कि आईएलएस नहीं होने के चलते अभी 2500 मीटर की विजिबिलिटी पर एयरक्राफ्ट ऑपरेट हो रहे हैं।
1200 मीटर की विजिबिलिटी मिलेगी
दो दिसंबर को नेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने आईएलएस का कैलिब्रेशन चेक किया। इस दौरान जांचा गया कि सरफेस से एयरक्राफ्ट को सही सिग्नल मिल रहा है या नहीं। वहीं, पांच और छह दिसंबर को एयरफोर्स की एजेंसी ने इंस्ट्रूमेंट प्रोसिजर डिजाइन सेल आईपीडीएस से असेसमेंट किया गया। अब चार्ट तैयार होते ही एयरफोर्स की ओर से फाइनल कैलिब्रेशन किया जाएगा। यहां से ग्रीन सिग्नल मिलते ही कैट-1 से 1200 मीटर की विजिबिलिटी मिलेगी। उसके बाद सिविल उड़ानों के लिए आईएलएस को ओपन कर दिया जाएगा।
क्या है आईएलएस
आईएलएस सवा तीन डिग्री की एक रेखा जैसा दिखता है। आईएलएस का ग्लाइड पाथ सिग्नल भेजता है और जहाज उसी सिग्नल को फॉलो करता हुआ चलता है। जितना बेहतर आईएलएस कैट-1, 2, 3 होगा। उतने जमीन के करीब तक फ्लाइट के सिग्नल की इंटीग्रिटी अच्छी रहती और फ्लाइट नीचे तक आता है। इसके दो कंपोनेंट होते हैं, पहला लोकलाइज और दूसरा ग्लाइड पाथ। लोकलाइज दाएं और बाएं जाने में मदद करता है, वहीं ग्लाइड पाथ जहाज को ऊपर से नीचे आने में मदद करता है।
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नवंबर 2019 तक मिलेगी 100 मीटर की विजिबिलिटी
नवंबर 2019 तक चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयपोर्ट पर कैट-थ्री बी आईएलएस लग जाएगा ताकि 24 घंटे आपरेशन के दौरान एयरलाइंस को विजिबिलटी मिल सके और कोई दिक्कत न आए। इस आईएलएस के लगने के बाद सर्दियों में 100 मीटर की विजिबिलिटी में फ्लाइट ऑपरेट होंगी। इसकी पुष्टि सीईओ सुनील दत्त ने की।
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कैट-1 आईएलएस का फ्लाइट चार्ट दिल्ली भेजा
चार्ट तैयार होते ही एयरफोर्स करेगी फाइनल कैलिब्रेशन
दीपक शाही
जीरकपुर। 20 दिसंबर से पहले चंडीगढ़ के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कैट-1 से 1200 मीटर की विजिबिलिटी मिलेगी। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) को प्रॉसेस में लाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। फ्लाइट किस रास्ते से आकर आईएलएस करेगा, इसका चार्ट दिल्ली की एक कंपनी को भेजा गया है। एयरफोर्स के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस सप्ताह तक फ्लाइट का चार्ट तैयार हो जाएगा। उसके बाद फाइनल कैलिब्रेशन की प्रक्रिया शुरू होगी। बता दें कि आईएलएस नहीं होने के चलते अभी 2500 मीटर की विजिबिलिटी पर एयरक्राफ्ट ऑपरेट हो रहे हैं।
1200 मीटर की विजिबिलिटी मिलेगी
दो दिसंबर को नेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने आईएलएस का कैलिब्रेशन चेक किया। इस दौरान जांचा गया कि सरफेस से एयरक्राफ्ट को सही सिग्नल मिल रहा है या नहीं। वहीं, पांच और छह दिसंबर को एयरफोर्स की एजेंसी ने इंस्ट्रूमेंट प्रोसिजर डिजाइन सेल आईपीडीएस से असेसमेंट किया गया। अब चार्ट तैयार होते ही एयरफोर्स की ओर से फाइनल कैलिब्रेशन किया जाएगा। यहां से ग्रीन सिग्नल मिलते ही कैट-1 से 1200 मीटर की विजिबिलिटी मिलेगी। उसके बाद सिविल उड़ानों के लिए आईएलएस को ओपन कर दिया जाएगा।
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क्या है आईएलएस
आईएलएस सवा तीन डिग्री की एक रेखा जैसा दिखता है। आईएलएस का ग्लाइड पाथ सिग्नल भेजता है और जहाज उसी सिग्नल को फॉलो करता हुआ चलता है। जितना बेहतर आईएलएस कैट-1, 2, 3 होगा। उतने जमीन के करीब तक फ्लाइट के सिग्नल की इंटीग्रिटी अच्छी रहती और फ्लाइट नीचे तक आता है। इसके दो कंपोनेंट होते हैं, पहला लोकलाइज और दूसरा ग्लाइड पाथ। लोकलाइज दाएं और बाएं जाने में मदद करता है, वहीं ग्लाइड पाथ जहाज को ऊपर से नीचे आने में मदद करता है।
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नवंबर 2019 तक मिलेगी 100 मीटर की विजिबिलिटी
नवंबर 2019 तक चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयपोर्ट पर कैट-थ्री बी आईएलएस लग जाएगा ताकि 24 घंटे आपरेशन के दौरान एयरलाइंस को विजिबिलटी मिल सके और कोई दिक्कत न आए। इस आईएलएस के लगने के बाद सर्दियों में 100 मीटर की विजिबिलिटी में फ्लाइट ऑपरेट होंगी। इसकी पुष्टि सीईओ सुनील दत्त ने की।