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बबला की सजा पर फैसला टला

Sun, 01 Apr 2018 01:40 AM IST
Updated Sun, 01 Apr 2018 01:40 AM IST
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बबला की सजा पर फैसला टला
बचाव पक्ष की दलील के बाद अदालत ने टाला फैसला
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कल सुनाई जाएगी बबला को सजा
- सेक्टर-26 सब्जी मंडी में नौ साल पुराने टीन शेड अलॉटमेंट घोटाले का मामला
- बबला ने बेटे की शादी और 30 साल का करियर खत्म होने जाने की दी दलील देते हुए नरमी की अपील की
- 84 साल के पिता और दोनों बेटे भी रहे अदालत में मौजूद
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
सेक्टर-26 सब्जी मंडी में टीन शेड अलॉटमेंट घोटाले के नौ साल पुराने मामले में दोषी करार वर्तमान कांग्रेस पार्षद और मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन दविंदर सिंह बबला की सजा पर फैसला सोमवार तक टल गया है। जिला अदालत ने बबला को मंगलवार को दोषी करार दिया था।
शनिवार को जिला अदालत की ओर से सजा सुनाई जानी थी, लेकिन बचाव पक्ष ने दलील दी कि सीआरपीसी की धारा 386 के तहत जब स्टेट आपराधिक मामले में किसी आदेश के खिलाफ अपील दायर करता है तो एडीजे कोर्ट की पावर भी ट्रायल कोर्ट के समान हो जाती है। इस तरह अदालत इस मामले में बबला को तीन साल से अधिक सजा नहीं सुना सकती। इस पर अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले में पक्ष रखने को कहा तो सरकारी वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांग लिया। इसके बाद अदालत ने फैसला सोमवार तक के लिए टाल दिया।
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इससे पहले बबला को सुबह करीब सवा 11 बजे अदालत में पेश किया गया। पेशी से पहले ही बबला के 84 साल के पिता, दोनों बेटों समेत कई समर्थक अदालत में पहुंच चुके थे। बबला ने अदालत से सजा सुनाए जाने से पहले नरमी की अपील की।
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बबला ने अदालत से कहा कि वह 2016 से कांग्रेस पार्षद हैं, उनकी पत्नी भी नगर निगम काउंसलर रह चुकी है। उनके दोनों बेटे एमबीए हैं और अब एक बेटा वकील है। बबला ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। जिस मामले में दोषी करार दिया गया, उसमें मार्केट कमेटी के प्रधान के पास वह अथॉरिटी ही नहीं होती है कि वह किसी को शेड अलॉट कर सके। वह केवल प्रपोजल बनाकर मेयर और डीसी को भेजता है, अंतिम फैसला उनके स्तर पर होता है।
उन पर आरोप है कि अपने चहेतों को शेड अलॉट किए, लेकिन ऐसा किया होता तो उसके बाद चुनाव नहीं हारते। इसके बावजूद धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। उसमें दोषी पाए जाने पर एक साल के प्रोबेशन पर छोड़ा गया। इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी, क्योंकि ऐसा कोई अपराध ही नहीं किया। बबला ने कहा कि एडीसी के खिलाफ आवाज उठाने के बदले में तीन केस दर्ज हुए। हालांकि, इनमें से दो में वह बरी हो चुके हैं।
बबला ने कहा कि यह सब राजनीतिक रंजिश के तहत किया गया है। वह पिछले 30 साल से शहर के लोगों की सेवा कर रहे हैं। उनके 84 साल के पिता हार्ट पेशेंट हैं। उन्हें छोटे बेटे की शादी करानी है। इस मामले में अगर उन्हें सजा हुई तो उनका 30 साल का राजनीतिक करियर समाप्त हो जाएगा और उनके परिवार की प्रतिष्ठा भी समाप्त हो जाएगी।

बता दें कि अदालत ने बबला को जुलाई 2009 में शेड अलॉटमेंट नीलामी में अनियमितताएं बरतते हुए 59 लोगों की जगह 69 लोगों को शेड अलॉट करने के मामले में 27 मार्च को दोषी करार दिया था। बबला को अदालत ने जाली कागजात के आधार पर चहेतों को 10 शेड अतिरिक्त अलॉट करने का दोषी पाया था।
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