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कर्जा माफी: हरियाणा में किसान आंदोलन की तैयारी
Updated Fri, 30 Jun 2017 01:35 AM IST
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कर्ज माफी : हरियाणा में किसान आंदोलन की तैयारी
- दो जुलाई को जींद में होगी किसान-मजदूर महापंचायत, तैयार होगी रणनीति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अखिल भारतीय किसान महासभा हरियाणा में कर्ज माफी को लेकर बड़ा आंदोलन करेगी। चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में महासभा के प्रदेश महासचिव फूल सिंह श्योकंद, प्रदेशाध्यक्ष मास्टर शेर सिंह व सदस्य महेंद्र सिंह ने बताया कि इस आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए दो जुलाई को जींद की पंजाबी धर्मशाला में किसान-मजदूर महापंचायत बुलाई गई है। इस महापंचायत में किसानों के साथ-साथ खेतों में काम करने वाले मजदूरों को भी बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि किसान को समृद्ध बनाना है तो कर्जा माफी कोई स्थायी हल नहीं है। लेकिन एक बार तो सरकार किसानों को कर्जे के बोझ से उबारे, ताकि वे दबाव में आकर आत्महत्याएं न करें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को धान, कपास, सरसों, सूरजमुखी की फसलों का पूरा समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। बासमती धान का तो समर्थन मूल्य ही तय नहीं है। जबकि सब्जियाें और फलाें का समर्थन मूल्य नहीं है और न ही आसानी से बाजार उपलब्ध हैं। फसल बीमा भी बिना किसान की अनुमति के जबरन किए जा रहे हैं और उनके खातों से प्रीमियम की किस्त काटी जा रही है। जबकि फसल बीमा का मूल्यांकन आधार भी गांव और ब्लॉक में होने वाली प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बादी को बनाया गया है, मगरकिसान सभा मांग करती है कि इसका आधार किसान की एक एकड़ फसल की बर्बादी को बनाया जाए। किसान नेताओं के अनुसार, दो जुलाई को आंदोलन की रणनीति तय हो जाएगी, उसके बाद किसान सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ेगा।
गौरतलब है कि पंजाब, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में राज्य सरकारों की ओर से किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की जा चुकी है।
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- दो जुलाई को जींद में होगी किसान-मजदूर महापंचायत, तैयार होगी रणनीति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अखिल भारतीय किसान महासभा हरियाणा में कर्ज माफी को लेकर बड़ा आंदोलन करेगी। चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में महासभा के प्रदेश महासचिव फूल सिंह श्योकंद, प्रदेशाध्यक्ष मास्टर शेर सिंह व सदस्य महेंद्र सिंह ने बताया कि इस आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए दो जुलाई को जींद की पंजाबी धर्मशाला में किसान-मजदूर महापंचायत बुलाई गई है। इस महापंचायत में किसानों के साथ-साथ खेतों में काम करने वाले मजदूरों को भी बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि किसान को समृद्ध बनाना है तो कर्जा माफी कोई स्थायी हल नहीं है। लेकिन एक बार तो सरकार किसानों को कर्जे के बोझ से उबारे, ताकि वे दबाव में आकर आत्महत्याएं न करें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को धान, कपास, सरसों, सूरजमुखी की फसलों का पूरा समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। बासमती धान का तो समर्थन मूल्य ही तय नहीं है। जबकि सब्जियाें और फलाें का समर्थन मूल्य नहीं है और न ही आसानी से बाजार उपलब्ध हैं। फसल बीमा भी बिना किसान की अनुमति के जबरन किए जा रहे हैं और उनके खातों से प्रीमियम की किस्त काटी जा रही है। जबकि फसल बीमा का मूल्यांकन आधार भी गांव और ब्लॉक में होने वाली प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बादी को बनाया गया है, मगरकिसान सभा मांग करती है कि इसका आधार किसान की एक एकड़ फसल की बर्बादी को बनाया जाए। किसान नेताओं के अनुसार, दो जुलाई को आंदोलन की रणनीति तय हो जाएगी, उसके बाद किसान सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ेगा।
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गौरतलब है कि पंजाब, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में राज्य सरकारों की ओर से किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की जा चुकी है।