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तिरंगे को बाहों में जकड़े टकटकी लगाए शहीद पति की चिता को देखती रहीं आरती

Sat, 02 Mar 2019 01:35 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Sat, 02 Mar 2019 01:35 AM IST
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तिरंगे को बाहों में जकड़े टकटकी लगाए शहीद पति की चिता को देखती रहीं आरती
सभी केंद्रों के ध्यानार्थ (साइड स्टोरी)
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तिरंगे को बांहों में जकड़े टकटकी लगाए शहीद पति की चिता को देखती रहीं आरती
पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों ने पत्नी आरती को किया सैल्यूट
रिशु राज सिंह
चंडीगढ़। जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ का पूरे सैन्य सम्मान के साथ सेक्टर-25 के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद सिद्धार्थ की पत्नी आरती पूरे समय तिरंगे को बांहों में जकड़े अपने पति की चिता को टकटकी लगाए देखती रहीं। परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी, नेता, ऑफिसर सभी आकर ढांढस बंधा रहे थे, लेकिन आरती की नजर सिर्फ और सिर्फ चिता पर लेटे अपने पति पर थी। पिता द्वारा अपने जवान बेटे को मुखाग्नि देते देख स्क्वाड्रन लीडर आरती के सब्र का बांध टूट गया और वह फूट-फूटकर रोने लगीं। आरती को रोता देख सभी की आंखों में आंसू आ गए। आरती भोपाल की रहने वाली हैं। उनका दो साल का बेटा है, जिसका नाम अंगद है। 20 फरवरी को ही सिद्धार्थ और आरती ने बेटे का दूसरा जन्मदिन मनाया था।
स्क्वाड्रन लीडर आरती की हिम्मत और जज्बे को देख सब दंग थे। जिस मजबूती से वे खुद को संभाल रही थीं यह देखकर पैरामिलिट्री फोर्स के जवान उनके पास गए और सभी ने एक साथ उन्हें सैल्यूट किया। आरती की बहादुरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वीरवार को जब शहीद सिद्धार्थ का पार्थिव शरीर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा तो उनकी पत्नी फुल ड्रेस में पूरे साहस के साथ वहां पहुंची। यह देखकर वहां मौजूद हर शख्स के आंखों में आंसू आ गए थे। शहीद सिद्धार्थ की अंतिम यात्रा में उनके पैतृक गांव हमीदपुर (नारायणगढ़, जिला अंबाला) से भी लोग पहुंचे थे।
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केरल में बचाई थी हजारों की जान, 26 जनवरी को हुए थे सम्मानित
सिद्धार्थ 2010 में वायुसेना में शामिल हुए थे। पिछले साल केरल में आई बाढ़ के दौरान बचाव अभियान में उनकी भूमिका काफी अहम रही थी। सिद्धार्थ ने हजारों लोगों की जान बचाई थी जिसके लिए उन्हें 26 जनवरी को सम्मानित भी किया गया था। शहीद सिद्धार्थ अपने बैच में बेस्ट थे। उनके पिता ने बताया कि वह किसी भी ऑपरेशन के लिए हमेशा तैयार रहते थे और खुशी-खुशी जाते थे। उन्होंने बताया कि देशप्रेम का जज्बा तो पूरे परिवार में ही है। चार पीढ़ियों से वे देश की रक्षा करते आए हैं। सिद्धार्थ से पहले मामा विनित भारद्वाज ठीक 17 साल पहले 25 फरवरी को मिग 21 के क्रैश होने से शहीद हो गए थे।
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