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अब बेजुबान को पहले करेंगे बेहोश

Tue, 12 Feb 2019 02:07 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Tue, 12 Feb 2019 02:07 AM IST
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अब बेजुबान को पहले करेंगे बेहोश
अब जंगल से शहर में आने वाले जानवरों को पहले करेंगे बेहोश, फिर पकड़ेंगे
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सबहेड
कुछ समय पहले सेक्टर-22 में सांभर की मौत होने की घटना के बाद लिया गया फैसला

वन्य कर्मियों को दिया जाएगा ट्रेंकुलाइजर गन चलाने का प्रशिक्षण

अनुभव अवस्थी
चंडीगढ़। जंगल से भटककर शहर में आने वाले जानवरों को पकड़ने के लिए वन्य कर्मी अब नया तरीका अपनाएंगे। इन जानवरों को पहले बेहोश किया गया जाएगा, उसके बाद उन्हें पकड़कर हाइड्रोलिक वाहन के सहारे जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके लिए वन्यकर्मियों को विशेष तौर पर ट्रेंड किया जाएगा। यह निर्णय उस घटना के बाद लिया गया है, जिसमें सेक्ट -22 में घुसे एक सांभर की मौत हो गई थी। मौत का कारण सांभर को पकड़ने के दौरान आई चोटें और सदमे को बताया गया था। जांच में यह भी सामने आया था कि सांभर को पकड़ने का वन्यकर्मियों की ओर से जो तरीका अपनाया गया था, वह बेजुबानों के लिए उपयुक्त नहीं था। सांभर करीब दो घंटे तक चंडीगढ़ की सड़कों में भटकता रहा था। जब तक वन्यकर्मियों ने उसे पकड़ा, तब तक वह बुरी तरह से घायल हो गया था। इसके बाद उसकी मौत हो गई थी।
अब जंगल से शहर में आने वाले जानवरों को पकड़ने के लिए जाल डालने की बजाए उन्हें ट्रेंकुलाइजर गन की मदद से बेहोश किया जाएगा। उसके बाद उन्हें हाइड्रोलिक वाहन की मदद से उठाकर जंगल में छोड़ा जाएगा। विभाग के पास गन भी है, लेकिन इसे चलाने का अनुभव किसी के पास न होने पर इसे चलाने के लिए छतबीड़ जृू के प्रशिक्षित स्टाफ और देहरादून के वाइल्ड लाइफ सेंचूरी के अनुभवी ट्रेनरों की मदद से यहां के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।
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तीन सालों में 20 से ज्यादा जानवर तोड़ चुके हैं दम
वन विभाग के जंगलों से निकलकर सेक्टर की ओर भागने के चलते कई जानवर दम तोड़ रहे हैं। पिछले तीन साल के आंकड़ों पर विश्वास करें तो अब तक 20 से अधिक सांभर दम तोड़ चुके हैं। सांभरों को मरने से बचाने बचाने के लिए प्रशासन के वन व वन्य प्राणी विभाग के अफसरों ने एक विशेष योजना को तैयार कर ली है।
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हाईकोर्ट भी ले चुका है संज्ञान
पिछले दिनों रॉक गार्डन के पास एक वाहन के टकराने से सांभर गंभीर रूप से घायल हो गया था। वेटरनरी हास्पिटल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई थी। इस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर चंडीगढ़ प्रशासन व वाइल्ड लाइफ विभाग को नोटिस देकर जवाब मांगा था। उसके बाद वाइल्ड लाइफ ने फारेस्ट एरिया में फेंसिंग लगाने का काम शुरू कर दिया है। चंडीगढ़ के जंगलों में सांभर, बारहसिंघा और नीलगाय काफी संख्या में है। पानी की तलाश में ये सड़कों की ओर काफी तेजी से भागते हैं। इससे सांभर और वाहन चालक दोनों को खतरा रहता है।


प्रशिक्षण की तैयारियां पूरी
इस संदर्भ में वन विभाग के डिप्टी वन संरक्षक अब्दुल कयाम ने बताया कि वह वन विभाग के कर्मचारियों की ओर से शहर में जंगल से भटक कर आ जाने पर उन्हें पकड़ने के लिए जाल डालने की बजाए उन्हें ट्रेंकुलाइजर गन से सीधे बेहोशी का इंजेक्शन देकर उसे बाद में हाइड्रोलिक वाहन की मदद से जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षण की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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