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तीन दिन भूख हड़ताल पर, नहीं मिलने आए अधिकारी
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फोटो समाचार
तीन दिन भूख हड़ताल पर, नहीं मिलने आए अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। समान काम, समान वेतन की मांग पर एनएचएम के कार्यकर्ता तीन दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन उनसे मिलने चंडीगढ़ प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। शनिवार को भी गेट मीटिंग हुई। इस दौरान फैसला लिया गया कि अपनी मांग को लेकर वे आगे भी प्रदर्शन करते रहेंगे। 18 फरवरी को दिल्ली प्रदर्शन का कार्यक्रम स्थगित हो गया है। अब 22 फरवरी को लोग दिल्ली जाएंगे। एनएचएम की भूख हड़ताल को कई यूनियन ने समर्थन किया है।
एनएचएम कर्मियों का कहना है कि काम सभी का बराबर है, लेकिन वेतन में भेदभाव किया जा रहा है। एनएचएम कर्मियों को मात्र दस हजार रुपये मिलते हैं, जबकि डीसी रेट पर आउटसोर्स नर्सेज को 25 हजार और स्टाफ नर्स को 60 हजार। ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है? दस हजार में घर चलाना मुश्किल हो गया है। साल 2016 से इस संघर्ष की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन आज तक न तो चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई बातचीत की गई और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से। अब 22 फरवरी को ही अगली रणनीति बनाई जाएगी।
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तीन दिन भूख हड़ताल पर, नहीं मिलने आए अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। समान काम, समान वेतन की मांग पर एनएचएम के कार्यकर्ता तीन दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन उनसे मिलने चंडीगढ़ प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। शनिवार को भी गेट मीटिंग हुई। इस दौरान फैसला लिया गया कि अपनी मांग को लेकर वे आगे भी प्रदर्शन करते रहेंगे। 18 फरवरी को दिल्ली प्रदर्शन का कार्यक्रम स्थगित हो गया है। अब 22 फरवरी को लोग दिल्ली जाएंगे। एनएचएम की भूख हड़ताल को कई यूनियन ने समर्थन किया है।
एनएचएम कर्मियों का कहना है कि काम सभी का बराबर है, लेकिन वेतन में भेदभाव किया जा रहा है। एनएचएम कर्मियों को मात्र दस हजार रुपये मिलते हैं, जबकि डीसी रेट पर आउटसोर्स नर्सेज को 25 हजार और स्टाफ नर्स को 60 हजार। ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है? दस हजार में घर चलाना मुश्किल हो गया है। साल 2016 से इस संघर्ष की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन आज तक न तो चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई बातचीत की गई और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से। अब 22 फरवरी को ही अगली रणनीति बनाई जाएगी।
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