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एक ही दिन में खत्म हो गई विपक्ष की एकजुटता
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:16 AM IST
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एक दिन में ही खत्म हो गई विपक्ष की एकजुटता
अकालियों के साथ वेल में नहीं गए आप विधायक
अकालियों के जाने के बाद आप नेता पहुंचे वेल में
वीरवार की तसवीरें सोशल मीडिया पर हुईं वायरल
अकालियों से दोस्ती से कैडर हुआ नाराज
जिसके बाद बैकफुट पर आया आप नेतृत्व
अखिल तलवार
चंडीगढ़।
विधानसभा में विपक्ष की एकजुटता ज्यादा समय तक नहीं चली। एक दिन मेंही दोस्ती खत्म हो गई। शुक्रवार को बजट सत्र के अंतिम दिन आम आदमी पार्टी ने अपने रवैये से साफ संदेश दिया कि वह शिअद-भाजपा गठबंधन के साथ नहीं है।
विपक्ष की एकजुटता स्पीकर के तीखे तेवर के बाद शुरू हुई थी। वीरवार को जब स्पीकर ने आप के सभी विधायकों को सस्पेंड कर दिया, मार्शल ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया। शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल उन्हें वापस सदन में ले आए। यह सुखबीर की सोच-समझी रणनीति थी, उन्हें पता था कि क्या होना है और वही हुआ। दोबारा मार्शल ने आप विधायकों को बाहर निकाला। इस जद्दोजहद में एक नेता की दस्तार गिरी और शिअद ने इसे ही मुद्दा बना लिया। सुखबीर और बिक्रम मजीठिया, आप के धरने में पहुंचे, फिर दोनों पार्टियों के नेता इकट्ठे अस्पताल में दाखिल विधायकों को देखने और पगड़ी देने गए। आप के एचएस फूलका, कंवर संधू और अमन अरोड़ा, सुखबीर की गाड़ी में गए। इनके साथ-साथ अस्पताल में आप और शिअद नेताओं की इकट्ठी तस्वीरें वायरल हो गईं। सोशल मीडिया पर कैंपेन चलने लगी। आप के ग्रासरूट स्तर पर कैडर ने इस पर बड़ी नाराजगी जताई। वर्करों का कहना था कि जिस अकाली दल के खिलाफ लड़कर यहां तक आए हैं, आज शीर्ष नेताओं ने उसी के साथ दोस्ती कर ली। वर्करों का कहना था कि आप नेता सुखबीर के जाल में फंस गए और उन्हें समझ भी नहीं रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पूरे पंजाब से इस तरह का फीडबैक आने के बाद आप नेतृत्व ने नए सिरे से मंथन किया। जिसके बाद यह फैसला किया गया कि शिअद-भाजपा के साथ एकजुटता दिखाने का नुकसान हो सकता है। इसलिए शुक्रवार को आप विधायकों ने शिअद के साथ वाकआउट नहीं किया। पर सिर्फ पांच ही मिनट बाद कर दिया।
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हमारे एक सदस्य की पगड़ी सदन में गिर गई थी, जिसे देने शिअद नेता आए थे। उन्हें इंकार कैसे किया जा सकता था। वहीं, वाकआउट अलग करने पर कोई सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। दस्तार के मुद्दे पर बेशक शिअद ने हमारा समर्थन किया है। लेकिन शिअद के साथ पंजाब के मुद्दों पर एकजुटता का सवाल ही नहीं उठता।
- अमन अरोड़ा, सह-प्रधान, आम आदमी पार्टी, पंजाब।
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अकालियों के साथ वेल में नहीं गए आप विधायक
अकालियों के जाने के बाद आप नेता पहुंचे वेल में
वीरवार की तसवीरें सोशल मीडिया पर हुईं वायरल
अकालियों से दोस्ती से कैडर हुआ नाराज
जिसके बाद बैकफुट पर आया आप नेतृत्व
अखिल तलवार
चंडीगढ़।
विधानसभा में विपक्ष की एकजुटता ज्यादा समय तक नहीं चली। एक दिन मेंही दोस्ती खत्म हो गई। शुक्रवार को बजट सत्र के अंतिम दिन आम आदमी पार्टी ने अपने रवैये से साफ संदेश दिया कि वह शिअद-भाजपा गठबंधन के साथ नहीं है।
विपक्ष की एकजुटता स्पीकर के तीखे तेवर के बाद शुरू हुई थी। वीरवार को जब स्पीकर ने आप के सभी विधायकों को सस्पेंड कर दिया, मार्शल ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया। शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल उन्हें वापस सदन में ले आए। यह सुखबीर की सोच-समझी रणनीति थी, उन्हें पता था कि क्या होना है और वही हुआ। दोबारा मार्शल ने आप विधायकों को बाहर निकाला। इस जद्दोजहद में एक नेता की दस्तार गिरी और शिअद ने इसे ही मुद्दा बना लिया। सुखबीर और बिक्रम मजीठिया, आप के धरने में पहुंचे, फिर दोनों पार्टियों के नेता इकट्ठे अस्पताल में दाखिल विधायकों को देखने और पगड़ी देने गए। आप के एचएस फूलका, कंवर संधू और अमन अरोड़ा, सुखबीर की गाड़ी में गए। इनके साथ-साथ अस्पताल में आप और शिअद नेताओं की इकट्ठी तस्वीरें वायरल हो गईं। सोशल मीडिया पर कैंपेन चलने लगी। आप के ग्रासरूट स्तर पर कैडर ने इस पर बड़ी नाराजगी जताई। वर्करों का कहना था कि जिस अकाली दल के खिलाफ लड़कर यहां तक आए हैं, आज शीर्ष नेताओं ने उसी के साथ दोस्ती कर ली। वर्करों का कहना था कि आप नेता सुखबीर के जाल में फंस गए और उन्हें समझ भी नहीं रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक, पूरे पंजाब से इस तरह का फीडबैक आने के बाद आप नेतृत्व ने नए सिरे से मंथन किया। जिसके बाद यह फैसला किया गया कि शिअद-भाजपा के साथ एकजुटता दिखाने का नुकसान हो सकता है। इसलिए शुक्रवार को आप विधायकों ने शिअद के साथ वाकआउट नहीं किया। पर सिर्फ पांच ही मिनट बाद कर दिया।
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हमारे एक सदस्य की पगड़ी सदन में गिर गई थी, जिसे देने शिअद नेता आए थे। उन्हें इंकार कैसे किया जा सकता था। वहीं, वाकआउट अलग करने पर कोई सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। दस्तार के मुद्दे पर बेशक शिअद ने हमारा समर्थन किया है। लेकिन शिअद के साथ पंजाब के मुद्दों पर एकजुटता का सवाल ही नहीं उठता।
- अमन अरोड़ा, सह-प्रधान, आम आदमी पार्टी, पंजाब।