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ज्ञान सागर कॉलेज विवाद मामला
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:32 AM IST
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ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज विवाद
छात्रों को अन्य कॉलेजों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया को चुनौती
- देश भगत यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग ने दी प्रक्रिया को चुनौती
- कहा, सरकार ने कुछ चुनिंदा कॉलेजों को ही चुना
- काउंसलिंग के लिए विभाग को न चुनने को दी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज के करीब 1500 विद्यार्थियों को अन्य कॉलेजों में शिफ्ट करने के लिए की जा रही काउंसलिंग पर अब विवाद हो गया है। देश भगत यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से काउंसलिंग प्रक्रिया को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया है कि चल रही काउंसिलिंग वर्तमान याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर करेगी।
देश भगत यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से एडवोकेट अमन बंसल ने अदालत को बताया कि सिंगल बेंच ने दो जून को कॉलेज के करीब 1500 विद्यार्थियों को राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। पंजाब सरकार के अनुरोध पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) ने इन छात्रों को अन्य कॉलेजों में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी थी। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए थे कि दो दिन के भीतर इन छात्रों के दाखिले की काउंसलिंग शेड्यूल जारी करे और उसे वेबसाइट पर अपलोड करे। कंबाइंड एंट्रेंस टेस्ट की रैंकिंग के अनुसार ही छात्रों को दाखिला दिया जाए। अन्य कॉलेजों में दाखिले के समय यह सुनिश्चित किया जाए की वहां शिक्षक और विद्यार्थी के अनुपात में असंतुलन न हो जाए।
इसके बाद काउंसलिंग का दौर आरंभ हुआ। देश भगत यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से कहा गया कि काउंसलिंग में उन्हें भाग लेने नहीं दिया गया जबकि उनके पास इन छात्रों को एडजस्ट करने के लिए स्थान था। न केवल नर्सिंग बल्कि डेंटल और अन्य कोर्स के विद्यार्थियों को वे एडजस्ट कर सकते थे।
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हाईकोर्ट में जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता की बेंच ने याचिका पर पंजाब सरकार, बाबा फरीद यूृनिवर्सिटी व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जो भी काउंसलिंग हुई है वह इस याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर करेगी।
बता दें की शिक्षकों, पैरा-मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मियों को वेतन न मिलने के कारण एक फरवरी से ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज में बंद पड़ा है। वहां विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बंद है। इस मामले में राघव मित्तल सहित कुछ अन्य विद्यार्थियों ने एडवोकेट पुनीत गुप्ता के जरिये हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कॉलेज को सरकार द्वारा चलाये जाने या इन सभी छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट किये जाने की मांग की थी।
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छात्रों को अन्य कॉलेजों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया को चुनौती
- देश भगत यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग ने दी प्रक्रिया को चुनौती
- कहा, सरकार ने कुछ चुनिंदा कॉलेजों को ही चुना
- काउंसलिंग के लिए विभाग को न चुनने को दी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज के करीब 1500 विद्यार्थियों को अन्य कॉलेजों में शिफ्ट करने के लिए की जा रही काउंसलिंग पर अब विवाद हो गया है। देश भगत यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से काउंसलिंग प्रक्रिया को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया है कि चल रही काउंसिलिंग वर्तमान याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर करेगी।
देश भगत यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से एडवोकेट अमन बंसल ने अदालत को बताया कि सिंगल बेंच ने दो जून को कॉलेज के करीब 1500 विद्यार्थियों को राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। पंजाब सरकार के अनुरोध पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) ने इन छात्रों को अन्य कॉलेजों में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी थी। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए थे कि दो दिन के भीतर इन छात्रों के दाखिले की काउंसलिंग शेड्यूल जारी करे और उसे वेबसाइट पर अपलोड करे। कंबाइंड एंट्रेंस टेस्ट की रैंकिंग के अनुसार ही छात्रों को दाखिला दिया जाए। अन्य कॉलेजों में दाखिले के समय यह सुनिश्चित किया जाए की वहां शिक्षक और विद्यार्थी के अनुपात में असंतुलन न हो जाए।
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इसके बाद काउंसलिंग का दौर आरंभ हुआ। देश भगत यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से कहा गया कि काउंसलिंग में उन्हें भाग लेने नहीं दिया गया जबकि उनके पास इन छात्रों को एडजस्ट करने के लिए स्थान था। न केवल नर्सिंग बल्कि डेंटल और अन्य कोर्स के विद्यार्थियों को वे एडजस्ट कर सकते थे।
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हाईकोर्ट में जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता की बेंच ने याचिका पर पंजाब सरकार, बाबा फरीद यूृनिवर्सिटी व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जो भी काउंसलिंग हुई है वह इस याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर करेगी।
बता दें की शिक्षकों, पैरा-मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मियों को वेतन न मिलने के कारण एक फरवरी से ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज में बंद पड़ा है। वहां विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बंद है। इस मामले में राघव मित्तल सहित कुछ अन्य विद्यार्थियों ने एडवोकेट पुनीत गुप्ता के जरिये हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कॉलेज को सरकार द्वारा चलाये जाने या इन सभी छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट किये जाने की मांग की थी।