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कुंभ मेले में शहर के कलाकारों ने पेश किया नाटक नाहर सिंह की कहानी
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फोटो सहित
कुंभ मेले में सिटी ब्यूटीफुल के कलाकारों ने दिखाई राजा नाहर सिंह की वीरता
- इलाहाबाद में आयोजित कुंभ मेले में थियेटर फार थियेटर ग्रुप ने किया राजा नाहर सिंह की वीर गाथा का मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। थियेटर फार थियेटर ग्रुप चंडीगढ़ प्रयागराज में हो रहे कुंभ मेले के दौरान क्रांतिकारी राजा नाहर सिंह की वीर गाथा का मंचन कर बेहद खुश है। निर्देशक सुदेश शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक विभाग ने ग्रुप को आमंत्रित किया था। यह नाटक कुंभ मेले के सरस्वती मंच पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि गंगाघाट किनारे मंचित इस नाटक को हजारों दर्शकों ने बेहद उत्साह के साथ देखा। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले में एक तरफ जहां भगवत गीता का पाठ चल रहा था, वहीं दूसरी ओर राजा नाहर सिंह की वीर गथा का मंचन चल रहा था। यह अपनेआप में एक रोमांचक अनुभव था।
उन्होंने बताया कि नाटक राजा नाहर सिंह की वीर गाथा का मंचन एक घंटे 40 मिनट तक हुआ। इस दौरान दर्शकों में काफी उत्साह देखा गया। उन्होंने बताया कि बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह अग्रणी क्रांतिकारियों में थे जिन्होंने बहादुरशाह जफर को दिल्ली का शासक स्थापित करने और राजधानी की सुरक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी थी। राजा नाहर सिंह को 9 जनवरी 1858 में लाल किले के सामने चांदनी चौक में ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध विद्रोह के आरोप में फांसी पर लटकाया गया था। अमर शहीद राजा नाहर एक ऐसे योद्धा थे, जिससे पूरा अंग्रेजी साम्राज्य कांपता था और एक समय वह भी था जब बल्लभगढ़ के इस शेर ने बहादुरशाह जफर की गिरफ्तारी के बाद कुछ समय के लिए दिल्ली का शासन चलाया। राजा नाहर सिंह के साथ उनके विश्वस्त साथी गुलाब सिंह सैनी तथा भूरा सिंह को भी फांसी दी गई थी। राजा नाहर सिंह से अंग्रेज इतने भयभीत थे कि उन्होंने उनकी शहादत के बाद इस क्षेत्र से उनके स्मृति चिन्हों को ही उखाड़ना व समाप्त करने का प्रयास किया, बावजूद इसके वह उनकी हस्ती को मिटाने में सफल नहीं हो सके।
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कुंभ मेले में सिटी ब्यूटीफुल के कलाकारों ने दिखाई राजा नाहर सिंह की वीरता
- इलाहाबाद में आयोजित कुंभ मेले में थियेटर फार थियेटर ग्रुप ने किया राजा नाहर सिंह की वीर गाथा का मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। थियेटर फार थियेटर ग्रुप चंडीगढ़ प्रयागराज में हो रहे कुंभ मेले के दौरान क्रांतिकारी राजा नाहर सिंह की वीर गाथा का मंचन कर बेहद खुश है। निर्देशक सुदेश शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक विभाग ने ग्रुप को आमंत्रित किया था। यह नाटक कुंभ मेले के सरस्वती मंच पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि गंगाघाट किनारे मंचित इस नाटक को हजारों दर्शकों ने बेहद उत्साह के साथ देखा। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले में एक तरफ जहां भगवत गीता का पाठ चल रहा था, वहीं दूसरी ओर राजा नाहर सिंह की वीर गथा का मंचन चल रहा था। यह अपनेआप में एक रोमांचक अनुभव था।
उन्होंने बताया कि नाटक राजा नाहर सिंह की वीर गाथा का मंचन एक घंटे 40 मिनट तक हुआ। इस दौरान दर्शकों में काफी उत्साह देखा गया। उन्होंने बताया कि बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह अग्रणी क्रांतिकारियों में थे जिन्होंने बहादुरशाह जफर को दिल्ली का शासक स्थापित करने और राजधानी की सुरक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी थी। राजा नाहर सिंह को 9 जनवरी 1858 में लाल किले के सामने चांदनी चौक में ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध विद्रोह के आरोप में फांसी पर लटकाया गया था। अमर शहीद राजा नाहर एक ऐसे योद्धा थे, जिससे पूरा अंग्रेजी साम्राज्य कांपता था और एक समय वह भी था जब बल्लभगढ़ के इस शेर ने बहादुरशाह जफर की गिरफ्तारी के बाद कुछ समय के लिए दिल्ली का शासन चलाया। राजा नाहर सिंह के साथ उनके विश्वस्त साथी गुलाब सिंह सैनी तथा भूरा सिंह को भी फांसी दी गई थी। राजा नाहर सिंह से अंग्रेज इतने भयभीत थे कि उन्होंने उनकी शहादत के बाद इस क्षेत्र से उनके स्मृति चिन्हों को ही उखाड़ना व समाप्त करने का प्रयास किया, बावजूद इसके वह उनकी हस्ती को मिटाने में सफल नहीं हो सके।
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