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सीटीयू भर्ती घोटाला
Updated Wed, 14 Feb 2018 01:44 AM IST
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रोहतक के ध्यानार्थ:-
सीटीयू कंडक्टर भर्ती घोटाला : दो को 3-3 साल की जेल
- हरियाणा के सोनीपत निवासी मनोज और विकास को अदालत ने पाया दोषी
- पहले भी दो दोषियों को अदालत सुना चुकी है सजा
- सीबीआई ने कुल 9 लोगों को किया था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अक्तूबर 2010 में सामने आए सीटीयू कंडक्टर भर्ती परीक्षा धांधली के मामले में जिला अदालत ने दो लोगों को 3-3 साल की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में सोनीपत निवासी मनोज कुमार और विकास शामिल हैं। अदालत ने दोनों पर 15-15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। मनोज की जगह विकास को पेपर देते पकड़ा गया था। सीबीआई ने दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 466, 419, 471 के तहत केस दर्ज किया था।
3 अक्तूबर 2010 को सीबीआई ने सीटीयू कंडक्टर भर्ती परीक्षा में चल रही धांधली का पर्दाफाश किया था। भर्ती परीक्षा के दौरान सीबीआई ने सेक्टर-23 के मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छापेमारी की थी। यहां सीबीआई ने सोनीपत निवासी मनोज कुमार को स्कूल के बाहर घूमते पाया, जबकि वह भी परीक्षार्थी था। परीक्षा हाल में जाकर जांच करने पर मनोज की जगह पर विकास परीक्षा देते पकड़ा गया था।
इसके बाद सीबीआई ने जांच के आधार पर कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे भी शामिल थे और जिनकी जगह पेपर दे रहे थे वह भी। इनकी गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी ने हरियाणा, यूपी और बिहार में भी छापेमारी की थी। सीबीआई के अनुसार यह एक अंतरराज्यीय गिरोह था, जिसके तार अन्य भर्तियों या परीक्षाओं से भी जुड़े थे।
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मामले में सीबीआई ने सीबीआई कोर्ट में पांच अलग-अलग चार्जशीट दायर की थी। इनमें से एक मामले में दो लोगों को सजा सुनाई जा चुकी है, वहीं एक में अब फैसला आया है। वहीं तीन मामलों में अभी फैसला आना बाकी है।
बाक्स
2015 में दो को हुई थी छह-छह महीने की सजा
वर्ष 2010 में सीटीयू कंडक्टर भर्ती परीक्षा में पैसे लेकर दूसरे की जगह पेपर देते पकड़े गए मामले में सीजेएम कोर्ट ने दिसंबर 2015 में हिसार निवासी गजेंद्र वैरागी और अमित कुमार को 6-6 महीने की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर 2500-2500 रुपये जुर्माना लगाया था। सीबीआई ने दोनों को सेक्टर-23 स्थित मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में रेड के दौरान गिरफ्तार किया था। अमित कुमार गजेंद्र वैरागी की जगह पेपर दे रहा था। इसके बाद सीबीआई की एक टीम अमित को लेकर हिसार गई थी और अमित की निशानदेही पर गजेंद्र को गिरफ्तार किया था।
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सीटीयू कंडक्टर भर्ती घोटाला : दो को 3-3 साल की जेल
- हरियाणा के सोनीपत निवासी मनोज और विकास को अदालत ने पाया दोषी
- पहले भी दो दोषियों को अदालत सुना चुकी है सजा
- सीबीआई ने कुल 9 लोगों को किया था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अक्तूबर 2010 में सामने आए सीटीयू कंडक्टर भर्ती परीक्षा धांधली के मामले में जिला अदालत ने दो लोगों को 3-3 साल की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में सोनीपत निवासी मनोज कुमार और विकास शामिल हैं। अदालत ने दोनों पर 15-15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। मनोज की जगह विकास को पेपर देते पकड़ा गया था। सीबीआई ने दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 466, 419, 471 के तहत केस दर्ज किया था।
3 अक्तूबर 2010 को सीबीआई ने सीटीयू कंडक्टर भर्ती परीक्षा में चल रही धांधली का पर्दाफाश किया था। भर्ती परीक्षा के दौरान सीबीआई ने सेक्टर-23 के मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छापेमारी की थी। यहां सीबीआई ने सोनीपत निवासी मनोज कुमार को स्कूल के बाहर घूमते पाया, जबकि वह भी परीक्षार्थी था। परीक्षा हाल में जाकर जांच करने पर मनोज की जगह पर विकास परीक्षा देते पकड़ा गया था।
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इसके बाद सीबीआई ने जांच के आधार पर कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे भी शामिल थे और जिनकी जगह पेपर दे रहे थे वह भी। इनकी गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी ने हरियाणा, यूपी और बिहार में भी छापेमारी की थी। सीबीआई के अनुसार यह एक अंतरराज्यीय गिरोह था, जिसके तार अन्य भर्तियों या परीक्षाओं से भी जुड़े थे।
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मामले में सीबीआई ने सीबीआई कोर्ट में पांच अलग-अलग चार्जशीट दायर की थी। इनमें से एक मामले में दो लोगों को सजा सुनाई जा चुकी है, वहीं एक में अब फैसला आया है। वहीं तीन मामलों में अभी फैसला आना बाकी है।
बाक्स
2015 में दो को हुई थी छह-छह महीने की सजा
वर्ष 2010 में सीटीयू कंडक्टर भर्ती परीक्षा में पैसे लेकर दूसरे की जगह पेपर देते पकड़े गए मामले में सीजेएम कोर्ट ने दिसंबर 2015 में हिसार निवासी गजेंद्र वैरागी और अमित कुमार को 6-6 महीने की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर 2500-2500 रुपये जुर्माना लगाया था। सीबीआई ने दोनों को सेक्टर-23 स्थित मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में रेड के दौरान गिरफ्तार किया था। अमित कुमार गजेंद्र वैरागी की जगह पेपर दे रहा था। इसके बाद सीबीआई की एक टीम अमित को लेकर हिसार गई थी और अमित की निशानदेही पर गजेंद्र को गिरफ्तार किया था।