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Palwal News: 20 हजार रिश्वत लेते विजिलेंस ने एएसआई को दबोचा
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अकेड़ा थाने में तैनात है एएसआई, केस से दंपती का नाम हटाने के बदले ले रहा था रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) की गुरुग्राम टीम ने थाना अकेड़ा में तैनात सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) अशोक को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक मामले से शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी का नाम हटवाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। जिले में इससे पहले भी पुलिस, बिजली निगम, शिक्षा, पेंशन और अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो को शिकायत दी थी कि एएसआई ने एक मामले से उसका और उसकी पत्नी का नाम निकलवाने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर एसवी एंड एसीबी की टीम ने इंस्पेक्टर संत राम के नेतृत्व में जाल बिछाया। 12 अक्तूबर को टीम ने कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एएसआई अशोक को गिरफ्तार कर लिया।
इस संबंध में विजिलेंस अधीक्षक ममता खरब का कहना है कि पुलिस थाना एसवी एंड एसीबी, गुरुग्राम में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। कार्रवाई के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 105 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
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पहले भी कई मामलों में हो चुकी कार्रवाई
8 सितंबर: चार हजार रुपये की रिश्वत के मामले में एक होमगार्ड और सब इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया गया।
7 सितंबर: पुन्हाना थाना प्रभारी कुंदन को 50 हजार रुपये और शिक्षा विभाग के कर्मचारी साकिर को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने की जानकारी सामने आई।
25 अगस्त: पेंशन विभाग के डी-ग्रुप कर्मचारी मुकेश को नौ हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
5 अगस्त: बिजली निगम के कर्मचारी फारुख और सलमान को पांच हजार रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया।
29 अप्रैल: मंडी कार्यालय में लाइसेंस जारी करने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में मंडी सुपरवाइजर वेदपाल को 15,600 रुपये लेते गिरफ्तार किया गया, जबकि मंडी सचिव मनोज कुमार फरार हो गया।
26 फरवरी: समाज कल्याण विभाग के पेंशन विंग में कार्यरत कर्मचारी मुकेश को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
जून: डिप्टी सीएमओ डॉ. मनप्रीत सिंह को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। इसी महीने खेल विभाग के एक उप अधीक्षक को भी 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया।
लगातार कार्रवाई से सरकारी विभागों में चर्चा
एक के बाद एक सामने आ रहे रिश्वतखोरी के मामलों ने जिले के सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की चुनौती को उजागर किया है। ताजा मामले में पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी से यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि सरकारी सेवाओं और कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना कितना जरूरी है। हालांकि, सभी मामलों में आरोपियों के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) की गुरुग्राम टीम ने थाना अकेड़ा में तैनात सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) अशोक को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक मामले से शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी का नाम हटवाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। जिले में इससे पहले भी पुलिस, बिजली निगम, शिक्षा, पेंशन और अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो को शिकायत दी थी कि एएसआई ने एक मामले से उसका और उसकी पत्नी का नाम निकलवाने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर एसवी एंड एसीबी की टीम ने इंस्पेक्टर संत राम के नेतृत्व में जाल बिछाया। 12 अक्तूबर को टीम ने कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एएसआई अशोक को गिरफ्तार कर लिया।
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इस संबंध में विजिलेंस अधीक्षक ममता खरब का कहना है कि पुलिस थाना एसवी एंड एसीबी, गुरुग्राम में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। कार्रवाई के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 105 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
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पहले भी कई मामलों में हो चुकी कार्रवाई
8 सितंबर: चार हजार रुपये की रिश्वत के मामले में एक होमगार्ड और सब इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया गया।
7 सितंबर: पुन्हाना थाना प्रभारी कुंदन को 50 हजार रुपये और शिक्षा विभाग के कर्मचारी साकिर को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने की जानकारी सामने आई।
25 अगस्त: पेंशन विभाग के डी-ग्रुप कर्मचारी मुकेश को नौ हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
5 अगस्त: बिजली निगम के कर्मचारी फारुख और सलमान को पांच हजार रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया।
29 अप्रैल: मंडी कार्यालय में लाइसेंस जारी करने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में मंडी सुपरवाइजर वेदपाल को 15,600 रुपये लेते गिरफ्तार किया गया, जबकि मंडी सचिव मनोज कुमार फरार हो गया।
26 फरवरी: समाज कल्याण विभाग के पेंशन विंग में कार्यरत कर्मचारी मुकेश को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
जून: डिप्टी सीएमओ डॉ. मनप्रीत सिंह को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। इसी महीने खेल विभाग के एक उप अधीक्षक को भी 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया।
लगातार कार्रवाई से सरकारी विभागों में चर्चा
एक के बाद एक सामने आ रहे रिश्वतखोरी के मामलों ने जिले के सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की चुनौती को उजागर किया है। ताजा मामले में पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी से यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि सरकारी सेवाओं और कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना कितना जरूरी है। हालांकि, सभी मामलों में आरोपियों के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।