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किसानों के हत्यारों को संरक्षण दे रही उत्तर प्रदेश सरकार

Sat, 09 Oct 2021 10:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 09 Oct 2021 10:39 PM IST
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UP government accused of giving protection to killers of farmers
पलल के अटोहां चौक पर धरना देते किसान। - फोटो : Palwal
पलवल। नए कृषि कानूनों को निरस्त कराने की मांग के संबंध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहा किसानों का धरना शनिवार को भी जारी रहा। धरने की कमान भूडेर पाल के किसानों ने संभाली। किसानों ने लखीमपुर खीरी के नरसंहार की कड़े शब्दों में निंदा की। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए निर्णय की सराहना की और उत्तर प्रदेश सरकार पर किसानों के हत्यारों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही यूपी सरकार ने मंत्री के बेटे से पूछताछ की है। इसके लिए किसान सुप्रीम कोर्ट के आभारी हैं।
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किसान नेता मास्टर महेंदर सिंह चौहान ने कहा कि तालिबानी तरीके से किसानों को गाड़ियों से कुचलने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के हत्यारों को संरक्षण दिया। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख की वजह से सरकार को मजबूरी में सरकार को मंत्री अजय मिश्र के बेटे से पूछताछ करनी पड़ी है। सरकार लगातार सरकारी एजेंसियों को निजी हाथों में सौंप रही है। डॉ. रघुबीर सिंह ने कहा कि नए कृषि कानूनों से कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों और कारपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा। इससे ठेका खेती को बढ़ावा मिलेगा तथा इस व्यवस्था में किसानों को अभी तक कोई सुरक्षा नहीं दी गई है। ये तीनों कानून किसानों को बंधुआ मजदूरी की ओर धकेल देंगे। रूपराम तेवतिया ने कहा कि नए कानूनों से मंडी सिस्टम धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। मंडी समितियों का निजीकरण हो जाएगा। इसके कारण किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिलेगा, क्योंकि बाजार समितियां किसी इलाके तक सीमित नहीं रहेंगी। व्यापारी दूसरी जगह से अपना माल मंडी में डाल देंगे, जिससे स्थानीय किसान को अपनी फसल का निर्धारित रेट भी नहीं मिलेगा। चंद्रमुनि आर्य धतीर की अध्यक्षता में आयोजित धरने का संचालन राजकुमार ओहलियान ने किया। धरने में ताराचंद, राजेंद्र बैंसला, बाबूराम सरपंच, धनीराम थानेदार, नरेंद्र सहरावत, इंद्र सिंह रावत, रोशनलाल, समयराम, दिगंबर हताना, किशन चंद शर्मा ने भी विचार रखे।
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