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एमएसपी पर गारंटी कानून बनने तक धरना रहेगा जारी
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पलवल। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून सहित अन्य मांगों को पूरा करने तक किसान घर वापसी नहीं करेंगे। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर जारी किसान धरने में किसान संघर्ष समिति पलवल के नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शनिवार को सिंधू बॉर्डर पर आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया है। एमएसपी सहित अन्य मांगों पर सरकार द्वारा मांगे गए पांच किसान नेताओं के नाम भी तय कर लिए गए हैं। सरकार से बातचीत में पांच वरिष्ठ किसान नेता शिवकुमार कक्का, गुरुनाम सिंह चढूनी, युद्धवीर सिंह, बलवीर सिंह राजेवाल व अशोक धावले की कमेटी शामिल होगी।
किसान संघर्ष समिति पलवल के नेतृत्व में जारी किसान धरना शनिवार को भी जारी रहा। राजकुमार ओहलियान द्वारा संचालित धरने की अध्यक्षता बादाम सरपंच धतीर ने की। धरने को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि क्रूर व हिंसक सत्ता तभी डरती है, जब लोग उससे डरना बंद कर देते हैं। किसानों, मजदूरों व गरीब लोगों ने अब शासन सत्ता से डरना बंद कर दिया है। किसान मजदूरों ने भय को तिलांजलि दे दी है। बीते सात वर्षों में सत्ता ने इसी डर को कई तरीके से नागरिकों के अंदर पैदा कर दिया था। हरियाणा जैसे छोटे से प्रदेश में भी किसानों पर लगभग 48 हजार मुकदमे लाद दिए। हरियाणा और पंजाब का कोई घर नहीं बचा है जो इस संघर्ष में शामिल न हुआ हो। एक वर्ष के संघर्ष से निकले किसान ने नए किस्म के मनुष्य को जन्म दिया है, जिसने साधना भी की है तथा कष्ट भी सहन किए हैं।
धरने में किसान नेता उदयसिंह सरपंच, सोहनपाल चौहान, ताराचंद, रूपराम तेवतिया, बीधू सिंह, बीरसिंह मैंबर, गोरधन, ब्रह्म बोहरे, नारायण मास्टर, राजेंद्र सिंह, हुकम सिंह चौहान, शिवसिंह दरोगा, राजेंद्र बैंसला, जयदेव, रोशनलाल, जगदीश रावत, गोपी हवलदार, राजेंद्र घर्रोट व राकेश तंवर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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किसान शहीद समारक बनाने के लिए दिल्ली में मिले जगह
किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि किसान आंदोलन की आगामी रूपरेखा तय करने के लिए शनिवार को सिंधु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक की गई। बैठक में एमएसपी पर गारंटी कानून बनने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा आंदोलन में मरे किसानों को शहीद का दर्जा देने तथा दिल्ली में किसान शहीद स्मारक बनाने की जगह की मांग की गई। बैठक में कहा गया कि आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमों का वापस लेने तथा लखीमपुर खीरी हत्या कांड में दोषी मंत्री के खिलाफ कार्रवाई के बाद ही किसान घर वापसी करेंगे।
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किसान संघर्ष समिति पलवल के नेतृत्व में जारी किसान धरना शनिवार को भी जारी रहा। राजकुमार ओहलियान द्वारा संचालित धरने की अध्यक्षता बादाम सरपंच धतीर ने की। धरने को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि क्रूर व हिंसक सत्ता तभी डरती है, जब लोग उससे डरना बंद कर देते हैं। किसानों, मजदूरों व गरीब लोगों ने अब शासन सत्ता से डरना बंद कर दिया है। किसान मजदूरों ने भय को तिलांजलि दे दी है। बीते सात वर्षों में सत्ता ने इसी डर को कई तरीके से नागरिकों के अंदर पैदा कर दिया था। हरियाणा जैसे छोटे से प्रदेश में भी किसानों पर लगभग 48 हजार मुकदमे लाद दिए। हरियाणा और पंजाब का कोई घर नहीं बचा है जो इस संघर्ष में शामिल न हुआ हो। एक वर्ष के संघर्ष से निकले किसान ने नए किस्म के मनुष्य को जन्म दिया है, जिसने साधना भी की है तथा कष्ट भी सहन किए हैं।
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धरने में किसान नेता उदयसिंह सरपंच, सोहनपाल चौहान, ताराचंद, रूपराम तेवतिया, बीधू सिंह, बीरसिंह मैंबर, गोरधन, ब्रह्म बोहरे, नारायण मास्टर, राजेंद्र सिंह, हुकम सिंह चौहान, शिवसिंह दरोगा, राजेंद्र बैंसला, जयदेव, रोशनलाल, जगदीश रावत, गोपी हवलदार, राजेंद्र घर्रोट व राकेश तंवर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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किसान शहीद समारक बनाने के लिए दिल्ली में मिले जगह
किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि किसान आंदोलन की आगामी रूपरेखा तय करने के लिए शनिवार को सिंधु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक की गई। बैठक में एमएसपी पर गारंटी कानून बनने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा आंदोलन में मरे किसानों को शहीद का दर्जा देने तथा दिल्ली में किसान शहीद स्मारक बनाने की जगह की मांग की गई। बैठक में कहा गया कि आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमों का वापस लेने तथा लखीमपुर खीरी हत्या कांड में दोषी मंत्री के खिलाफ कार्रवाई के बाद ही किसान घर वापसी करेंगे।