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Palwal News: पेराई सत्र शुभारंभ के एक सप्ताह बाद ही बंद हुई सहकारी चीनी मिल
Thu, 23 Nov 2023 11:30 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
Updated Thu, 23 Nov 2023 11:30 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। गन्ना उत्पादक किसानों के लिए पलवल की सरकारी चीनी परेशानी का सबब बनी हुई है। क्षमता बढ़ाए जाने के बाद हर साल मिल में तकनीकी खामियां आनी शुरू हो जाती है। हालात यह हैं कि अब मिल को शुरू हुए एक सप्ताह ही बीता है कि मिल का मुख्य टरबाइन टूट गई, जिससे मिल का संचालन पूरी तरह से बंद हो गया। मिल में पहुंचे किसान तीन दिन से अपना गन्ना लिए इंतजार कर रहे हैं, परंतु मिल के चलने की अभी कोई उम्मीद नहीं है। मिल शुरू न होने की स्थिति में किसानों को पर्ची जारी करना बंद कर दिया गया है। ऐसे में जिन किसानों को गन्ना की कटाई कर ली है, उन्हें गन्ना सूखने का डर सताने लगा है।
दरअसल, बीती 15 नवंबर को प्रदेश सहकारिता मंत्री डॉ.बनवारी लाल ने चीनी मिल के पिराई सत्र का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान जिले के विधायकों के साथ तमाम अधिकारी मौजूद रहे सत्र के शुभारंभ पर 32 लाख क्विंटल टन गन्ने की पेराई का दावा किया गया। किसानों को किसी तरह की परेशानी न आने देने की बात कही गई। किसानों का पूरा गन्ना लेकर समय पर भुगतान करने का आश्वासन दिया गया, परंतु मिल शुरू होने के पहले सप्ताह में ही बंद हो गई, जिससे किसानों में खासा रोष है। किसान मिल का सही तरीके से मरम्मत न करने का आरोप लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि पेराई सत्र के दौरान हर साल मिल बार-बार बंद हो जाती है, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने के बाद आ रही है परेशानी
जानकारी के अनुसार साल 1983 के बाद साल 2019 में मिल की पेराई क्षमता बढ़ाई गई। पहले मिल की पेराई क्षमता 1600 टीसीडी थी, जिसे दो चरणों में बढाया जाना था। पहले चरण में पेराई क्षमता 1900 टीसीडी व दूसरे चरण में 2200 टीसीडी की जानी थी। बीते साल 2200 टीसीडी क्षमता पर मिल का संचालन शुरू किया गया, परंतु मिल की क्षमता बढ़ते ही तकनीकी खामियां आनी शुरू हो गई। अब हालात यह है कि पेराई सत्र के दौरान मिल की मशीनों में तकनीकी खामियां आ जाती हैं, जिसे बार-बार मिल बंद हो जाती है।
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मोटर के सहारे मिल को चलाने का प्रयास होगा
मिल के इंजीनियरों के अनुसार मिल की मशीनों को चलाने वाली मुख्य टरबाइन टूट गई है। नई टरबाइन मंगवाने में लंबा समय लगेगा। तब मिल के चलाने के लिए 600 एचपी की मोटर मंगवाई जा रही है, जिससे मिल को चलाने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रक्रिया में भी दो से तीन दिन का समय लगेगा। तब तक मिल से किसानों की पर्चियां जारी करनी बंद कर दी गई है। मिल के सुचारू होते ही किसानों को पर्चियां भेज दी जाएंगी।
मिल की मेंटेनेंस के नाम पर हर साल प्रबंधन द्वारा बड़ा घोटाला किया जाता है। यदि मिल की मेंटेनेंस सही तरीके से कर दी जाए तो तकनीकी खामियां नहीं आएंगी। अब एक सप्ताह के अंदर ही मिल की मुख्य टरबाइन टूट गई। अब नई टरबाइन आने में काफी समय लगेगा, तब तक किसान अपने गन्ने को लेकर बाहर खड़े रहेंगे।
- महेंद्र सिंह चौहान, किसान नेता
मिल प्रबंधन को तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। जो भी मशीनरी चाहिए, उसे मंगवाने के लिए कह दिया गया है। मिल को जल्द शुरू करा दिया जाएगा। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
दीपक मंगला, विधायक पलवल
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पलवल। गन्ना उत्पादक किसानों के लिए पलवल की सरकारी चीनी परेशानी का सबब बनी हुई है। क्षमता बढ़ाए जाने के बाद हर साल मिल में तकनीकी खामियां आनी शुरू हो जाती है। हालात यह हैं कि अब मिल को शुरू हुए एक सप्ताह ही बीता है कि मिल का मुख्य टरबाइन टूट गई, जिससे मिल का संचालन पूरी तरह से बंद हो गया। मिल में पहुंचे किसान तीन दिन से अपना गन्ना लिए इंतजार कर रहे हैं, परंतु मिल के चलने की अभी कोई उम्मीद नहीं है। मिल शुरू न होने की स्थिति में किसानों को पर्ची जारी करना बंद कर दिया गया है। ऐसे में जिन किसानों को गन्ना की कटाई कर ली है, उन्हें गन्ना सूखने का डर सताने लगा है।
दरअसल, बीती 15 नवंबर को प्रदेश सहकारिता मंत्री डॉ.बनवारी लाल ने चीनी मिल के पिराई सत्र का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान जिले के विधायकों के साथ तमाम अधिकारी मौजूद रहे सत्र के शुभारंभ पर 32 लाख क्विंटल टन गन्ने की पेराई का दावा किया गया। किसानों को किसी तरह की परेशानी न आने देने की बात कही गई। किसानों का पूरा गन्ना लेकर समय पर भुगतान करने का आश्वासन दिया गया, परंतु मिल शुरू होने के पहले सप्ताह में ही बंद हो गई, जिससे किसानों में खासा रोष है। किसान मिल का सही तरीके से मरम्मत न करने का आरोप लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि पेराई सत्र के दौरान हर साल मिल बार-बार बंद हो जाती है, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने के बाद आ रही है परेशानी
जानकारी के अनुसार साल 1983 के बाद साल 2019 में मिल की पेराई क्षमता बढ़ाई गई। पहले मिल की पेराई क्षमता 1600 टीसीडी थी, जिसे दो चरणों में बढाया जाना था। पहले चरण में पेराई क्षमता 1900 टीसीडी व दूसरे चरण में 2200 टीसीडी की जानी थी। बीते साल 2200 टीसीडी क्षमता पर मिल का संचालन शुरू किया गया, परंतु मिल की क्षमता बढ़ते ही तकनीकी खामियां आनी शुरू हो गई। अब हालात यह है कि पेराई सत्र के दौरान मिल की मशीनों में तकनीकी खामियां आ जाती हैं, जिसे बार-बार मिल बंद हो जाती है।
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मोटर के सहारे मिल को चलाने का प्रयास होगा
मिल के इंजीनियरों के अनुसार मिल की मशीनों को चलाने वाली मुख्य टरबाइन टूट गई है। नई टरबाइन मंगवाने में लंबा समय लगेगा। तब मिल के चलाने के लिए 600 एचपी की मोटर मंगवाई जा रही है, जिससे मिल को चलाने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रक्रिया में भी दो से तीन दिन का समय लगेगा। तब तक मिल से किसानों की पर्चियां जारी करनी बंद कर दी गई है। मिल के सुचारू होते ही किसानों को पर्चियां भेज दी जाएंगी।
मिल की मेंटेनेंस के नाम पर हर साल प्रबंधन द्वारा बड़ा घोटाला किया जाता है। यदि मिल की मेंटेनेंस सही तरीके से कर दी जाए तो तकनीकी खामियां नहीं आएंगी। अब एक सप्ताह के अंदर ही मिल की मुख्य टरबाइन टूट गई। अब नई टरबाइन आने में काफी समय लगेगा, तब तक किसान अपने गन्ने को लेकर बाहर खड़े रहेंगे।
- महेंद्र सिंह चौहान, किसान नेता
मिल प्रबंधन को तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। जो भी मशीनरी चाहिए, उसे मंगवाने के लिए कह दिया गया है। मिल को जल्द शुरू करा दिया जाएगा। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
दीपक मंगला, विधायक पलवल