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100 वर्षीय मां को ब्रज 84 कोस परिक्रमा कराने के लिए बेटे बने श्रवण कुमार
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100 वर्षीय वृद्ध को ब्रज 84 कोस परिक्रमा कराने निकला परिवार।
- फोटो : ????
100 वर्षीय मां को ब्रज 84 कोस परिक्रमा कराने के लिए बेटे बने श्रवण कुमार
होडल। आज के युग में भी धरती पर श्रवण कुमार जैसे बेटे हैं, यह साबित कर दिया मथुरा के रहने वाले 60 वर्षीय जोगेंद्र सिंह व उनके भाई ज्वाला सिंह ने। जोगेंद्र और ज्वाला पिछले 15 दिनों से अपनी 100 वर्षीय मां इंद्रवती को पालकी में लेकर ब्रज 84 कोस परिक्रमा करा रहे हैं। इस मातृ भक्ति में जोगेंद्र की पत्नी श्यामवती व दो पुत्र भी सहयोग कर रहे हैं। चलने में लाचार मां अपने दोनों पुत्रों, पुत्रवधू और पोतों की सेवा से बेहद खुश हैं और भगवान श्रीकृष्ण से उनकी खुशहाली की कामना कर रही हैं। बृहस्पतिवार को जैसे ही यह परिवार परिक्रमा करता हुआ हरियाणा की सीमा में पलवल जिले में पहुंचा तो यात्रियों की सेवा में जुटे लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
दीपपुरम कॉलोनी, औरंगाबाद मथुरा निवासी जोगेंद्र ने बताया कि उनकी 100 वर्षीय मां इस बार ब्रज 84 कोस की परिक्रमा देना चाहती थी। मां की इच्छा के बारे में उन्होंने अपनी पत्नी और भाई से बात की तो वह भी परिक्रमा कराने पर तुरंत राजी हो गए। इतनी लंबी परिक्रमा मां पैदल कैसे देगी, यह सोचकर उन्होंने चारपाई से एक पालकी तैयार की। इसके बाद सभी ब्रज 84 कोस परिक्रमा पर निकल पड़े। जोगेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वे अपनी मां की इच्छा पूरी कर रहे हैं। वहीं श्यामवती का कहना है कि इंद्रवती उनकी सास नहीं मां है। उनकी सेवा करने के सुख को भगवान का आशीर्वाद मानती हैं। (संवाद)
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होडल। आज के युग में भी धरती पर श्रवण कुमार जैसे बेटे हैं, यह साबित कर दिया मथुरा के रहने वाले 60 वर्षीय जोगेंद्र सिंह व उनके भाई ज्वाला सिंह ने। जोगेंद्र और ज्वाला पिछले 15 दिनों से अपनी 100 वर्षीय मां इंद्रवती को पालकी में लेकर ब्रज 84 कोस परिक्रमा करा रहे हैं। इस मातृ भक्ति में जोगेंद्र की पत्नी श्यामवती व दो पुत्र भी सहयोग कर रहे हैं। चलने में लाचार मां अपने दोनों पुत्रों, पुत्रवधू और पोतों की सेवा से बेहद खुश हैं और भगवान श्रीकृष्ण से उनकी खुशहाली की कामना कर रही हैं। बृहस्पतिवार को जैसे ही यह परिवार परिक्रमा करता हुआ हरियाणा की सीमा में पलवल जिले में पहुंचा तो यात्रियों की सेवा में जुटे लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
दीपपुरम कॉलोनी, औरंगाबाद मथुरा निवासी जोगेंद्र ने बताया कि उनकी 100 वर्षीय मां इस बार ब्रज 84 कोस की परिक्रमा देना चाहती थी। मां की इच्छा के बारे में उन्होंने अपनी पत्नी और भाई से बात की तो वह भी परिक्रमा कराने पर तुरंत राजी हो गए। इतनी लंबी परिक्रमा मां पैदल कैसे देगी, यह सोचकर उन्होंने चारपाई से एक पालकी तैयार की। इसके बाद सभी ब्रज 84 कोस परिक्रमा पर निकल पड़े। जोगेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वे अपनी मां की इच्छा पूरी कर रहे हैं। वहीं श्यामवती का कहना है कि इंद्रवती उनकी सास नहीं मां है। उनकी सेवा करने के सुख को भगवान का आशीर्वाद मानती हैं। (संवाद)

वृद्ध महिला को लेकर परिक्रमा देते परिजन।- फोटो : Palwal
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