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Palwal News: स्वयं सहायता समूह ने बदली जिंदगी, कारोबार से पिंकी बनीं आत्मनिर्भर
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समूह से जुड़ने के बाद बढ़ा आत्मविश्वास, दूसरों को भी स्वरोजगार के लिए कर रहीं प्रेरित
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। फिरोजपुर झिरका खंड के गांव बसई मेव की चांद स्वयं सहायता समूह की सदस्य पिंकी ने जूते के कारोबार को आगे बढ़ाकर मिसाल कायम की है।
उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बैंकिंग सुविधाओं से जोड़कर आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। चांद स्वयं सहायता समूह को कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के तहत 8.50 लाख रुपये मिले, जिसका उपयोग महिलाओं ने कारोबार बढ़ाने में किया।
पिंकी ने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले वह जूते की एक छोटी दुकान पर काम करती थीं। बाद में समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर उन्होंने जूते का कारोबार शुरू किया। समूह ने बैंक से दो बार में कुल 4.50 लाख रुपये का ऋण लिया। मेहनत और बेहतर प्रबंधन से समूह का कुल लेन-देन अब करीब 12 से 13 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
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वर्तमान में छह महिलाएं दुकान संभाल रही हैं और माल खरीदने, बिक्री व हिसाब-किताब की जिम्मेदारी स्वयं निभाती हैं। पिंकी ने कहा कि समूह से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वह अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। फिरोजपुर झिरका खंड के गांव बसई मेव की चांद स्वयं सहायता समूह की सदस्य पिंकी ने जूते के कारोबार को आगे बढ़ाकर मिसाल कायम की है।
उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बैंकिंग सुविधाओं से जोड़कर आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। चांद स्वयं सहायता समूह को कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के तहत 8.50 लाख रुपये मिले, जिसका उपयोग महिलाओं ने कारोबार बढ़ाने में किया।
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पिंकी ने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले वह जूते की एक छोटी दुकान पर काम करती थीं। बाद में समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर उन्होंने जूते का कारोबार शुरू किया। समूह ने बैंक से दो बार में कुल 4.50 लाख रुपये का ऋण लिया। मेहनत और बेहतर प्रबंधन से समूह का कुल लेन-देन अब करीब 12 से 13 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
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वर्तमान में छह महिलाएं दुकान संभाल रही हैं और माल खरीदने, बिक्री व हिसाब-किताब की जिम्मेदारी स्वयं निभाती हैं। पिंकी ने कहा कि समूह से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वह अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।