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Palwal News: ग्रेट निकोबार में कटेगा जंगल, भरपाई को अरावली में लगेंगे 78 हजार पौधे
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78 हेक्टेयर में बसाया जाएगा नया जंगल
देश की सुरक्षा से जुड़े मेगा प्रोजेक्ट की एवज में हरियाणा के नूंह को मिली हरियाली की जिम्मेदारी
वन विभाग ने सिलखो-नूरपुर की पहाड़ियों का किया सर्वे
मोहम्मद शाहिद मेवाती
तावड़ू। अंडमान-निकोबार के ग्रेट निकोबार में देश की सामरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मेगा प्रोजेक्ट के लिए हजारों हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की योजना है। वन कटाई की भरपाई के लिए अब नूंह जिले के अरावली को चुना गया है। भारत सरकार के निर्देश पर जिले में पहले चरण में 78 हेक्टेयर अरावली पहाड़ी पर 78 हजार पौधे लगाकर नया जंगल विकसित किया जाएगा।
वन विभाग ने इसके लिए तावडू उपमंडल के अंतर्गत गांव सिलखो और नूरपुर के बीच अरावली पहाड़ी क्षेत्र में भूमि चिह्नित की है। 27 सितंबर को गुरुग्राम वन मंडल के अधिकारियों ने जिला वन अधिकारी प्रवीण कुमार, रेंजर देव कुमार और नूंह वन विभाग की टीम के साथ इस भूमि का निरीक्षण किया और इसे पौधरोपण के लिए उपयुक्त पाया।
गुरुग्राम वन मंडल के अधिकारी राजकुमार ने बताया कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत वन भूमि के डायवर्जन की क्षतिपूर्ति के रूप में देश के अलग-अलग राज्यों में पौधरोपण किया जाना है। इसी कड़ी में हरियाणा के नूंह जिले का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि एनसीआर क्षेत्र दिल्ली के सबसे नजदीक है और यहां वायु प्रदूषण की समस्या सबसे अधिक है। ऐसे में अरावली में किया गया पौधरोपण पूरे एनसीआर के पर्यावरण संतुलन के लिए फायदेमंद साबित होगा।अधिकारियों के मुताबिक, नूंह की इन पहाड़ियों में अभी पेड़-पौधों की काफी कमी है और बड़े हिस्से में पहाड़ खाली पड़े हैं। यहां अरावली की ही स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा ताकि अरावली का मूल पारिस्थितिकी तंत्र बना रहे और वन्य जीवों को भी नया आश्रय मिल सके। वन विभाग जल्द ही इस योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजेगा और इसके बाद बड़े स्तर पर पौधरोपण का कार्य शुरू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ ग्रेट निकोबार में होने वाली वन हानि की भरपाई होगी।
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देश की सुरक्षा से जुड़े मेगा प्रोजेक्ट की एवज में हरियाणा के नूंह को मिली हरियाली की जिम्मेदारी
वन विभाग ने सिलखो-नूरपुर की पहाड़ियों का किया सर्वे
मोहम्मद शाहिद मेवाती
तावड़ू। अंडमान-निकोबार के ग्रेट निकोबार में देश की सामरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मेगा प्रोजेक्ट के लिए हजारों हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की योजना है। वन कटाई की भरपाई के लिए अब नूंह जिले के अरावली को चुना गया है। भारत सरकार के निर्देश पर जिले में पहले चरण में 78 हेक्टेयर अरावली पहाड़ी पर 78 हजार पौधे लगाकर नया जंगल विकसित किया जाएगा।
वन विभाग ने इसके लिए तावडू उपमंडल के अंतर्गत गांव सिलखो और नूरपुर के बीच अरावली पहाड़ी क्षेत्र में भूमि चिह्नित की है। 27 सितंबर को गुरुग्राम वन मंडल के अधिकारियों ने जिला वन अधिकारी प्रवीण कुमार, रेंजर देव कुमार और नूंह वन विभाग की टीम के साथ इस भूमि का निरीक्षण किया और इसे पौधरोपण के लिए उपयुक्त पाया।
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गुरुग्राम वन मंडल के अधिकारी राजकुमार ने बताया कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत वन भूमि के डायवर्जन की क्षतिपूर्ति के रूप में देश के अलग-अलग राज्यों में पौधरोपण किया जाना है। इसी कड़ी में हरियाणा के नूंह जिले का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि एनसीआर क्षेत्र दिल्ली के सबसे नजदीक है और यहां वायु प्रदूषण की समस्या सबसे अधिक है। ऐसे में अरावली में किया गया पौधरोपण पूरे एनसीआर के पर्यावरण संतुलन के लिए फायदेमंद साबित होगा।अधिकारियों के मुताबिक, नूंह की इन पहाड़ियों में अभी पेड़-पौधों की काफी कमी है और बड़े हिस्से में पहाड़ खाली पड़े हैं। यहां अरावली की ही स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा ताकि अरावली का मूल पारिस्थितिकी तंत्र बना रहे और वन्य जीवों को भी नया आश्रय मिल सके। वन विभाग जल्द ही इस योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजेगा और इसके बाद बड़े स्तर पर पौधरोपण का कार्य शुरू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ ग्रेट निकोबार में होने वाली वन हानि की भरपाई होगी।
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