फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Palwal News ›   ramleela in palwal

वन जाने तो दो, धर्म ये निभाने तो दो

Sun, 06 Oct 2013 08:19 PM IST
अमर उजाला, पलवल
अमर उजाला, पलवल Updated Sun, 06 Oct 2013 08:19 PM IST
विज्ञापन
ramleela in palwal

जवाहर नगर कैंप सनातन धर्म मंदिर परिसर में चल रही रामलीला में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। राक्षसी ताड़का के वध के मंचन ने लोगों का खूब मनोरंजन किया।

विज्ञापन


ताड़का के आदेश पर मारीच गुरू विश्वामित्र को जंगल में यज्ञ नहीं करने देता। तिलमिलाते गुरू राजा दशरथ से मिलने अयोध्या नगरी जाते हैं। राजा दशरथ के समक्ष विश्वामित्र श्रीराम-लक्ष्मण को साथ वन में भेजने की मांग करते हैं, लेकिन पुत्र मोह में फंसे राजा दशरथ उन्हें मना करते हैं।
विज्ञापन


तब श्रीराम व लक्ष्मण एक गीत के माध्यम से अपने पिता से उन्हें वन जाने की अनुमति देने की प्रार्थना करते हैं और कहते है, दो आज्ञा पिता, वन जाने तो दो, हमें धर्म ये क्षत्रिय निभाने तो दो, क्षत्रिय के बेटे हैं, बुजदिल नहीं, लड़ाई के जौहर दिखाने तो दो।
विज्ञापन
विज्ञापन


गुरू वशिष्ठ के दखल देने पर राजा दशरथ दोनों राजकुमारों को विश्वामित्र के साथ भेजने को राजी हो जाते हैं।

ताड़का वध के बाद युद्ध में पहुंचता है मारीच
वन में विश्वामित्र श्रीराम-लक्ष्मण को ताड़का के बारे में बताते हैं। श्रीराम के हाथों ताड़का मारी जाती है और मारीच व सुबाहू श्रीराम से बदला लेने की ठान लेते हैं। छह दिन बाद मारीच सुबाहू के साथ श्रीराम से बदला लेने आ पहुंचते हैं और श्रीराम के तीखे बाणों से सुबाहू की मौत हो जाती हैं। तब मारीच कहता है, एक औरत को मारकर उछल रहा रण बीच, बचकर जाएगा कहां आ पहुंचा मारीच, आ पहुंचा मारीच संभल कर आगे कदम बढ़ाना, शायद तू जाने नहीं, जाने मुझे जमाना। इसके बाद श्रीराम मारीच को एक तीर ऐसा मारते है कि वो कोसों दूर जाकर गिरता हैं। गुरू विश्वामित्र का यज्ञ संपूर्ण होता है और वे श्रीराम को दिव्य अस्त्र प्रदान करते हैं। तभी राजा जनक का मंत्री उन्हें सीता स्वयंवर का निमंत्रण देता है और गुरू जी दोनों राजकुमार के साथ मिथिला नगरी के लिए रवाना हो जाते हैं।

टूटा शिव धनुष, गरजे परशुराम
राजा जनक के दरबार में शिव धनुष तोड़ने वाले से माता सीता का विवाह करने का प्रस्ताव रखा जाता है। लेकिन राजा जनक के दरबार में आया कोई भी राजा शिव धनुष को टस से मस नहीं कर पाता हैं। ऐेसे में श्रीराम धनुष तोड़ने के लिए आगे आते हैं।


धनुष के टूटते ही परशुराम गुस्से में जनक के दरबार में पहुंचते है। इस दौरान लक्ष्मण-परशुराम संवाद की सुंदर प्रस्तुति दी गई। बाद में श्रीराम परशुराम को समझाते हैं। परशुराम भगवान राम का दिव्य रूप देख उन्हें नमन करके लौट जाते हैं। श्रीराम और परशुराम के बीच हुए संवाद को देखकर दर्शक प्रसन्नता से तालियां बजाने लगे।

सीता स्वयंवर
शिव धनुष तोड़ने के प्रसंग और सीता स्वयंवर पूरा होने पर लोगों ने खुश होकर कन्यादान किया। धनुष टूटने के बाद सीता माता द्वारा भगवान श्रीराम को आधुनिक तरीके से चक्र पर खड़े होकर वर माला डालने के समय आसमान से फूलों की वर्षा ने सभी को भाव विभोर कर दिया।

वर माला का दृश्य देख दर्शक व आयोजक खुशी से फूले नहीं समाए, कन्यादान के लिए दर्शकों ने नोटों की वर्षा सी कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed