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Palwal News: तीन दिन में बढ़ा जिले में प्रदूषण का स्तर, एक्यूआई 278 तक पहुंचा
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-सड़क पर चलते समय हुई आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ
-कहीं कूड़ा, कहीं पराली तो रात को आतिशबाजी को मान रहे प्रदूषण का कारण
-उपायुक्त ने दिए अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण करने के उचित कदम उठाने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। जिले में पिछले तीन दिनों में प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ा है। प्रदूषण स्तर में एकाएक हो रही बढ़ोतरी से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। सड़क पर चलते समय आंख में अभी से जलन होने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली पर पटाखों के कारण यह स्तर काफी बढ़ जाएगा। शुक्रवार को प्रदूषण इतना अधिक था कि दोपहर तीन बजे तक आसमान में स्मॉग छाया रहा। सूरज निकलने के बावजूद प्रदूषण के कारण धूप नजर नहीं आई। पूरे दिन बादल छाए रहे। डॉक्टरों का कहना है कि यह मौसम बेहद खतरनाक है और इस मौसम में बढ़ रहे प्रदूषण से बचकर रहें।
278 नोट किया गया प्रदूषण का स्तर
प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर पीएम 25- 278 नोट किया गया, जबकि पीएम 10-198 नोट किया गया। जिससे लोगों की आंखों में जलन तथा नाक व मुंह से सांस लेने में दिक्कत रही। विशेषज्ञ इसका कारण धूल, कूड़ा जलाना, वाहनों से निकलने वाला धुआं तथा निर्माण कार्य को मान रहे हैं। एनजीटी के आदेशों के बावजूद जिले में पराली व कूड़ा तो रोजाना जलाया जा रहा है।
सैर करने वालों को हुई दिक्कत
सुबह के समय सैर करने वालों को अधिक प्रदूषण के कारण काफी दिक्कत हुई। सुबह के वक्त सैर करने वाले आत्माराम पालीवाल, जय सिंह, सुरेश चंद, रणवीर सिंह तथा मनमोहन का कहना था कि अन्य दिनों के मुकाबले प्रदूषण शुक्रवार सुबह अधिक था। सुबह सैर करते समय सांस लेना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने बताया कि आंखों में भी काफी जलन हो रही थी तथा सैर करते समय प्रदूषण का अहसास स्वयं ही हो रहा था। काफी देर तक धूप नहीं निकली, जबकि आसमान में सूरज साफ दिखाई दे रहा था।
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गंदगी से बढ़ रहा प्रदूषण
विशेषज्ञ महावीर मलिक तथा डॉ. राम प्रकाश का कहना है कि कूड़ा व पराली जलाने के अलावा दिवाली से पहले ही रोज रात को चलाई जा रही आतिशबाजी भी इस प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में कारगर है। प्रशासन को इन पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही सड़कों पर निर्माण सामग्री डालने वालों को हिदायत दी जाए कि वे पानी का छिड़काव करें तथा निर्माण सामग्री को ढककर रखें।
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जिला उपायुक्त नेहा सिंह ने जिले के अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण विभाग, नगर परिषद तथा राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के अलावा सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखें तथा उचित कार्रवाई करें।
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-कहीं कूड़ा, कहीं पराली तो रात को आतिशबाजी को मान रहे प्रदूषण का कारण
-उपायुक्त ने दिए अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण करने के उचित कदम उठाने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। जिले में पिछले तीन दिनों में प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ा है। प्रदूषण स्तर में एकाएक हो रही बढ़ोतरी से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। सड़क पर चलते समय आंख में अभी से जलन होने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली पर पटाखों के कारण यह स्तर काफी बढ़ जाएगा। शुक्रवार को प्रदूषण इतना अधिक था कि दोपहर तीन बजे तक आसमान में स्मॉग छाया रहा। सूरज निकलने के बावजूद प्रदूषण के कारण धूप नजर नहीं आई। पूरे दिन बादल छाए रहे। डॉक्टरों का कहना है कि यह मौसम बेहद खतरनाक है और इस मौसम में बढ़ रहे प्रदूषण से बचकर रहें।
278 नोट किया गया प्रदूषण का स्तर
प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर पीएम 25- 278 नोट किया गया, जबकि पीएम 10-198 नोट किया गया। जिससे लोगों की आंखों में जलन तथा नाक व मुंह से सांस लेने में दिक्कत रही। विशेषज्ञ इसका कारण धूल, कूड़ा जलाना, वाहनों से निकलने वाला धुआं तथा निर्माण कार्य को मान रहे हैं। एनजीटी के आदेशों के बावजूद जिले में पराली व कूड़ा तो रोजाना जलाया जा रहा है।
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सैर करने वालों को हुई दिक्कत
सुबह के समय सैर करने वालों को अधिक प्रदूषण के कारण काफी दिक्कत हुई। सुबह के वक्त सैर करने वाले आत्माराम पालीवाल, जय सिंह, सुरेश चंद, रणवीर सिंह तथा मनमोहन का कहना था कि अन्य दिनों के मुकाबले प्रदूषण शुक्रवार सुबह अधिक था। सुबह सैर करते समय सांस लेना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने बताया कि आंखों में भी काफी जलन हो रही थी तथा सैर करते समय प्रदूषण का अहसास स्वयं ही हो रहा था। काफी देर तक धूप नहीं निकली, जबकि आसमान में सूरज साफ दिखाई दे रहा था।
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गंदगी से बढ़ रहा प्रदूषण
विशेषज्ञ महावीर मलिक तथा डॉ. राम प्रकाश का कहना है कि कूड़ा व पराली जलाने के अलावा दिवाली से पहले ही रोज रात को चलाई जा रही आतिशबाजी भी इस प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में कारगर है। प्रशासन को इन पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही सड़कों पर निर्माण सामग्री डालने वालों को हिदायत दी जाए कि वे पानी का छिड़काव करें तथा निर्माण सामग्री को ढककर रखें।
जिला उपायुक्त नेहा सिंह ने जिले के अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण विभाग, नगर परिषद तथा राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के अलावा सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखें तथा उचित कार्रवाई करें।