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रसूलपुर की मांग को लेकर तीसरे दिन जारी रहा लोगों का धरना
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पलवल। रसूलपुर रेलवे फाटक पर निर्माणाधीन पुल के बंद पडे़ कार्य को शुरू करने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। निर्माण कार्य के नजदीक टैंट लगाकर धरना दे रहे लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पिछले चार साल में पुल का निर्माण कार्य केवल 50 प्रतिशत पूरा हुआ है। लोगों ने कहा कि आरओबी का निर्माण कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ तो रेल मार्ग बाधित किया जाएगा।
रसूलपुर फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज बनाने की शुरूआत 18 अक्टूबर 2018 को हुई थी। करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से आरओबी को 18 महीने में पूरा किया जाना था। एक साल 10 महीने की देरी से चल रहे निर्माण कार्य का अभी तक 50 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। फाटक बंद किया हुआ है और निर्माण कार्य के अधर में लटकने से 20 से अधिक गांवों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने आरओबी को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए केन्द्रीय मंत्री और अधिकारियों तक से गुहार की है। आरओबी कार्य पिछले लंबे समय से बंद पड़ा है। लोगों ने आरओबी निर्माण कार्य को शुरू करने और जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है।
धरना पर बैठे योगेंद्र सिंह डागर, जितेंद्र सिंह बैंसला, विरेंद्र सिंह, कुलदीप बैंसला, जगमोहन, प्रवीण और मेघराज ने बताया कि पुल के निर्माण के लिए पूरी सड़क को खोद कर गड्ढे बना दिए। हवा के साथ दिन धूल उड़ती रहती है। बारिश के मौसम में पानी के साथ मिट्टी बहकर घरों में आती है और हालत बद से बदतर हो जाते हैं। रसूलपुर फाटक के रास्ते जाने वाले गांव छज्जूनगर, लोहागढ, खेडला, बडौली, लुलवाडी, भवाना, कुशक, बिल्लोचपुर सहित 20 से अधिक गांवों के लोगों को आठ से 10 किलोमीटर का चक्कर काट कर पलवल आना पड़ता है।
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रसूलपुर फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज बनाने की शुरूआत 18 अक्टूबर 2018 को हुई थी। करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से आरओबी को 18 महीने में पूरा किया जाना था। एक साल 10 महीने की देरी से चल रहे निर्माण कार्य का अभी तक 50 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। फाटक बंद किया हुआ है और निर्माण कार्य के अधर में लटकने से 20 से अधिक गांवों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने आरओबी को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए केन्द्रीय मंत्री और अधिकारियों तक से गुहार की है। आरओबी कार्य पिछले लंबे समय से बंद पड़ा है। लोगों ने आरओबी निर्माण कार्य को शुरू करने और जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है।
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धरना पर बैठे योगेंद्र सिंह डागर, जितेंद्र सिंह बैंसला, विरेंद्र सिंह, कुलदीप बैंसला, जगमोहन, प्रवीण और मेघराज ने बताया कि पुल के निर्माण के लिए पूरी सड़क को खोद कर गड्ढे बना दिए। हवा के साथ दिन धूल उड़ती रहती है। बारिश के मौसम में पानी के साथ मिट्टी बहकर घरों में आती है और हालत बद से बदतर हो जाते हैं। रसूलपुर फाटक के रास्ते जाने वाले गांव छज्जूनगर, लोहागढ, खेडला, बडौली, लुलवाडी, भवाना, कुशक, बिल्लोचपुर सहित 20 से अधिक गांवों के लोगों को आठ से 10 किलोमीटर का चक्कर काट कर पलवल आना पड़ता है।
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