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मुस्लिम पिता-पुत्र की जोड़ी रक्तदान, टीकाकरण व जरूरतमंदों की सहायता कर कमा रही पुण्य
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पलवल। एक तरफ जहां मुस्लिम समाज के लोग रक्तदान, टीकाकरण से डरते हैं, वहीं पलवल में एक मुस्लिम परिवार ऐसा भी है, जो न सिर्फ स्वयं रक्तदान करता है, बल्कि लोगों को भी जागरूक करने में लगा रहता है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए भी अब तक दर्जनों टीकाकरण शिविर लगवा चुके हैं। परिवार ने कोरोना महामारी के पहले चरण में प्रवासी मजदूरों तथा जरूरतमंद लोगों को खाना पहुंचाने से लेकर कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीजों को खाना पहुंचाने तक का काम किया। इस परिवार के सदस्य तथा मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हाजी यूनुस अहमद तथा उनका पुत्र यासीर अहमद हर समय समाजसेवा के कार्यों में आगे नजर आते हैं। उन्हें मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी सम्मानित कर चुके हैं।
387 डेंगू के मरीजों को उपलब्ध कराई प्लेटलेट्स
हाल ही में जिले में फैले डेंगू से ग्रस्त मरीजों को दवाइयां तथा प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने के लिए हाजी यूनुस अहमद तथा उनका पुत्र यासीर अहमद पूरे प्रयासरत रहे। दोनों पिता-पुत्रों ने मिलकर जिले में करीब 387 लोगों को डेंगू से ग्रस्त होने पर प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई। यहां तक की स्वयं भी प्लेटलेट्स दान की।
पिता-10 बार तो पुत्र 17 बार कर चुका है रक्तदान
हाजी यूनुस जहां 10 बार रक्तदान कर चुके हैं, वहीं पुत्र यासीर भी अपने पिता के बताए मार्ग पर चलते हुए अब तक 19 बार रक्तदान कर चुका है। 22 वर्षीय यासीर 17 बार रक्तदान करने के अलावा दो बार प्लेटलेट्स दान कर चुका है। इतना ही नहीं अब तक ये करीब 20 टीकाकरण शिविर लगवा चुके हैं और एक दर्जन से अधिक रक्तदान शिविर लगवा चुके हैं।
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कोरोना में आक्सीजन की नहीं होने दी लोगों को कमी
कोरोना महामारी के दूसरे चरण में जब आक्सीजन की मारामारी हुई तो दोनों पिता-पुत्र आगे आए और अपने खर्चे पर आक्सीजन सिलेंडर तक खरीदकर लोगों को आक्सीजन उपलब्ध कराने का काम किया। इतना ही नहीं जहां भी उन्हें पता चला कि लोगों को आक्सीजन नहीं मिल रही है, प्रशासन से लड़कर तथा अपने बलबूते पर उनके घरों पर आक्सीजन पहुंचाने का काम किया।
एनजीएफ कोविड सेंटर की उठाई पूरी जिम्मेदारी
कोरोना से ग्रस्त मरीजों के लिए बनाए गए एनजीएफ कालेज में कोविड सेंटर की पूरी जिम्मेदारी इन दोनों पिता-पुत्रों ने उठाई। दोनों ने मिलकर कोविड केयर सेंटर में भर्ती करीब 200 मरीजों को रोजाना सुबह का नाश्ता और दोनों समय का खाना पहुंचाने का काम किया। इसके अलावा मुस्लिम समाज के युवाओं को साथ लेकर कोविड केयर सेंटर की साफ-सफाई, धुलाई से लेकर कोविड मरीजों के कपड़े धुलाई तक का काम किया। कोरोना से मरने वाले लोगों का श्मशान में जाकर अंतिम संस्कार तक कराया।
एक ही मंच पर किया गया दोनों को सम्मानित
उपायुक्त कृष्ण कुमार ने हाल ही में दोनों पिता-पुत्र को एक ही मंच पर सम्मानित किया। पिता हाजी यूनुस अहमद व पुत्र यासीर अहमद को स्मृति चिह्न व प्रमाण पत्र देकर उपायुक्त ने सम्मानित किया तथा उनकी समाज के प्रति इस तरह की भावना को देखकर सेल्यूट किया।
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387 डेंगू के मरीजों को उपलब्ध कराई प्लेटलेट्स
हाल ही में जिले में फैले डेंगू से ग्रस्त मरीजों को दवाइयां तथा प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने के लिए हाजी यूनुस अहमद तथा उनका पुत्र यासीर अहमद पूरे प्रयासरत रहे। दोनों पिता-पुत्रों ने मिलकर जिले में करीब 387 लोगों को डेंगू से ग्रस्त होने पर प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई। यहां तक की स्वयं भी प्लेटलेट्स दान की।
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पिता-10 बार तो पुत्र 17 बार कर चुका है रक्तदान
हाजी यूनुस जहां 10 बार रक्तदान कर चुके हैं, वहीं पुत्र यासीर भी अपने पिता के बताए मार्ग पर चलते हुए अब तक 19 बार रक्तदान कर चुका है। 22 वर्षीय यासीर 17 बार रक्तदान करने के अलावा दो बार प्लेटलेट्स दान कर चुका है। इतना ही नहीं अब तक ये करीब 20 टीकाकरण शिविर लगवा चुके हैं और एक दर्जन से अधिक रक्तदान शिविर लगवा चुके हैं।
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कोरोना में आक्सीजन की नहीं होने दी लोगों को कमी
कोरोना महामारी के दूसरे चरण में जब आक्सीजन की मारामारी हुई तो दोनों पिता-पुत्र आगे आए और अपने खर्चे पर आक्सीजन सिलेंडर तक खरीदकर लोगों को आक्सीजन उपलब्ध कराने का काम किया। इतना ही नहीं जहां भी उन्हें पता चला कि लोगों को आक्सीजन नहीं मिल रही है, प्रशासन से लड़कर तथा अपने बलबूते पर उनके घरों पर आक्सीजन पहुंचाने का काम किया।
एनजीएफ कोविड सेंटर की उठाई पूरी जिम्मेदारी
कोरोना से ग्रस्त मरीजों के लिए बनाए गए एनजीएफ कालेज में कोविड सेंटर की पूरी जिम्मेदारी इन दोनों पिता-पुत्रों ने उठाई। दोनों ने मिलकर कोविड केयर सेंटर में भर्ती करीब 200 मरीजों को रोजाना सुबह का नाश्ता और दोनों समय का खाना पहुंचाने का काम किया। इसके अलावा मुस्लिम समाज के युवाओं को साथ लेकर कोविड केयर सेंटर की साफ-सफाई, धुलाई से लेकर कोविड मरीजों के कपड़े धुलाई तक का काम किया। कोरोना से मरने वाले लोगों का श्मशान में जाकर अंतिम संस्कार तक कराया।
एक ही मंच पर किया गया दोनों को सम्मानित
उपायुक्त कृष्ण कुमार ने हाल ही में दोनों पिता-पुत्र को एक ही मंच पर सम्मानित किया। पिता हाजी यूनुस अहमद व पुत्र यासीर अहमद को स्मृति चिह्न व प्रमाण पत्र देकर उपायुक्त ने सम्मानित किया तथा उनकी समाज के प्रति इस तरह की भावना को देखकर सेल्यूट किया।