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Palwal News: छत पर बंदर तो सड़क पर सांड का आतंक, प्रशासन की लापरवाही ने बढ़ाई नाराजगी
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लोगों का आरोप कई बार दी जा चुकी है मौखिक और लिखित शिकायत, मगर समाधान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। नगर परिषद प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शहर की कॉलोनियों की छतों पर बंदरों और गलियों में सांडों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग अब छतों पर जाने और गलियों से निकलने में डरने लगे हैं। बंदरों का आतंक रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल, बाजार और सरकारी दफ्तरों तक फैल चुका है। रोजाना किसी न किसी पर बंदर हमला कर रहे हैं। प्रशासन को कई बार लिखित व मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। इससे लोगों में नाराजगी और रोष बढ़ता जा रहा है।
सांडों की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। कॉलोनियों की गलियों में सुबह से शाम तक झुंड में खड़े सांड रास्ता जाम किए रहते हैं। कई बार तो घंटों तक सांडों की आपस में लड़ाई होती रहती है, जिससे रास्ते बंद हो जाते हैं। कई लोग इस लड़ाई में घायल हो चुके हैं और एक बाइक सवार की जान भी जा चुकी है।
लोगों का कहना है कि करोड़ों खर्च करने वाली नगर परिषद को बंदरों और सांडों की समस्या को भी गंभीरता से लेना चाहिए। लेकिन अधिकारी कार्यालय में बैठकर आंख मूंदे बैठे हैं। जनता अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रही है।
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नगर परिषद क्षेत्र में लावारिस पशुओं के अलावा बंदरों को पकड़ने के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इनको पकड़ने के लिए टेंडर छोड़े जाएंगे। शहर के आम जनजीवन को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - बेलिना लोहान, एसडीएम, होडल।
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संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। नगर परिषद प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शहर की कॉलोनियों की छतों पर बंदरों और गलियों में सांडों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग अब छतों पर जाने और गलियों से निकलने में डरने लगे हैं। बंदरों का आतंक रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल, बाजार और सरकारी दफ्तरों तक फैल चुका है। रोजाना किसी न किसी पर बंदर हमला कर रहे हैं। प्रशासन को कई बार लिखित व मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। इससे लोगों में नाराजगी और रोष बढ़ता जा रहा है।
सांडों की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। कॉलोनियों की गलियों में सुबह से शाम तक झुंड में खड़े सांड रास्ता जाम किए रहते हैं। कई बार तो घंटों तक सांडों की आपस में लड़ाई होती रहती है, जिससे रास्ते बंद हो जाते हैं। कई लोग इस लड़ाई में घायल हो चुके हैं और एक बाइक सवार की जान भी जा चुकी है।
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लोगों का कहना है कि करोड़ों खर्च करने वाली नगर परिषद को बंदरों और सांडों की समस्या को भी गंभीरता से लेना चाहिए। लेकिन अधिकारी कार्यालय में बैठकर आंख मूंदे बैठे हैं। जनता अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रही है।
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नगर परिषद क्षेत्र में लावारिस पशुओं के अलावा बंदरों को पकड़ने के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इनको पकड़ने के लिए टेंडर छोड़े जाएंगे। शहर के आम जनजीवन को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - बेलिना लोहान, एसडीएम, होडल।