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ऑपरेशन मुस्कान के दूसरे चरण में 125 बच्चों को छुड़ाया
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल
Updated Wed, 17 Feb 2016 03:51 PM IST
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जिला बाल संरक्षण विभाग व हरियाणा पुलिस के साझा अभियान से परिवार से बिछड़ कर दयनीय जीवन जीने वाले बच्चों की मुस्कान लौटाने के अभियान का दूसरा चरण मंगलवार को संपन्न हो गया। दूसरे चरण में 125 बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया। गत वर्ष चले अभियान के पहले चरण में 237 बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया गया था।
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हालांकि इस बार अभियान में जुटे अधिकारियों को लोगों का विरोध का भी सामना करना पड़ा, लेकिन आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो लोगों में बाल मजदूरी न कराने को लेकर जागरूकता भी आई है। टीम ने अबकी बार बंधक बनाकर रखे गए दो बाल मजदूरों को भी उनके परिजनों से मिलाने में सफलता प्राप्त की है। दोनों चरणों में टीम को कुल मिलाकर 362 बच्चों की मुस्कान लौटाने में सफलता मिली है।
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वर्ष 2015 में शुरू हुआ था अभियान
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में इस बहुआयामी अभियान को शुरू किया था, जिसमें ढाबों, होटलों, कारखानों, ईंट भट्टों व घरों में मजदूरी करने वाले बाल श्रमिकों तथा भीख मांगने वाले बच्चों को पुनर्वासित करने की योजना बनाई गई थी। गत वर्ष तत्कालीन एसपी मितेश जैन ने व इस वर्ष एसपी राजेश दुग्गल ने बाल विकास विभाग के साथ हरियाणा पुलिस के अधिकारियों को शामिल कर टीम का गठन किया।
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टीम ने विरोध का सामना भी किया
ऑपरेशन मुस्कान-2 में टीम के अधिकारियों को विरोध का सामना भी करना पड़ा। 21 जनवरी को गांव धतीर में एक हलवाई की दुकान से बाल मजदूर को छुड़ाते समय ग्रामीणों ने विरोध किया। टीम के सदस्यों के साथ बदसलूकी भी की गई। बाद में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। वहीं इस बार टीम को दो बड़ी सफलताएं भी मिलीं, जिनमें एक में ओमैक्स सिटी के एक फ्लैट में तीन माह से बंधक बनाकर रखे गए व गांव अमरपुर में तीन साल से बंधक बनाकर रखे गए बाल श्रमिकों को छुड़ाया गया।
अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहली बार छुड़ाए गए बाल श्रमिकों की संख्या में इस वर्ष आधे बच्चे बाल मजदूरी करते मिले। टीम की मेहनत व लोगों में आई जागरूकता से यह संभव हुआ है। टीम के सदस्य सब इंस्पेक्टर जसबीर व महिला हेड कांस्टेबल प्रवीण, चाइल्ड लाइन एनजीओ से रचना व लेखाकार गुंजन पूरी तन्मयता से अभियान में शामिल रहे।
-सुरेखा डागर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी