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Palwal News: नौकरी दिलाने के नाम पर चार युवकों से ठगे 6.40 लाख रुपये
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- एक माह तक ट्रेनिंग देकर दिया, नियुक्ति पत्र निकला फर्जी
- रुपये वापस मांगे तो दी जान से मारने की धमकी
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स में नौकरी दिलाने के नाम पर चार युवकों से 6.40 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। युवकों को आगरा में एक माह तक ट्रेनिंग दी गई और नियुक्ति पत्र भिजवाए गए। जांच करने पर नियुक्ति पत्र फर्जी निकले। मामले का खुलासा होने पर पीड़ितों ने अपने रुपये वापस मांगे तो जान से मारने की धमकी दी गई। कैंप थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीन नामजद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
कैंप थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सत्यनारायण के अनुसार हरी नगर निवासी सुनील कुमार ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उसने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और वह बेरोजगार है। रोहतक के गांव लाहली निवासी राहुल उसका रिश्तेदार है। राहुल ने बीते वर्ष जून माह में उसके भतीजे नरेश को फोन कर कहा कि उसके परिचित अरविंद पांडे ने आगरा में भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स का कार्यालय खोला हुआ है। अरविंद पांडे बेरोजगार युवकों को नौकरी दिलाने का काम करते हैं। वह युवाओं को एक महीने का प्रशिक्षण देते हैं और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 15 दिन के अंदर नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाता है। नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद आवेदक को उसके जिले में स्थानीय पुलिस थाना, ट्रैफिक थाना, जिला उपायुक्त कार्यालय में भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स के मार्फत काउंसलिंग करवाई जाती है। छह माह की अवधि के दौरान कर्मचारियों को 15 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है और छह माह की काउंसलिंग पूरी होने के बाद भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स में 16 वर्ष के लिए स्थाई नियुक्ति कर दी जाती है, जिसका वेतन करीब 32 हजार रुपये प्रतिमाह होता है। इसी के साथ कर्मचारियों को पिस्टल और वॉकी टॉकी जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। इसके बाद वह राहुल के झांसे में आ गए। राहुल ने उसकी बात अरविंद पांडे से कराई। अरविंद पांडे ने उन्हें नौकरी लगवाने का पूरा विश्वास दिलाया और कहा कि नौकरी के लिए प्रति आवेदक 1.20 लाख रुपये सिक्योरिटी के तौर पर जमा कराने होंगे। इसके बाद उसने अपने व भतीजे नरेश को 2.40 लाख रुपये अरविंद पांडे को दे दिए। इसी तरह ही अरविंद पांडे के साथी गुलशन कुमार ने उनके परिचित राजीव और भूपेंद्र कुमार से नौकरी लगवाने के नाम पर चार लाख रुपये ले लिए। बीते वर्ष के एक सितंबर को आरोपियों ने चारों को कागजात के साथ प्रशिक्षण के लिए आगरा बुलाया। वहां उन्हें पहनने के लिए आर्मी के रंग की वर्दी, जूते दिए गए। रात के समय उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जाता था और दिन में फ्लैट पर रखा जाता था। आरोपियों ने उनके फोन जब्त कर लिए। आरोपियों ने कहा कि यदि फ्लैट से उनकी अनुमति के बिना निकले तो उनके हाथ-पैर तोड़ दिए जाएंगे। उनके साथ फ़्लैट पर तमिलनाडु और उड़ीसा के भी नौ युवकों को ट्रेनिंग के लिए रखा हुआ था। एक माह बाद आरोपियों ने उन्हें घर भेज दिया। बीते वर्ष के नवंबर माह में चारों के पास नियुक्ति पत्र आए। इसके बाद उन्हें कोई सूचना नहीं मिली और आरोपियों ने फोन उठाने भी बंद कर दिए। उन्होंने नियुक्ति पत्र की छानबीन कराई तो वह फर्जी निकले। बीती एक दिसंबर को उनकी गुलशन से बात हुई। उन्होंने गुलशन से रुपये लौटाने के लिए कहा तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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- रुपये वापस मांगे तो दी जान से मारने की धमकी
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स में नौकरी दिलाने के नाम पर चार युवकों से 6.40 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। युवकों को आगरा में एक माह तक ट्रेनिंग दी गई और नियुक्ति पत्र भिजवाए गए। जांच करने पर नियुक्ति पत्र फर्जी निकले। मामले का खुलासा होने पर पीड़ितों ने अपने रुपये वापस मांगे तो जान से मारने की धमकी दी गई। कैंप थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीन नामजद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
कैंप थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सत्यनारायण के अनुसार हरी नगर निवासी सुनील कुमार ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उसने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और वह बेरोजगार है। रोहतक के गांव लाहली निवासी राहुल उसका रिश्तेदार है। राहुल ने बीते वर्ष जून माह में उसके भतीजे नरेश को फोन कर कहा कि उसके परिचित अरविंद पांडे ने आगरा में भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स का कार्यालय खोला हुआ है। अरविंद पांडे बेरोजगार युवकों को नौकरी दिलाने का काम करते हैं। वह युवाओं को एक महीने का प्रशिक्षण देते हैं और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 15 दिन के अंदर नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाता है। नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद आवेदक को उसके जिले में स्थानीय पुलिस थाना, ट्रैफिक थाना, जिला उपायुक्त कार्यालय में भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स के मार्फत काउंसलिंग करवाई जाती है। छह माह की अवधि के दौरान कर्मचारियों को 15 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है और छह माह की काउंसलिंग पूरी होने के बाद भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स में 16 वर्ष के लिए स्थाई नियुक्ति कर दी जाती है, जिसका वेतन करीब 32 हजार रुपये प्रतिमाह होता है। इसी के साथ कर्मचारियों को पिस्टल और वॉकी टॉकी जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। इसके बाद वह राहुल के झांसे में आ गए। राहुल ने उसकी बात अरविंद पांडे से कराई। अरविंद पांडे ने उन्हें नौकरी लगवाने का पूरा विश्वास दिलाया और कहा कि नौकरी के लिए प्रति आवेदक 1.20 लाख रुपये सिक्योरिटी के तौर पर जमा कराने होंगे। इसके बाद उसने अपने व भतीजे नरेश को 2.40 लाख रुपये अरविंद पांडे को दे दिए। इसी तरह ही अरविंद पांडे के साथी गुलशन कुमार ने उनके परिचित राजीव और भूपेंद्र कुमार से नौकरी लगवाने के नाम पर चार लाख रुपये ले लिए। बीते वर्ष के एक सितंबर को आरोपियों ने चारों को कागजात के साथ प्रशिक्षण के लिए आगरा बुलाया। वहां उन्हें पहनने के लिए आर्मी के रंग की वर्दी, जूते दिए गए। रात के समय उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जाता था और दिन में फ्लैट पर रखा जाता था। आरोपियों ने उनके फोन जब्त कर लिए। आरोपियों ने कहा कि यदि फ्लैट से उनकी अनुमति के बिना निकले तो उनके हाथ-पैर तोड़ दिए जाएंगे। उनके साथ फ़्लैट पर तमिलनाडु और उड़ीसा के भी नौ युवकों को ट्रेनिंग के लिए रखा हुआ था। एक माह बाद आरोपियों ने उन्हें घर भेज दिया। बीते वर्ष के नवंबर माह में चारों के पास नियुक्ति पत्र आए। इसके बाद उन्हें कोई सूचना नहीं मिली और आरोपियों ने फोन उठाने भी बंद कर दिए। उन्होंने नियुक्ति पत्र की छानबीन कराई तो वह फर्जी निकले। बीती एक दिसंबर को उनकी गुलशन से बात हुई। उन्होंने गुलशन से रुपये लौटाने के लिए कहा तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
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पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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