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रूस-यूक्रेन युद्ध का असर, खाद्य तेल की कीमतों में हुआ इजाफा

Tue, 01 Mar 2022 09:10 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 09:10 PM IST
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Edible oil prices rise in palwal due to impact of russia ukraine war
पलवल। यूक्रेन और रूस के बीच जारी लड़ाई के कारण खाद्य तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। यूक्रेन से आने वाले सूरजमुखी के तेल का आयात बंद हो गया है, जिससे तेल व रिफाइंड की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो गई है। तेल व्यापारियों के पास मौजूद स्टॉक से फिलहाल तेल की पूर्ति की जा रही है। दुकानदारों की मानें तो सूरजमुखी व रिफाइंड के 15 लीटर के टीन की कीमतों में 300 से 400 रुपये इजाफा हुआ है। यदि आगे भी युद्ध जारी रहा तो कीमतों में और इजाफा होने की संभावना है।
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रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का खामियाजा पूरे विश्व पर पड़ रहा है। विभिन्न देशों की सरकारें यूक्रेन में फंसे अपने लोगों को निकालने के प्रयास में जुटी हैं, वहीं अब युद्ध का असर जनता की जेब पर भी पड़ने लगा है। सबसे ज्यादा असर तेल की कीमतों में देखने को मिला है। जानकारों की मानें तो भारत में हर साल 25 लाख मीट्रिक टन सूरजमुखी के तेल का आयात होता है, जिसमें 70 प्रतिशत यूक्रेन से, 20 प्रतिशत रूस से व 10 प्रतिशत अर्जेंटीना से आता है। ऐसे में जब से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ है, सूरजमुखी के तेल का आयात बंद हो गया है। तेल व्यापारियों ने स्टॉक में मौजूद तेल की कीमतों में वृद्धि कर दी है।
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स्थानीय दुकानदार महेश कुमार ने बताया क ियुद्ध के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। सूरजमुखी तेल का 15 लीटर का टीन 2300 रुपये में आता था, लेकिन अब इसकी कीमत 2600 रुपये हो गई है। इसका असर रिफाइंड पर भी पड़ा है। रिफाइंड का टीन पहले 2100 रुपए का था, जो अब 2400 रुपये का हो गया है।
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तेल व्यापारी मारुत मंगला ने बताया कि भारत में ज्यादातर सूरजमुखी के तेल का आयात यूक्रेन से होता है। तेल की खपत हो देखते हुए युद्ध से पहले ऑर्डर किया गया था, परंतु तेल नहीं पहुंच रहा है। शादियों में रिफाइंड की खपत ज्यादा होती है। भारत में सोयाबीन व सूरजमुखी के रिफाइंड का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री के प्रवीण गर्ग ने बताया कि युद्ध के चलते व्यापारियों पर असर पड़ रहा है। रिफाइंड की कीमते बढ़ने से ग्राहक नहीं आ रहे हैं। तेल व्यापारियों के पास तेल का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है। यदि युद्ध जारी रहा तो कीमतों में और ज्यादा वृद्धि होने की संभावना है।
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