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सरकार की सख्ती के बावजूद नहीं रुक रहीं पराली जलाने की घटनाएं

Tue, 23 Nov 2021 11:24 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 23 Nov 2021 11:24 PM IST
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Despite the strictness of the government, the incidents of stubble burning are not stopping
पलवल। पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने में सरकार और प्रशासन सख्ती के बावजूद रोक नहीं लगवा पा रहा है। किसानों पर हर दिन पराली जलाने पर कार्रवाई भी की जा रही है। उसके बावजूद पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। हर दिन खेतों में पराली जलाई जा रही है। इससे आसपास के क्षेत्र में पराली जलाने से उठने वाले धुएं से प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। पराली जलाने से उठने वाले जहरीला धुआं गांवों में स्थित सांस व अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। खेतों में पराली जलाने से हर तरफ धुआं ही धुआं नजर आता है।
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पलवल जिले में दो गांव घोषित हैं रेड जोन
पलवल जिले प्रशासन पराली जलाने की घटनाओं को देखते हुए जिले के दो गांवों को रेड जोन (अति संवेदनशील) और 16 गांवों को संवेदनशील (येलो जोन) में घोषित किया हुआ है। जिन गांवों में पिछले साल पराली जलाने के पांच से ज्यादा मामले आए थे, वह रेड जोन में शामिल हैं और जिन गांवों में पांच से कम मामले थे वह येलो जोन में शामिल किए गए हैं। जिन गांवों को रेड जोन में शामिल किया हुआ है, उनमें होडल उपमंडल का गांव भिडूकी व खांबी हैं। जबकि येलो जोन में येलो जोन में जिले के बांसवा, सौंदहद, सेवली, हसनपुर, कुशक, पिनगवां, रायदासका, असावटा, छज्जूनगर, किठवाड़ी, रसुलूपुर, अलावलपुर, बढराम, जनौली, खजूरका और मांदकौल शामिल हैं।
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पराली जलाने पर 78 किसानों पर हो चुका है दो लाख जुर्माना
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग जिले में पराली जलाने को लेकर अब तक 78 किसानों पर जुर्माना लगाकर 2 लाख, ढाई हजार रुपये वसूल चुका है। इसके अलावा चार किसानों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है। यह कार्रवाई हरसेक द्वारा 113 फोटो प्राप्त होने पर की गई। जिनमें से 81 मामले सही पाए गए। 31 मामलों की पुष्टि नहीं हुई। एक मामले में अभी कार्रवाई बाकी है। 81 में से 78 किसानों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
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पिछले वर्ष आए थे पराली जलाने के कुल 104 मामले
जिले में वर्ष 2017 में पराली जलाने के कुल 23 मामले सामने आए थे, जिनमें कुल 57 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। वर्ष 2018 में पराली जलाने के मामले बढ़कर 232 हो गए, जिनमें 48 मुकदमे दर्ज किए गए थे और पांच लाख पांच हजार का जुर्माना लगा था। वर्ष 2019 कुल 79 मामले में 70 में मुकदमा दर्ज किया गया था और 42 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। जबकि पिछले वर्ष कुल 104 मामले आए थे, जिनमें दो लाख 92 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
गांव-गांव की जा रही हैं ग्राम सभाओं की बैठकें
प्रशासन गांवों में खेतों पर पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए गांव-गांव जाकर ग्राम सभाओं की बैठक कर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। इसके अलावा गांवों में कृषि कल्याण विभाग की तरफ से जागरूकता वैन भी चलाई हुई है, जो गांवों में जाकर किसानों को जागरूक कर रही है, लेकिन उसके बावजूद किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे। पराली जलाने की घटनाओं पर रोकथाम के लिए सरकार पराली निस्तारण यंत्रों के लिए बड़ी मात्रा में किसानों को सब्सिडी भी दे रही है, जो किसान यंत्र खरीदने में असमर्थ हैं उन्हें किराए पर यंत्र दिए जाएंगे। पराली को खरीदने के लिए भी प्रबंध किए गए हैं।

- कुलदीप तेवतिया, एसडीओ, कृषि विभाग
पराली जलाने से निकलने वाला धुआं है नुकसानदायक
पराली जलाने से निकलने वाला धुआं बेहद नुकसानदायक है। यह जहरीला धुआं सांस व अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। सामान्य लोगों में भी इससे सांस की बीमारी बन सकती है। ऐसे में लोगों को इससे बचना चाहिए। किसानों को चाहिए कि वे पराली न जलाएं। सांस व अस्थमा के मरीज घरों में रहें तथा जहां पराली जलाने से धुआं उठ रहा है, वहां न जाएं।
- डॉ. लोकवीर , वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी पलवल
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