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सख्त कानून के बाद भी बाल मजदूरी पर अंकुश नहीं, प्रशासन बेखबर

Sat, 12 Jun 2021 11:35 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 12 Jun 2021 11:35 PM IST
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Despite strict laws, there is no control on child labor, administration oblivious
अनूप पाराशर
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पलवल। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर लोगों ने सोशल मीडिया पर बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने के लिए बड़ी-बड़ी पोस्ट डाली हैं। प्रशासन भी बाल मजदूरी रोकने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन सड़कों पर बाल मजदूरी करते बच्चे न तो प्रशासन को दिखाई दिए और न ही समाजसेवी संस्थाओं को। सरकार के बाल मजदूरी रोकने के प्रयास और प्रशासन के दावे पलवल जिले में पूरी तरह से फेल हो रहे हैं। अब भी जिले में बाल मजदूरी धड़ल्ले से हो रही है। बाल मजदूरी रुक रही है और न ही बाल मजदूरी कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। जिला प्रशासन की नाक के नीचे ही बाल मजदूरी होती रहती है, लेकिन प्रशासन बेखबर बना हुआ है।
सरकार ने बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने के लिए बाल मजदूर निषेध अधिनियम लागू किया है। प्रदेश सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों को जिले में बाल मजदूरी रोकने और बाल मजदूरी कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश भी दिए हुए हैं। इतना ही नहीं जिला बाल संरक्षण अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। लेकिन, बाल मजदूरी को रोकने के प्रयास किसी भी स्तर पर नहीं हो रहे हैं। आज भी बच्चे सड़कों पर रोटी का जुगाड़ करने के लिए कबाड़ा बीनते देखे जा सकते हैं। इसके अलावा होटलों, ढाबों, चाय के खोखे पर बाल मजदूरी कर रहे हैं। इन बच्चों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है। मजे की बात यह है कि जिला सचिवालय में भी अधिकारियों को चाय पिलाने के लिए कई बार बच्चे ही आते हैं, लेकिन वे भी अधिकारियों को दिखाई नहीं देते हैं। (संवाद)
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उपमंडल स्तर पर बनाई गईं थी कमेटियां
बाल मजदूरी रोकने के लिए 2009 में कमेटी बनाई गई थी। उपायुक्तों द्वारा हर उपमंडल पर एसडीएम के नेतृत्व में ब्लाक स्तर पर कमेटियों का गठन किया गया था। इन कमेटियों में बाल संरक्षण अधिकारी के अलावा चार-चार गैर सरकारी सदस्य भी मनोनीत किए गए थे। जिला उपायुक्त द्वारा ही सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों को इन कमेटियों का सदस्य बनाया गया था, लेकिन अब तक न तो उन कमेटियों की कभी बैठक हुई और न ही वे सदस्य बदले गए।
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बाल मजदूरी रोकने के लिए सरकार और प्रशासन को गंभीर होना चाहिए। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के तत्वावधान में होटल, ढाबा संचालकों के साथ-साथ कंपनियों में जाकर भी बाल मजदूरी को लेकर जागरूक किया जाता है। लेकिन, प्रशासन की चुप्पी के कारण अंकुश नहीं लग पा रहा है।
- लाल सिंह तेवतिया, पैनल अधिवक्ता जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण
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बाल मजदूरी रोकने के हर संभव प्रयास होने चाहिए। इसके लिए सरकार व प्रशासन के साथ-साथ उन लोगों को भी ध्यान रखना चाहिए, जो बाल मजदूरी को बढ़ावा दे रहे हैं। बच्चों को बाल मजूदरी कराने के बजाय उन्हें शिक्षित बनाने पर जोर देना चाहिए। इस मुद्दे पर जल्द ही उपमुख्यमंत्री से बात करूंगा।

- राजीव लांबा, पूर्व उपाध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन पलवल
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बाल मजदूरी रोकने के लिए जिला बाल संरक्षण विभाग पूरी तरह से गंभीर है। उपायुक्त ने श्रम अधिकारी को छापे मारने के आदेश दिए हुए हैं। विभाग द्वारा समय-समय पर ढाबों, होटलों, रेहड़ियों और चाय की दुकानों के अलावा भट्ठों पर भी छापे मारे जाते हैं। कई बार बाल मजदूरी कर रहे बच्चों को मुक्त भी कराया गया है। जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। लोगों से अपील है कि बच्चों को बाल मजदूरी के लिए न भेजें।
- सीता इंदीवर, बाल संरक्षण अधिकारी पलवल
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