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Palwal News: 22 गांवों की 170 शिकायतों का एक दिन में डीसी ने समाधान कर बनाया रिकॉर्ड
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उम्र होने के बावजूद नहीं बन रही बुढ़ापा, अविवाहित और दिव्यांग पेंशन
11 जून को मुख्यमंत्री के आदेश पर प्रदेश के 22 जिलों में शुरू किए थे समाधान शिविर
राजूद्दीन जंग
नगीना। सालों से बुढ़ापा पेंशन बनवाने के लिए चक्कर काट रहे नूंह जिले के 22 गांवों से संबंध रखने वाले 170 बुजुर्गों ने ''''समाधान शिविर'''' में एकसाथ शिकायत देकर हरियाणा प्रदेश में नया रिकॉर्ड बनाया है। इनमें अकेले नगीना खंड के 18 गांवों की 166 शिकायतें शामिल है। पिछले 10 दिन में किसी भी जिले से एक दिन में यह सबसे अधिक शिकायतें हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आदेश पर हरियाणा के 22 जिलों में 11 जून से शुरू किए गए समाधान शिविर में पहले दिन 457 शिकायतें थी।
पेंशन से जुड़ी सभी शिकायतों के समाधान के लिए नूंह जिला उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने बुधवार को एक विशेष टीम क्रेडिट के अधिकारी मोहम्मद अनीस खान के नेतृत्व में गठित की थी जिसने देररात तक काम करते हुए सभी शिकायतों को अंजाम तक पहुंचाया। माना जा रहा है कि हरियाणा प्रदेश के मात्र एक पिछड़े जिले नूंह के अधिकारी समाधान शिविर में आने वाली शिकायतों को गंभीरता से ले रहे हैं। यही नहीं एक दिन में 172 शिकायतों पर संज्ञान लेने के मामले की काफी चर्चा है। घागस, करहेडा फिरोजपुर व गुमटबिहारी में 7 दिव्यांग, अविवाहित भी हैं, 165 शिकायत बुढ़ापा पेंशन से जुड़ी हैं। जमीनी सतह पर कार्य करने वाली सामाजिक संस्था मौजी फाउंडेशन के बैनर तले संबंधित गांवों के लोगों को उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जिला उपायुक्त नूंह से मिलवाया गया था। फाउंडेशन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी चौधरी सोहराब खान पूर्व डीएसपी सिरौली ने बताया कि आमजन की ग्राम स्तर पर उम्र पूरी होते हुए भी पेंशन नहीं मिलने की काफी समस्याएं हैं। शिकायतों को उपायुक्त नूंह के सामने रखा है और उपायुक्त का पॉजिटिव रुख रहा तथा सभी समस्याओं का समाधान कराया है। क्रिड जेड स्कीम खंड पदाधिकारी अजरूद्दीन ने बताया कि 170 समस्याओं के समाधान के लिए नगीना से नूंह बुलाया गया था। नियमानुसार शिकायतों का समाधान किया है।
गांव घागस के अलीशेर हंडा ने बताया कि जून 1960 में उनका जन्म हुआ था परंतु अभी तक बुढ़ापा पेंशन नहीं बनी। डीसी साहब ने समस्या का समाधान कराया है, उम्मीद है कि जल्दी पेंशन आएगी। अगर समाधान शिविर में नहीं आते तो पता नहीं कितने दिन ओर चक्कर काटने पड़ते। गुमट बिहारी की परमीना ने कहा कि उनका दिव्यांगता सर्टिफिकेट बना हुआ है। फैमिली आईडी में सभी जरूरी कागजात भी जोड़ दिए, फिर भी पेंशन के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। अब लग रहा है कि काम हो गया। इकबाल खान ने बताया कि उम्र भी 60 से ऊपर हो चुकी है और अविवाहित हूं फिर भी पेंशन नहीं बन रही थी। अब जरूरी प्रक्रिया पूरी हो गई है तो पेंशन आ ही जाएगी।
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22 गांवों से जुड़ी समस्याएं : नूंह जिला के 22 गांवों से मिली 172 शिकायतों में गांव मुलथान से 26, घागस से 18, गुमट बिहारी 17, कंसाली 15, करहेड़ा फिरोजपुर 14, नांगल मुबारिकपुर 14, नगीना 13, फकरपुर खोरी 10, नोटकी 9, जैताका 9, उलेटा 8, शाहपुर 3, सांठावाड़ी 3, बीसरू 3, भादस 2, अकलीमपुर नूंह 3, झिमरावट 2, भूडबास 1, नाहरपुर 1, बाइका डंडा 1, मरोडा 1, महूं 1 शामिल हैं।
नूंह डीसी धीरेंद्र खड़गटा ने बताया कि 22 गांवों की 170 शिकायतें बुधवार को प्राप्त हुई थी जिनका समाधान कराया है। मुख्यमंत्री के आदेश पर समाधान शिविर 9 से 11 बजे रोजाना सोमवार से शुक्रवार लगाते है। अधिकतर शिकायतों का समाधान मौके पर होता है, जो शिकायतें रह जाती हैं उनका देरशाम या अगले दिन सुबह तक समाधान होता है। कुछ शिकायतों के लिए समयावधि तय होती है।
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11 जून को मुख्यमंत्री के आदेश पर प्रदेश के 22 जिलों में शुरू किए थे समाधान शिविर
राजूद्दीन जंग
नगीना। सालों से बुढ़ापा पेंशन बनवाने के लिए चक्कर काट रहे नूंह जिले के 22 गांवों से संबंध रखने वाले 170 बुजुर्गों ने ''''समाधान शिविर'''' में एकसाथ शिकायत देकर हरियाणा प्रदेश में नया रिकॉर्ड बनाया है। इनमें अकेले नगीना खंड के 18 गांवों की 166 शिकायतें शामिल है। पिछले 10 दिन में किसी भी जिले से एक दिन में यह सबसे अधिक शिकायतें हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आदेश पर हरियाणा के 22 जिलों में 11 जून से शुरू किए गए समाधान शिविर में पहले दिन 457 शिकायतें थी।
पेंशन से जुड़ी सभी शिकायतों के समाधान के लिए नूंह जिला उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने बुधवार को एक विशेष टीम क्रेडिट के अधिकारी मोहम्मद अनीस खान के नेतृत्व में गठित की थी जिसने देररात तक काम करते हुए सभी शिकायतों को अंजाम तक पहुंचाया। माना जा रहा है कि हरियाणा प्रदेश के मात्र एक पिछड़े जिले नूंह के अधिकारी समाधान शिविर में आने वाली शिकायतों को गंभीरता से ले रहे हैं। यही नहीं एक दिन में 172 शिकायतों पर संज्ञान लेने के मामले की काफी चर्चा है। घागस, करहेडा फिरोजपुर व गुमटबिहारी में 7 दिव्यांग, अविवाहित भी हैं, 165 शिकायत बुढ़ापा पेंशन से जुड़ी हैं। जमीनी सतह पर कार्य करने वाली सामाजिक संस्था मौजी फाउंडेशन के बैनर तले संबंधित गांवों के लोगों को उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जिला उपायुक्त नूंह से मिलवाया गया था। फाउंडेशन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी चौधरी सोहराब खान पूर्व डीएसपी सिरौली ने बताया कि आमजन की ग्राम स्तर पर उम्र पूरी होते हुए भी पेंशन नहीं मिलने की काफी समस्याएं हैं। शिकायतों को उपायुक्त नूंह के सामने रखा है और उपायुक्त का पॉजिटिव रुख रहा तथा सभी समस्याओं का समाधान कराया है। क्रिड जेड स्कीम खंड पदाधिकारी अजरूद्दीन ने बताया कि 170 समस्याओं के समाधान के लिए नगीना से नूंह बुलाया गया था। नियमानुसार शिकायतों का समाधान किया है।
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गांव घागस के अलीशेर हंडा ने बताया कि जून 1960 में उनका जन्म हुआ था परंतु अभी तक बुढ़ापा पेंशन नहीं बनी। डीसी साहब ने समस्या का समाधान कराया है, उम्मीद है कि जल्दी पेंशन आएगी। अगर समाधान शिविर में नहीं आते तो पता नहीं कितने दिन ओर चक्कर काटने पड़ते। गुमट बिहारी की परमीना ने कहा कि उनका दिव्यांगता सर्टिफिकेट बना हुआ है। फैमिली आईडी में सभी जरूरी कागजात भी जोड़ दिए, फिर भी पेंशन के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। अब लग रहा है कि काम हो गया। इकबाल खान ने बताया कि उम्र भी 60 से ऊपर हो चुकी है और अविवाहित हूं फिर भी पेंशन नहीं बन रही थी। अब जरूरी प्रक्रिया पूरी हो गई है तो पेंशन आ ही जाएगी।
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22 गांवों से जुड़ी समस्याएं : नूंह जिला के 22 गांवों से मिली 172 शिकायतों में गांव मुलथान से 26, घागस से 18, गुमट बिहारी 17, कंसाली 15, करहेड़ा फिरोजपुर 14, नांगल मुबारिकपुर 14, नगीना 13, फकरपुर खोरी 10, नोटकी 9, जैताका 9, उलेटा 8, शाहपुर 3, सांठावाड़ी 3, बीसरू 3, भादस 2, अकलीमपुर नूंह 3, झिमरावट 2, भूडबास 1, नाहरपुर 1, बाइका डंडा 1, मरोडा 1, महूं 1 शामिल हैं।
नूंह डीसी धीरेंद्र खड़गटा ने बताया कि 22 गांवों की 170 शिकायतें बुधवार को प्राप्त हुई थी जिनका समाधान कराया है। मुख्यमंत्री के आदेश पर समाधान शिविर 9 से 11 बजे रोजाना सोमवार से शुक्रवार लगाते है। अधिकतर शिकायतों का समाधान मौके पर होता है, जो शिकायतें रह जाती हैं उनका देरशाम या अगले दिन सुबह तक समाधान होता है। कुछ शिकायतों के लिए समयावधि तय होती है।